रिपोर्ट-सत्यपाल नेगी/रुद्रप्रयाग
उत्तराखण्ड में विधानसभा चुनाव समाप्त हो गये हैं, और 10 मार्च का सभी को इंतजार है कि जनता ने अपना वोट कीस पक्ष को दिया है।
रुद्रप्रयाग जिले में कॉग्रेस पार्टी में बगावत भी हुई, जिसके चलते पूर्व मंत्री मातबर कंडारी निर्दलीय चुनाव लड़े, उनके समर्थन में कई कांग्रेसी भी खुलकर प्रचार करते दिखे। ऐसे मे स्वाभाविक है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण कॉग्रेस ने अपने पहले 6 और बाद में 10 पदाधिकारियों की पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छः साल के लिए निष्कासित कर दिया।
जिला कार्यकारणी के द्वारा 10 पदाधिकारियों के निष्कासन पर सवाल खड़े होने लगे हैं, निष्कासित जिला महामंत्री व समाज सेवी कालीचरण रावत का आरोप है कि टिकट वितरण के बाद हमें विश्वास में नहीं लिया गया।
जबकि 2017 के चुनाव में जिन लोगों ने पार्टी प्रत्याशी के विरोध में निर्दलीय चुनाव लड़ा था, उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित किया गया था, उनके निष्कासन को बिना सार्वजनिक रद्द किये उनको ही पार्टी ने टिकट दे दिया। जो कि कॉग्रेस संविधान के नियमों का घोर उल्लंघन है।
निष्कासति सदस्यों में जिला महामंत्री चैन सिह पँवार, नीरज डंगवाल, जिला उपाध्यक्ष रणबीर गुसाँई, किसान कांग्रेस के विक्रम नेगी, संगठन मंत्री सुनील नौटियाल का आरोप है कि आज वो लोग निष्कासन का लेटर भेज रहे हैं, जो 2017 के विधानसभा में पार्टी की प्रत्याशी के साथ खड़े नहीं थे।
निष्कासित सदस्यों का कहना कि प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल से मिलकर स्पस्टीकरण मांगेंगे, जरूरत पड़ी तो केंद्रीय समिति तक अपनी बात रखेंगे। ऐसे में कॉग्रेस कैसे मजबूत होगी, जब पार्टी विरोधी रहे लोगों को ही टिकट देकर प्रत्याशी बनाया जाता रहेगा, आने वाले समय में कॉग्रेस व्यक्तिवादी रह जायेगी।
जिला कॉग्रेस कमेटी द्वारा जारी निष्कासन में, कालीचरण रावत, चैन सिेह पँवार, नरेंद्र चौहान, नीरज डंगवाल, विशाल रावत, रणबीर गुसाँई, भारत भूषण कठैत, मकर बैरवाण, विक्रम नेगी, सुनील नौटियाल शामिल हैं।











