डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड चारधाम यात्रा की तैयारियों में मौसम बड़ा अड़ंगा लगा रहा है. बीते दिनों हुई बारिश ने चारधाम यात्रा की तैयारियों पर ब्रेक लगा दिया था. हालांकि अब भारी बारिश के थमने के बाद चटक धूप पहाड़ों के लिए नई मुसीबत लेकर आई है. मौसम साफ होते ही पहाड़ियों के दरकने का सिलसिला तेज हो गया है, जिसके चलते बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर पिनौला के पास पहाड़ का एक विशाल हिस्सा टूटकर अचानक सड़क पर आ गिरा.भूस्खलन से मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया और यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गईं. गनीमत रही कि मलबे की चपेट में कोई वाहन नहीं आया. प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए तत्काल भारी मशीनों को मौके पर तैनात कर दिया है और युद्धस्तर पर मलबा हटाने का कार्य जारी है. अधिकारियों का अनुमान है कि जल्द ही मार्ग को सुचारू कर दिया गया, लेकिन यात्रियों को एहतियात बरतने की सलाह दी गई है. दरअसल, शुक्रवार को चमोली जनपद में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग गोविंदघाट से पहले पिनौला के समीप अचानक हाईवे पर पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा टूटकर हाईवे पर गिर गया, जिससे हाईवे पूरी तरह बाधित हो गया. करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद हाईवे आवाजाही के लिए सुचारु किया गया.ज्योतिर्मठ कोतवाल ने जानकारी देते हुए बताएं कि हाईवे आवाजाही के लिए पूरी तरह सुचारु किया गया है. वहीं जिलाधिकारी चमोली ने भी खुद बदरीनाथ हाईवे का निरीक्षण कर रहे है, जहां पर जो भी कभी है, उसको दूर किया जा रहा है. फिर भी पहाड़ों पर कुछ चुनौतियां बनी रहती है. कही बार पहाड़ी अचानक से दरक जाती है और हाईवे बंद हो जाता है. हाईवे को तत्काल खोलने का प्रयास किया जाता है.बता दें कि हाल ही में हुई बारिश और बर्फबारी के कारण चारधाम यात्रा की तैयारियां प्रभावित हुई है. जैसे ही केदारनाथ धाम पैदल मार्ग पर फिर से अच्छी खासी बर्फ जम गई है, जिसे मजदूर फिर से हटाने में जुटे हुए है. इसके अलावा मंदिर के आसपास भी काफी बर्फ जमी हुई है. इसी तरह के हालत गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में भी देखने को मिले है. यहां भी बर्फबारी के कारण यात्रा की तैयारियों पर असर पड़ा है.गौरतलब है कि 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा की शुरुआत हो जाएगी. गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे और आखिर में 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खोले जाएंगे. इस बार चारधाम यात्रा की तैयारियां असामान्य परिस्थितियों के बीच आगे बढ़ रही हैं। एक ओर पहाड़ी क्षेत्रों में एल. पी. जी. (गैस) आपूर्ति को लेकर संकट गहराता दिख रहा है, वहीं दूसरी ओर लगातार हो रही बर्फबारी और बारिश ने व्यवस्थाओं को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। ऐसे में सरकार और प्रशासन के सामने यात्रा को सुचारु, सुरक्षित और व्यवस्थित कराने की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। केदारनाथ धाम, यमुनोत्री धाम और बदरीनाथ धाम सहित ऊंचाई वाले इलाकों में लगातार बर्फबारी का दौर जारी है। हालांकि यमुनोत्री में दो दिन बाद धूप खिलने से हालात कुछ सामान्य होते दिखे, लेकिन पैदल मार्ग, सड़कें और निर्माण कार्य अब भी प्रभावित हैं।बदरीनाथ से औली तक पूरा क्षेत्र बर्फ से ढका हुआ है, जिससे अप्रैल में भी जनवरी जैसी ठंड का अहसास हो रहा है। रूपकुंड, वेदनी बुग्याल, ब्रह्मताल जैसे ट्रैकिंग रूट्स पर भारी बर्फबारी के कारण पर्यटकों को बेस कैंप लौटना पड़ा।यमुनोत्री हाईवे पर कई स्थानों पर कीचड़ और दलदल बनने से आवाजाही जोखिम भरी हो गई है, जिससे यात्रा व्यवस्थाओं पर सीधा असर पड़ रहा है। चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन और ठहराव की व्यवस्थाएं अहम होती हैं। ऐसे में गैस आपूर्ति में आ रही दिक्कतें होटल व्यवसायियों, ढाबा संचालकों और स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं।पहाड़ी क्षेत्रों में पहले से ही परिवहन और आपूर्ति की चुनौतियां रहती हैं, लेकिन खराब मौसम के कारण सड़क मार्ग बाधित होने से गैस सिलेंडरों की सप्लाई और प्रभावित हो रही है। इससे यात्रा सीजन के दौरान भोजन व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। राज्य सरकार और जिला प्रशासन दोनों मोर्चों पर स्थिति संभालने की कोशिश कर रहे हैं। एक ओर बर्फ हटाने, सड़क सुधार और पैदल मार्ग को सुचारु करने के लिए टीमें तैनात की गई हैं, वहीं दूसरी ओर आवश्यक वस्तुओं—खासकर गैस—की आपूर्ति बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है।यात्रा मार्गों पर निर्माण कार्य, अस्थायी पुल, रसोईघर, चेंजिंग रूम और सुरक्षा व्यवस्थाओं को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसतकनीक का उपयोग किया जाएगा। संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने और कंट्रोल रूम के माध्यम से चौबीसों घंटे वास्तविक समय में निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं।लेखक वर्तमान में दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।












