थराली से हरेंद्र बिष्ट।
रोजगार का सब्जबाग दिखा कर परियोजना के निर्माण का दंभ भरने वाली एसजेवीएन अब पिछले करीब 12 वर्षों से उपनल के माध्यम से लगें बेरोजगारों को हटाने में तुली हुई हैं।जिस का विरोध करते हुए यहां पर कार्यरत युवाओं को ने इसका प्रतिकार करते हुए उन्हें हटाने पर आंदोलनात्मक कदम उठाने की चेतावनी देते हुए सतलुज परियोजना प्रबंधन को पत्र भेजा हैं।
दरअसल एसजेवीएन के द्वारा पिंडर नदी पर देवसारी जल विद्युत परियोजना के नाम पर 172 मेगावाट की जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण के तहत सर्वेक्षण,भूमि स्थानान्तरण, सहित तमाम अन्य कार्यों का 2005 से कार्य किया जा रहा हैं। इसके तहत सतलुज कंपनी के द्वारा परियोजनाएं प्रभावितों के साथ ही इससे जुड़े आसपास के क्षेत्रों के युवाओं को उपनल के माध्यम से विभिन्न कार्यों के संपादन के लिए युवाओं को नियुक्त किया गया हैं।
इसके तहत कई युवाओं को परियोजना में 10 से 12 वर्ष हो चुके हैं। किंतु इस बार सतलुज के द्वारा इस वर्ष 31 मार्च को उपनल के माध्यम से लगें सभी 18 युवक, युवतियों को हटा दिया गया। किंतु कुछ ही दिनों के बाद 10 युवकों को तों पुनः नियुक्ति दे दी हैं। किंतु 8 को अब तक नियुक्ति नही दी गई हैं।
अब तक पुनः नियुक्ति पाने से वंचित परियोजना के कारण डुब गांव में सम्लित सरकोट के सोड़िग गांव निवासी राकेश बिष्ट एवं प्रभावित गांव कैल ग्राम पंचायत के खणीगाड़ निवासी सुरेंद्र बिष्ट ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2020-21 के समापन होने एवं अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष शुरू होने के तीन महीनों के बाद भी उन्हें पुनः नियुक्ति नही दी गई हैं। जिससे उनके एवं उनके परिवार के सम्मुख भुखमरी की सी स्थिति पैदा हो गई हैं।
इस संबंध में उन्होंने एसजेवीएन के महाप्रबंधक को एक पत्र भेज कर पुनः नियुक्ति की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी हैं। इस संबंध मेंकंपनी के प्रबंधक आशुतोष बहुगुणा का कहना है कि जिन भी लोगो को सतलुज से हटाया गया है।वे सभी उपनल के माध्यम से सलतुज कंपनी के साथ जुड़े हुए थे और अब उनका उपनल के साथ अनुबंध खत्म हो गया है साथ ही उन्होंने कहा कि परियोजना का निर्माण कार्य शुरू होने पर प्रभावित क्षेत्र ही नही बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया करवाया जाएगा।