• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

उत्तराखण्ड की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी थी बिशनी देवी शाह

12/10/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
4
SHARES
5
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
बिशनी देवी शाह महिला राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन क्रांतिकारी थी, जो बिटिस शासन के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन में लड़ाई लड़ते हुए जेल जाने वाली उत्तराखंड की पहली महिला राष्ट्रीय स्वतंत्रता सेनानी थीं। बिशनी देवी उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के एक साधारण परिवार से थी, जिनका जन्म साल 1912 में हुआ। उन्होंने चौथी कक्षा तक पढ़ाई की थी, जिसके बाद बिशनी की शादी 12 वर्ष की छोटी उम्र में हो गई। शादी के 4 साल बाद ही उनके पति का देहांत हो गया। पति के देहांत के बाद उन्हें समाज की कुरीतियों और रूढ़िवादी सोच का सामना करना पड़ा। उस समय सामाजिक दबाव के कारण कम आयु में पति की मृत्यु होने पर ज्यादातर महिलाएं सन्यास धारण कर माई बनने को विवश हो जाती थीं, उन्हें कोई रहने, खाने की व्यवस्था नहीं थी, न ही घर वाले अपनाते थे, बिशनी देवी साह ने कई स्वतंत्रता आंदोलनों में अहम भूमिका निभाई थी।  इसके बावजूद उन्हें वह पहचान नहीं मिली, जिसकी वह हकदार थीं।  अब डाक विभाग ने बिशनी देवी को उनकी पहचान दिलाने के लिए लिफाफे में उनकी फोटो और उनका जीवन परिचय लिखा है, जिससे उनको सही पहचान मिल सके। बिशनी देवी का जन्म12 अक्टूबर, 1902 को बागेश्वर में हुआ था।  13 साल की उम्र में अल्मोड़ा निवासी शख्स से उनकी शादी हो गई थी।  जब वह 16 साल की थीं, तो उनके पति का निधन हो गया था।  जिसके बाद मायके और ससुराल वालों ने उन्हें ठुकरा दिया था। वहां बिशनी देवी ने इस परम्परा को न मानकर स्वतन्त्रता आंदोलन में एक क्रांतिकारी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बिशनी देवी पहाड़ी क्षेत्रों में महिला आंदोलनकरियों के साथ सहयोगी बनकर साथ चलीं और उनके मनोबल को बढ़ाने में हर प्रकार से मदद कीं। वह महिलाओं के संगठित करने, सामाजिक सांस्कृतिक अधिकारों के प्रति प्रेरित करती थी। 2 फरवरी 1931 को जब बागेश्वर में महिलाओं ने स्वतंत्रता की मांग को लेकर जुलूस निकाला तो बिशनी देवी ने बागेश्वर के सेरा दुर्ग में आधी नाली जमीन और 5 रुपये दान देकर आर्थिक मदद की। वह स्वतंत्रता आंदोलनकारियों के लिए धन जुटाने, विभिन्न सामग्री पहुंचाने और पत्रवाहक का काम भी करती थीं। 7 जुलाई 1933 में बिशनी देवी साह को ब्रिटिश शासन ने फिर से गिरफ्तार कर फतेहगढ़ जेल में डाल दिया। उन्हें नौ महीने की सजा और 200 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई। जंगे आजादी में अदम्य साहस और प्रतिरोध का जौहर दिखाने में उत्तराखंड की महिलाएं पहली पंक्ति में शुमार रही हैं। वीरांगना बिशनी देवी साह को स्वतंत्रता आंदोलन में जेल जाने वाली उत्तराखंड की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी के रूप में जाना जाता है। उनके क्रांतिकारी नेतृत्व से अंग्रेजी हुकूमत इस कदर खौफजदा हुई कि उन्हें दो बार जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया गया।25 अक्तूबर 1930 को अल्मोड़ा नगर पालिका में तिरंगा फहराने पर उन्हें दिसंबर-1930 में गिरफ्तार कर लिया गया और जेल में कठोर यातनाएं दी गईं। जेल से रिहा होने के बाद वह अल्मोड़ा में स्वदेशी के प्रचार-प्रसार में लग गईं। खादी के प्रचार के लिए उन्होंने चर्खा खरीदकर घर-घर जाकर महिलाओं को बांटना शुरू किया और महिला समूह बनाकर चर्खा चलाने का प्रशिक्षण दिया। दो फरवरी 1931 को जब बागेश्वर में महिलाओं ने स्वतंत्रता की मांग को लेकर जुलूस निकाला तो बिशनी देवी ने आर्थिक मदद भी की। स्वतंत्रता आंदोलन में लगातार सक्रिय रहने के कारण बिशनी देवी को सात जुलाई 1933 को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें नौ महीने की सजा के साथ 200 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया जो उस समय के हिसाब से बड़ी राशि थी। जुर्माने की राशि अदा नहीं कर पाने पर उनकी कैद बढ़ाकर एक साल कर दी गई। हालांकि स्वास्थ्य खराब होने पर उन्हें जल्द रिहा कर दिया गया। 1934 में मकर संक्रांति पर जब बागेश्वर में उत्तरायणी मेला लगा तो अंग्रेज सरकार ने मेले में धारा-144 लगा दी। बिशनी देवी साह ने धारा-144 की परवाह ना करते हुए मेला स्थल पर खादी की प्रदर्शनी लगाई।अंग्रेजी हुकुमत में तिरंगा फहराना अपराध माना जाता था। उत्तराखंड में आजादी के परवानों ने 25 अक्टूबर 1930 को अल्मोड़ा नगर पालिका में राष्ट्रीय ध्वज फहराने का निर्णय किया। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं भी शामिल थी। पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक रोका। पुलिस लाठीचार्ज में मोहनलाल जोशी और शांति त्रिवेदी गंभीर रुप से घायल हो गए। इससे आंदोलनकारी और उग्र हो गए। बिशनी देवी साह, कुंती वर्मा, मंगला देवी, भगीरथी देवी, जीवंती देवी, दुर्गा देवी पंत, तुलसी देवी रावत, भक्ति देवी त्रिवेदी, रेवती देवी आदि महिलाओं ने जुलूस का नेतृत्व किया।पुलिस के लाठीचार्ज की सूचना मिलने पर स्वतंत्रता सेनानी बद्रीदत्त पांडे और देवीदत्त पंत अनेक लोगों के साथ घटना स्थल पर पहुंचे। इससे आंदोलनकारी महिलाओं को बल मिला और वे नगर पालिका में झंडारोहण करने में सफल रहीं। 23 जुलाई 1935 में अल्मोड़ा के कांग्रेस भवन में बिशनी देवी साह ने तिरंगा फहराया। विजय लक्ष्मी पंडित ने भी कुमाऊं यात्रा के दौरान उनके महिला नेतृत्व की सराहना की। 26 जनवरी 1940 में उन्होंने अल्मोड़ा में झंडारोहण किया और 1940-41 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में भाग लिया। साल 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में बिशनी ने अल्मोड़ा में सक्रिय भागीदारी की। 15 अगस्त 1947 को जब देश स्वतंत्र हुआ, बिशनी देवी ने अल्मोड़ा में तिरंगे के साथ विशाल रैली का नेतृत्व किया। हालांकि स्वतंत्रता के बाद उनके योगदान के बावजूद आज़ाद भारत में वह सम्मान नहीं मिला जो उन्हें मिलना चाहिए था। उन्होंने अपना जीवन एकल महिला के रूप में जिया। आर्थिक तंगी के बीच उनके अंतिम दिन बीते और 1974 में 93 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। यह कहानी न केवल उनके साहस को दिखाती है, बल्कि यह भी याद दिलाती है कि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को उचित मान्यता और सम्मान मिलना कितना जरूरी है। बिश्नीन देवी का राष्ट्र प्रेम 19 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय गीत के गायन से शुरू हुआ. कुमाऊंनी कवि गौर्दा के गीतों को महिलाएं रात्रि जागरण में गाया करती थी. इससे स्त्रियों में राष्ट्रीय भावना का संचार हुआ. अल्मोड़ा में नन्दा देवी के मन्दिर में होने वाली सभाओं में भाग लेने और स्वदेशी प्रचार कार्यों में बिश्नी देवी काम करने लगीं. आन्दोलनकारियों को महिलाएं प्रोत्साहित करती थीं, जेल जाते समय सम्मानित कर पूजा करती, आरती उतारतीं और फूल चढ़ाया करती थीं. उत्तराखंड की कई महिलाओं ने स्वतंत्रता संग्राम में अपना जीवन बलिदान किया। उनके बलिदान ने न केवल उस समय के आंदोलनकारियों को प्रेरित किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया। उनके योगदान ने यह साबित कर दिया कि स्वतंत्रता की लड़ाई में लिंग भेद नहीं होता और महिलाएं भी राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर सकती हैं।संक्षेप में, उत्तराखंड की महिलाओं ने स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण और गौरवशाली भूमिका निभाई। बिशनी देवी शाह और श्यामा वत्स जैसी नेताओं ने अपने साहस और दृढ़ संकल्प से महिलाओं को संगठित किया और उन्हें आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उनके योगदान ने न केवल स्थानीय संघर्षों को मजबूत किया, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय आंदोलन की मुख्यधारा से जोड़ा। उनका बलिदान और संघर्ष हमें हमेशा यह याद दिलाता रहेगा कि स्वतंत्रता हमें महिलाओं और पुरुषों दोनों के सामूहिक प्रयासों से मिली है।.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

Share2SendTweet1
Previous Post

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने श्री बदरीनाथ धाम पहुंचकर भगवान बदरीविशाल के दर्शन किये

Next Post

उत्तराखण्ड सिद्धपीठ कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले का आगाज

Related Posts

उत्तराखंड

यूजेवीएन लिमिटेड ने पंप्ड स्टोरेज परियोजना की दिशा में बढ़ाया कदम

October 12, 2026
4
उत्तराखंड

ऑनलाइन हाजिरी बनी परेशानी का सबब मेहनताने को भटक रहे श्रमिक

October 12, 2026
8
उत्तराखंड

उत्तराखण्ड सिद्धपीठ कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले का आगाज

October 12, 2026
5
उत्तराखंड

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने श्री बदरीनाथ धाम पहुंचकर भगवान बदरीविशाल के दर्शन किये

October 12, 2026
3
उत्तराखंड

तारबाड़ में फंसा भालू, वन विभाग की टीम ने निकाल कर जंगल में छोड़ा

October 12, 2026
9
उत्तराखंड

गढ़वाल के 52 गढ़ों में सुमार बधाणगढ़ी में शरादीय नवरात्रि के पर्व पर नंदा भगवती के भक्तों का तांता लगा

October 12, 2026
3

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67751 shares
    Share 27100 Tweet 16938
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45794 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38079 shares
    Share 15232 Tweet 9520
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37460 shares
    Share 14984 Tweet 9365
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37383 shares
    Share 14953 Tweet 9346

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

यूजेवीएन लिमिटेड ने पंप्ड स्टोरेज परियोजना की दिशा में बढ़ाया कदम

October 12, 2026

ऑनलाइन हाजिरी बनी परेशानी का सबब मेहनताने को भटक रहे श्रमिक

October 12, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.