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आस्था और पर्यावरण दोनों संकट में

12/04/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड में यमुनात्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को शामिल करने वाली चारधाम यात्रा, भारत की सबसे पवित्र तीर्थयात्राओं में से एक है, जो लंबे समय से लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती रही है। हालांकि, जो कभी एक गंभीर धार्मिक यात्रा हुआ करती थी, अब उसे पर्यावरण और पर्यटन प्रबंधन संकट के रूप में देखा जा रहा है। यह तीर्थयात्रा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, लेकिन इसका अनियंत्रित विस्तार वास्तविक पर्यटन को “नष्ट” कर रहा है और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।  जोशियाड़ा में झूला पुल के समीप खुलेआम कूड़ा फेंका जा रहा है जो सीधे भागीरथी में जाकर नदी को प्रदूषित कर रहा है। स्थानीय लोगों की ओर से वहां पर घरों का कूड़ा डाला गया है।गंगा तट पर स्थित होने के कारण भागीरथी नदी का यह क्षेत्र धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां प्रतिदिन सुबह मणिकर्णिका घाट सहित अन्य घाटों पर पूजा-अर्चना और स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही रहती है। ऐसे में गंदगी और कूड़े की मौजूदगी से श्रद्धालुओं की आस्था को भी ठेस पहुंच रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। जोशियाड़ा में झूला पुल के समीप खुलेआम कूड़ा फेंका जा रहा है जो सीधे भागीरथी में जाकर नदी को प्रदूषित कर रहा है। स्थानीय लोगों की ओर से वहां पर घरों का कूड़ा डाला गया है।गंगा तट पर स्थित होने के कारण भागीरथी नदी का यह क्षेत्र धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां प्रतिदिन सुबह मणिकर्णिका घाट सहित अन्य घाटों पर पूजा-अर्चना और स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही रहती है। ऐसे में गंदगी और कूड़े की मौजूदगी से श्रद्धालुओं की आस्था को भी ठेस पहुंच रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। तांबाखाणी सुरंग क्षेत्र में भी कूड़ा प्रबंधन की गंभीर समस्या बनी थी और वहां का कूड़ा सीधे भागीरथी में जाकर नदी को प्रदूषित करने का काम कर रहा था। तांबाखाणी सुरंग के बाहर से कूड़ा हटने के बाद नदी में गिर रही गंदगी रुकी लेकिन जोशियाड़ा क्षेत्र में अब वही स्थिति सामने आने से कूड़ा प्रबंधन पर सवाल खड़े हो गए हैं।नगर के व्यापारी का कहना है कि नदी किनारे कूड़ा डालने पर सख्त रोक लगाई जाए और नियमित कूड़ा संग्रहण एवं निस्तारण की व्यवस्था हो। भागीरथी नदी की स्वच्छता बनाए रखने के लिए निगरानी बढ़ाने और लापरवाही करने वालों पर भी कार्रवाई की भी मांग की है। ईओ का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं है। जल्द ही मामले का संज्ञान लेकर वहां कूड़ा डालने से रोका जाएगा।  भारत सरकार एवं उत्तराखंड सरकार द्वारा स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए देशभर में व्यापक अभियान चलाए जा रहे हैं, जिन पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, ताकि देश स्वच्छ और सुंदर बना रहें, लेकिन जनपद उत्तरकाशी में जमीनी स्तर पर हालात इसके विपरीत नजर आ रहे हैं। विश्व प्रसिद्ध धाम  गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने वाले हैं, जहां देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचेंगे, लेकिन यात्रा मार्ग के प्रमुख पड़ावों और बाजार क्षेत्रों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। इसका जीता-जागता उदाहरण डुंडा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले वीरपुर बाजार एवं गांव में देखा जा सकता है, जहां सड़कों के किनारे कचरा फैला हुआ है.साथ ही भागीरथी  (गंगा )नदी के किनारे कूड़ा फैला दिख रहा हैं.  और सफाई व्यवस्था बदहाल स्थिति में हैसबसे गंभीर पहलू यह है कि राष्ट्रीय गंगा की प्रमुख सहायक भागीरथी (गंगा ) नदी के किनारे कूड़ा देखने को मिल रहा हैं.जो पर्यावरण और आस्था दोनों के लिए चिंता का विषय है.वहीं सड़कों पर घूम रही गौमाता कूड़े के ढेर में भोजन तलाशती नजर आ रही हैं.जिससे पशुओं के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है.संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी इस ओर कोई गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं और न ही पशु मालिक अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं. साथ ही शासन-प्रशासन लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए स्वच्छता अभियान को धरातल पर प्रभावी बनाये रखने का कोई सख्त कदम उठाने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.जिससे स्वच्छता और सुंदरता बनी रहें.क्या स्लोगन के आधार पर स्वच्छ भारत अभियान देखने को मिल रहा है।  इस कारण मुख्य रूप से भागीरथी नदी की सहायक नदी अस्सी गंगा दूषित हो रही है. इससे पूरा कचरा बहकर भागीरथी में जा रहा है. इसके साथ ही क्षेत्र के गंदे पानी की निकासी ना होने के कारण वह भी सीधे नदी में बह रहा है. वहीं नगर पालिका ईओ शालिनी चित्राण का कहना है कि इसे कर्मचारियों को दिखाकर, जल्द साफ करवाया जाएगा.गंगोरी क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण की उचित व्यवस्था न होने के कारण पूरे क्षेत्र का प्लास्टिक का कूड़ा अस्सी गंगा नदी के किनारे डाला जा रहा है. जोकि प्लास्टिक मुक्त नगर की परिकल्पना पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है. एक और जिला प्रशासन और पालिका की ओर से दावा कि नगर को प्लास्टिक मुक्त किया जा चुका है. वहीं दूसरी ओर गंगोरी में अस्सी गंगा नदी के साथ भागीरथी नदी भी दूषित हो रही है. स्थिति यह है कि पूरा प्लास्टिक दोनों नदियों के संगम से कुछ दूरी पर फेंके जाने के कारण लोगों की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंच रही है.लोगों को दूषित पानी से आचमन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. वहीं दूसरी ओर सवाल यह उठ रहा है कि जब जनपद में प्लास्टिक पूरी तरह प्रतिबंधित है, तो यहां पर इतनी अधिक संख्या में प्लास्टिक का कचरा कहां से पसरा हुआ है. यह जिला प्रशासन और नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है.लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं।लेखक वर्तमान में दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।

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