• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

वाइब्रेंट व फर्स्‍ट विलेज बने उत्तराखंड में उम्मीद की किरण

31/12/25
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
10
SHARES
12
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
देश के रणनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण में तब बड़ा बदलाव आया, जब वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित माणा गांव का दौरा किया। तब उन्होंने माणा को देश का प्रथम गांव घोषित किया था। पहले माणा को देश का अंतिम गांव कहा जाता था। यह केवल नाम का बदलाव नहीं, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के प्रति सरकार की प्राथमिकता का संकेत था। इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने सीमावर्ती गांवों के चहुंमुखी विकास के लिए प्रारंभ किया महत्वाकांक्षी वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम।पलायन का दंश झेल रहे उत्तराखंड के सीमावर्ती गांवों के लिए यह कार्यक्रम किसी संजीवनी से कम नहीं है। चीन और नेपाल की सीमा से सटे राज्य के 91 गांव इस कार्यक्रम में शामिल किए किए हैं। चीन सीमा से सटे 51 गांवों में 212 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न योजना संचालित की जा रही हैं, जबकि नेपाल सीमा से लगे गांवों के विकास को कार्ययोजना बनाने को कसरत चल रही है। यही नहीं, अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे अन्य गांवों के विकास के लिए मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के प्रथम चरण में केंद्र सरकार ने इसमें चीन सीमा से सटे गांवों को शामिल किया। चूंकि, उत्तराखंड के तीन जिलों पिथौरागढ़, चमोली व उत्तरकाशी की लगभग 345 किलोमीटर की सीमा चीन से लगती है, ऐसे स्वाभाविक रूप से यहां के 51 गांव सम्मिलित किए गए। अब वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम 2.0 में नेपाल सीमा से सटे चंपावत, पिथौरागढ़ व ऊधम सिंह नगर जिलों के 40 गांव सम्मिलित किए गए हैं।वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम में शामिल चीन सीमा से सटे गांवों को जीवंत बनाने के लिए 10 थीम पर आधारित कार्य हो रहे हैं। इनमें आजीविका विकास, आधारभूत ढांचा, पानी, बिजली, सड़क, संचार, पर्यटन, होम स्टे, कृषि-उद्यान जैसे बिंदु शामिल हैं। इन गांवों के विकास के लिए वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम व कन्वर्जंस के माध्यम से 523 कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें वाइब्रेंट विलेज के 161 और कन्वर्जंस के 362 कार्य हैं। इनकी कुल लागत 520.13 करोड़ रुपये है। केंद्र सरकार ने प्रथम चरण में 212 करोड़ रुपये की 179 योजनाओं को स्वीकृति दी और ये कार्य चल रहे हैं। इसके अलावा पिथौरागढ़ जिले के वाइब्रेंट विलेज में शामिल गांवों के लिए पीएमजीएसवाई में पांच सड़कें स्वीकृत की गई हैं। उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में देखें तो यहां के गांव पलायन का दंश झेल रहे हैं। जबकि, अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांवों का खाली होना किसी भी दशा में उचित नहीं ठहराया जा सकता। कारण यह कि सीमा पर होने वाली किसी भी प्रकार की गतिविधि की जानकारी स्थानीय निवासियों से ही सुरक्षा एजेंसियों को मिलती है।यानी, सीमावर्ती गांवों के लोग सुरक्षा प्रहरी की भूमिका भी निभाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि सीमावर्ती गांव जीवंत रहे और यह तभी होगा, जब वहां लोग रहेंगे। इसी के दृष्टिगत वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम में इन गांवों को सरसब्ज बनाने के साथ ही आजीविका विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। साथ ही इन्हें पर्यटन के माडल ग्राम के रूप में भी विकसित करने की योजना है, ताकि वहां वर्षभर चहल-पहल रहे। सीमावर्ती को सरसब्ज बनाने के साथ ही आजीविका विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। साथ ही इन्हें पर्यटन के माडल ग्राम के रूप वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम में इन गांवों में भी विकसित करने की योजना है, ताकि वहां वर्षभर चहल-पहल रहे। गांवों के लोग सुरक्षा प्रहरी की भूमिका भी निभाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि सीमावर्ती गांव जीवंत रहे और यह तभी होगा, जब वहां लोग रहेंगे।भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है.लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं।लेखक वर्तमान में दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।

Share4SendTweet3
Previous Post

जिलाधिकारी गौरव कुमार एवं पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने पीपलकोटी स्थित निर्माणाधीन टीएचडीसी विष्णुगाड–पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया

Next Post

दर्द निवारक दवा निमेसुलाइड के खिलाफ केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

Related Posts

उत्तराखंड

सीएम धामी ने हल्द्वानी में कानून व्यवस्था व विकास कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की

February 28, 2026
6
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने लोहियाहेड में नवनिर्मित ओपन जिम का किया लोकार्पण

February 28, 2026
9
उत्तराखंड

नई शिक्षा नीति पर आधारित पुस्तकों के बारे में जानकारी दी

February 28, 2026
9
उत्तराखंड

नागरिक शिक्षा केन्द्र के उद्घाटन के साथ बच्चों ने छोटे- छोटे विज्ञान प्रयोग कर मनाया राष्ट्रीय विज्ञान दिवस

February 28, 2026
8
उत्तराखंड

बार एसोसिएशन थराली के द्वारा होली मिलन का कार्यक्रम आयोजित

February 28, 2026
34
उत्तराखंड

पैसों के लेन-देन के विवाद में मिस्त्री बबलू की हत्या, सिर पर हथौड़े से किया था वार

February 28, 2026
128

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67657 shares
    Share 27063 Tweet 16914
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45773 shares
    Share 18309 Tweet 11443
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38046 shares
    Share 15218 Tweet 9512
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37435 shares
    Share 14974 Tweet 9359
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37322 shares
    Share 14929 Tweet 9331

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

सीएम धामी ने हल्द्वानी में कानून व्यवस्था व विकास कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की

February 28, 2026

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने लोहियाहेड में नवनिर्मित ओपन जिम का किया लोकार्पण

February 28, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.