• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

उत्‍तराखंड में नशे के खिलाफ महिलाएं मुखर

12/04/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
17
SHARES
21
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड के पहाड़ों में इन दिनों एक नई जंग कूड़ा पड़ी है। नशे की लत ने परिवार को तोड़ दिया है, युवाओं का भविष्य बना दिया है, किसानों को छूट दे दी गई है, घरेलू हिंसा बढ़ गई है और सरकारी राजस्व के नाम पर शराब की दुकानें गांव-गांव में खुल रही हैं। लेकिन इस अंधेरे में उम्मीद की एक किरण जल रही है – पहाड़ की औरतें। महिला मंगल के नारे और खिलाफत, गांव की चौपालों में, सड़कों पर और भूख हड़ताल तक के प्रवेश वे शराब नशे की लड़ाई का बीड़ा उठाये जाते हैं। यह सिर्फ एक आंदोलन नहीं है, बल्कि पहाड़ी संस्कृति, परिवार और आने वाली पीढ़ी के अस्तित्व की लड़ाई है। नशामुक्ति आंदोलन की तरह की महिलाएं आगे आई हैं – आज सिर्फ विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि प्रदेश को फिर से नशामुक्ति बनाने के लिए कड़े नियम बनाए रखने, कमी करने और सामाजिक बहिष्कार तक पहुंचने के लिए कहा गया है।यह आंदोलन पूरे उत्तराखंड में फैला हुआ है। गढ़वाल से कुमाऊं तक, हर जिले में महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर हुंकार भरी है। सरकारी राजस्व के मुताबिक, “शराब नहीं, पानी दो”, “नशा फ्री विलेज”, “युवा बचाओ” जैसे नारे लगा रही हैं। जहां एक तरफ राज्य सरकार नई विज्ञप्ति जारी कर रही है, वहीं महिलाओं के फिल्मांकन के साथ सामूहिक पूर्ण प्रतिबंध लगा रही हैं, एक लाख रुपये तक का जुर्माना तय कर रही हैं और उल्लंघन करने वाले सामाजिक बहिष्कार का हथियार खोल रही हैं। यह लड़ाई सिर्फ शराब के खिलाफ नहीं है, बल्कि नशे की पूरी संस्कृति – मांस, डीजे, फास्ट फूड और दिखावे वाली संज्ञा – के भी है।वॉल्वो की सर्विसेस में आंदोलन सबसे तेज़ है। शिमला जिले के देवल ब्लॉक में हिमनी, बलान, सवाद, तलौर, घेस और मनमती क्षेत्र की महिलाओं ने महिला मंगल आश्रम के माध्यम से शराब की बिक्री और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। सोसायटी का पूरा समर्थन है। हिमनी गांव की महिला मंगल दल की अध्यक्ष सीमा देवी (28 वर्ष) ने सासा ने कहा, “हम अपने इलाके को शराब मुक्त बनाना चाहते हैं। शराब की लता का परिवार पर बुरा असर पड़ रहा है।” गांव की प्रधान नीता देवी (32 वर्ष) ने कहा, “आजकल युवा सहेलियां दबाव और आसान पहुंच के कारण शराब की लत में फंस रहे हैं। पहले किसान-किसानी करते थे, अब 500 रुपये रोज कमाकर उसी दिन शराब में उड़ा देते हैं। यह चक्रव्यूह तोड़ना जरूरी है।”सज़ा का अर्थ है – शराब पिलाने पर एक लाख रुपये, सार्वजनिक आयोजनों में बेचने पर 50 हजार रुपये, नशे में शोर मचाने या जेल में बेचने पर 25 हजार रुपये। सूचना देने वाले को 10 हजार प्रतिपूर्ति प्राप्त होगी। बार-बार उल्लंघन करने वाले लोग सामाजिक बहिष्कार पर। केटी गांव (आदिबद्री तहसील) में भी महिला मंगल दल, युवा मंगल दल और प्रधान रेखा देवी के नेतृत्व पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया। रुद्रप्रयाग जिले के जखनी गांव में महिला मंगल दल और नवयुवक मंगल दल ने प्रधान सरोज देवी की जयंती पर कुछ ऐसा ही फैसला लिया। जीतपाल सिंह नेगी और योगांबर रावत जैसे रिव्यू ने कहा, “जखनी को आदर्श गांव बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।”डंगवाल गांव (रुद्रप्रयाग) की महिलाएं तो सड़क पर उतरकर शराब और मांस दोनों के खिलाफ उग्रवादी प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी- अगर गांव में यह व्यापार बंद नहीं हुआ तो और बड़ा आंदोलन होगा। देवप्रयाग में एक विधवा महिला चार दिन से भूख हड़ताल पर हैं। उनका कहना है, “जिसने यह शराब की दुकान बनाई, उसने हमारे घर को बेकरी की राह पर धकेल दिया। हमारी जमीन बेचेगी, बच्चों का भविष्य अंधकार हो जाएगा।”कुमाऊं में भी यही कहानी के बेरीनाग (उदियारी) में महिलाओं ने शराब की दुकानों के खिलाफ प्रदर्शन किया और सहायक विभाग के अधिकारियों को घेर लिया। नारा था – “शराब नहीं, पानी दो”। गांव में नल का पानी नहीं है, लोग दो किलोमीटर दूर नाले से पानी ले जाते हैं, लेकिन सरकार ने शराब की दुकान खोल दी। पंचायत प्रधान हेमा महरा और क्षेत्र सदस्य पंचायत अलका आर्या सहित छात्रावास में प्रदर्शन कर रही महिलाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा, “सरकार बच्चों के भविष्य से जुड़ रही है।” नागबेरी से 10 किलोमीटर दूर शहर के पास भी यही विरोध।महिलाओं के दबाव में डुओलाघाट, टिपोला, असोसिएट और पाटली जैसे एशिया में नई शराब दुकानों को बंद कर दिया गया। रात के घाटों में महिलाएं सड़क पर उतरती हैं, सामान की और नई दुकान बंद करने की मांग करती हैं। बागेश्वर के सोराग की महिलाओं ने 15 किमी गांव पैदल यात्रा रैली के लिए नशामुक्त गांव बनाया। उन्होंने पूरे इलाके में जागरूकता के खिलाफ आवाज उठाई और शराब के खिलाफ हुंकार भरी।जौनसार-बावर के संयुक्त जिले में 25 (खट सैली क्षेत्र) में नवंबर 2025 में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया गया। दोहा गांव में राजेंद्र सिंह तोमर की राष्ट्रपति भवन में हुई बैठक में फैसला लिया गया- नेशनल और सोशल इवेंट्स में शराब, फास्ट फूड (चौमीन, मोमोज, टिक्की, पिज़्ज़ा, पिज्जा), डीजे और सरकारी उपहारों पर पूर्ण प्रतिबंध। एक लाख रुपए की क़ीमत का उल्लंघन। उद्देश्य – सांस्कृतिक विरासत पर्यावरण, दिखावे को लाभ और सामाजिक दबाव कम करना। गाँव के बुजुर्गों ने कहा, “पारंपरिक गढ़वाली व्यंजन और लोक संगीत को बढ़ावा देंगे, मध्यम रिवाजों को नहीं।”यह आंदोलन बिना कारण के नहीं है। भागों में शराब और नशे ने परिवार को चूर-चूर कर दिया है। पुरुष रोज़ की दुकान शराब में उड़ते हैं, खेती छूट जाती है, बच्चों को स्कूल नहीं मिलता, घरेलू हिंसा का सामान मिलता है। युवा सहेलियाँ के प्रेशर में फँसी हुई हैं। सरकारी राजस्व के लिए लाइब्रेरी खोली जा रही है, जबकि इसमें पानी, बिजली, सड़क जैसी वस्तुएं नहीं हैं। महिलाएं कहती हैं- “हम चुप नहीं शैतान। हमारी मातृशक्ति अब हथियार सहने वाली नहीं।”यह आंदोलन उत्तराखंड की महिलाओं की जिजीविषा का विवरण है। चिपको आंदोलन में गले लगाने वाली महिलाओं के खिलाफ आज शराब की बोतलें खड़ी हैं। वे न केवल अपने परिवार (लोग) के लिए लड़ रहे हैं, बल्कि पहाड़ी की सांस्कृतिक और सामाजिक जगह से बचने के लिए हैं। देवभूमि की पवित्रता, परिवार की एकता और आने वाली पीढ़ी के भविष्य की रक्षा के लिए। सरकारी डिस्ट्रीब्यूशन के बावजूद, असेंबल के साथ मिलकर वे स्व-शासनि का मॉडल बना रही हैं। यह दिखाया गया है कि पहाड़ी महिलाएं अभी भी जीवित हैं – डेवेलियर, एकजुट और जिम्मेदार। वे पलायन रोक रही हैं, युवाओं को बच रही हैं और पहाड़ों को नशे की लत से मुक्त कर रही हैं। यह आशा की किरण है कि जब पुरुष और व्यवस्था चुप हो जाते हैं, तब मातृशक्ति आगे ज्ञान को संभालती है।इस लड़ाई से पुरुषों और नई पीढ़ी को कई सबक मिलने चाहिए। पहला आत्मसंयम। शराब को ‘मर्दानागी’ का प्रतीक मानना ​​छोड़ें। परिवार की जिम्मेदारी पहले। दूसरा महिलाओं का साथ दें, उनका नेतृत्व स्वीकार करें। पितृसत्ता टूटें, उनकी आवाज को मजबूत बनाया गया। तीसरा समुदाय की जिम्मेदारी। व्यक्तिगत सुख से ऊपर गांव की कीमत। चौथा – सांस्कृतिक परंपरा से संबंधित। पारंपरिक बाजारों की जगह दिखावे और फास्ट फूड को अपनाएं। पांचवां – बच्चों को सिखाया जाता है कि सच्ची ताकत नशे में नहीं, मेहनत और अनुशासन में है।महिलाओं ने सिद्ध कर दिया कि जब इच्छाशक्ति हो तो परिवर्तन संभव है। अब पुरुषों को उनके साथ खड़ा होना चाहिए, न कि विरोध करना चाहिए। आने वाली पीढियां इस आंदोलन को इतिहास की कहानी में पढ़ें – कैसे पहाड़ की महिलाओं ने न सिर्फ शराब का बहिष्कार किया, बल्कि पूरे समाज को नशामुक्ति और नशामुक्ति बनाने का रास्ता दिखाया।उत्तराखंड के पहाड़ आज भी महिलाओं के स्मारक पर टिके हैं। यह युद्ध जारी रहेगा। जब तक हर गांव नशामुक्त नहीं हो जाता, तब तक मातृशक्ति का रौद्र रूप दिखता रहेगा। यह सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि एक नई क्रांति है – परिवार बचाओ, गांव बचाओ, पहाड़ बचाओ। साथ ही इस नशे के चलते युवा पीढ़ी का भविष्य भी चौपट हो रहा है। महिलाओं ने क्षेत्र में अवैध रुप से फल फूल रहे शराब को बंद किए जाने की मांग की है। तक मातृशक्ति का रौद्र रूप दिखता रहेगा। यह सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि एक नई क्रांति है – परिवार बचाओ, गांव बचाओ, पहाड़ बचाओ। साथ ही इस नशे के चलते युवा पीढ़ी का भविष्य भी चौपट हो रहा है। महिलाओं ने क्षेत्र में अवैध रुप से फल फूल रहे शराब को बंद किए जाने की मांग की है।

Share7SendTweet4
Previous Post

चारधाम में यात्रियों की संख्या सीमित न करने के राज्य सरकार के निर्णय का स्वागत

Next Post

चारधाम यात्रा की तैयारियों में मौसम लगा रहा अड़ंगा

Related Posts

उत्तराखंड

अल्मोड़ा के युवक ने बनाई हवा में उड़ने वाली कार !

August 8, 2026
1
उत्तराखंड

जो चमके थे रविंद्रनाथ टैगोर भारतीय साहित्याकाश में ध्रुवतारे की तरह

August 8, 2026
1
उत्तराखंड

दून पुस्तकालय में सुनील नेहरू ने साझा किए ऑडेन्स कोल आरोहण के रोमांचक अनुभव

August 8, 2026
1
उत्तराखंड

डोईवाला: सड़कों पर घूम रहे निराश्रित गोवंश पकड़कर गौशाला भेजे

August 8, 2026
2
उत्तराखंड

ग्वालदम-सिमली राष्ट्रीय राजमार्ग शुक्रवार को करीब 38 घंटों के बाद यातायात के लिए खुला

August 8, 2026
2
उत्तराखंड

श्री नंदादेवी जात यात्रा को लेकर आयोजित 6 घंटे तक चली बैठक बिना निष्कर्ष के ही सम्पन्न हो गई

August 8, 2026
3

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67718 shares
    Share 27087 Tweet 16930
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45786 shares
    Share 18314 Tweet 11447
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38074 shares
    Share 15230 Tweet 9519
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37453 shares
    Share 14981 Tweet 9363
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37370 shares
    Share 14948 Tweet 9343

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

अल्मोड़ा के युवक ने बनाई हवा में उड़ने वाली कार !

August 8, 2026

जो चमके थे रविंद्रनाथ टैगोर भारतीय साहित्याकाश में ध्रुवतारे की तरह

August 8, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.