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औषधीय गुणों की खान है पहाड़ी लिंगड़

22/10/20
in उत्तराखंड, हेल्थ
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https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
हिमालय की पर्वत श्रृंखला व देश भर में लिगंड़ा की सैकड़ों प्रजातियों का पता लगाया जा चुका है। उत्तराखण्ड में ठंडी जलवायु वाले क्षेत्रों में समुद्र तट से लगभग 1800 मीटर से 3000 मीटर तक की ऊचांई पर नमी वाली जगह पर मार्च से जुलाई के मध्य पाया जाता है। यह उत्तराखंड के अलावा हिमांचल प्रदेश में भी लुंगडू के नाम से जाना जाता है। दुनियाभर में लिगड़ा की लगभग 400 प्रजातियां पाई जाती हैं। लिंगड़ा का वैज्ञानिक नाम डिप्लाजियम एसकुलेंटम है और एथााइरिएसी फैमिली से संबधित है। विभिन्न जगह इसे अलग.अगल नामों से जाना जाता है।
उत्तराखंड में इसे लिंगड़ा तो सिक्किम में इसे निगरू, हिमाचल प्रदेश में लिंगरी नाम से जाना जाता है। यह सामान्यतः नमी वाली जगह पर मार्च से जुलाई के मध्य पाया जाता है। यह समुद्रतल से 1900 मीटर से 2900 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है। लिंगेडे का उपयोग सामान्यतः सब्जी बनाने में ही किया जाता है लेकिन अन्य देशों में इसकी सब्जी बनाने के साथ.साथ अचार और सलाद के रूप में भी इसका उपयोग किया जाता है। लिंगड़े में उपस्थित मुख्य औषधीय तत्वों और प्रचुर मात्रा में मिनरल पाये जाने के कारण यह औषधीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। लिंगड़े में कैल्शियम, पोटेशियम और आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसमें प्रोटीन 54 ग्राम, लिपिड 0.34 ग्राम, कार्बोहाइड्रेड 5.45, फाइबर 4.45 ग्राम पाया जाता है। इसके अलावा विटामीन सी.23.59 एमजी, विटामीन बी 4.65, फेनोलिक 2.39 एमजी पाया जाता है। इसमें मिलरल एफई 38.20 एमजी, जेडआईएन 4.30 एमजी, सीयू 1.70 एमजी, एमएन 21.11, एनए 29.0, के 74.46, सीए 52.66, एमजी 15.30 एमजी पाया जाता है।
गर्मियों के मौसम में पहाड़ों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली इस सब्जी को यहां के लोग दशकों से खाते आ रहे हैं। लिगंड़ा जहां रसायनों से दूर प्रकृति के आगोश में पैदा होता है। वहीं सब्जी के रूप में यह बेहद स्वादिष्ट भी होता है। काफी कम लोग जानते हैं कि यह सब्जी कई औषधीय गुणों से भी भरपूर है इसमें पौटेशियम और कैल्शियम की प्रचुर मात्रा होने के कारण इसकी भरपाई के लिए इसका उपयोग किया जाता है। लिगड़ा में विटामिन ए, विटामिन बी कॉप्लेक्स, कैरोटिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में मौजूद हैं। नवीन शोधों के अनुसार लिगंड़ा चर्म व मधुमेह रोग से काफी बचाव करता है। इससे त्वचा अच्छी रहती है। लिगंडा हार्ट के मरीजों के लिए भी अच्छा माना जाता है। सबसे बड़ी बात है कि लिगंडा पूरी तरह से प्राकृतिक है व लिगंडा में मधुमेह जैसी बीमारियों से लडने व जीतने की शक्ति है। सब्जी के अंदर भरपूर मात्रा में विटामिन ए होता है जो आंखों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। सारे पोषक तत्व होने की वजह से यह सब्जी लिवर को स्वस्थ बनाने का कार्य करती है। और अगर किसी व्यक्ति का फैटी लीवर हो रहा है तो उसके लिए भी यह फायदेमंद होती है। डायबिटीज की बीमारी में यह सब्जी बहुत फायदेमंद होती है। रक्त में मौजूद शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करती है। जिसकी वजह से आपकी डायबिटीज समय से नियंत्रित रहती है। जोड़ों के दर्द से छुटकारा दिलाने के लिए यह बहुत अच्छी सब्जी मानी जाती है। इस को पीसकर उसका लेप बनाकर जोड़ों के दर्द पर भी लगा सकते हैं और इसकी सब्जी का भी सेवन कर सकते हैं। शरीर में रूधिर संचरण को सुचारू रूप से नियंत्रित रखने में सहायक है। ये हार्ट के मरीजों के लिए लाभकारी सिद्ध होती है। लिंगुड़ की सब्जी खाने से कैंसर से लड़ने की शक्ति मिलती है। क्योंकि छोटी फर्न में एन्टीआक्सीडेन्ट मौजूद
होते हैं। इसलिए कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को छोटी फर्न की सब्जी और इसे उबालकर जरूर खायें। लगने पर फर्न की जड़ गांठ को पीसकर लेप चोट वाली जख्म के चारों ओर लगाने से दर्द से छुटकारा मिलता है। और शीघ्र ठीक भी होता है। फर्न जड़ गांठ बेस्ट एक तरह का प्राकृतिक पेन किलर है। फर्न की जड़ को बारीक पीसकर लेप बनाकर जोंड़ों पर लगायें। इससे गठिया की बीमारी दूर हो जाती हैं। और साथ ही इसकी सब्जी खाने से मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत हो जाती हैं।अधिकांशतः सिर्फ सब्जी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है जबकि इसका अचार भी बनाया जाता है। हमारे क्षेत्रों में भले ही इसे सामान्य रूप सब्जी के रूप में देखा जाता होए लेकिन अमेरिका जैसे देशों में इसका उपयोग अचार के रूप में लोग खूब करते हैं अन्य देशों के साथ भारत के कतिपय राज्यों में अब टिशू कल्चर के माध्यम से भी इसका उत्पादन होने लगा हैए जससे सालभर में कभी भी उगाया जा सकता है। लिंगड़ में अनगिनत पौष्टिक तत्व मौजूद होते हैं जो हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होते हैंण् यह मधुमेह जैसी खतरनाक बीमारी के लिए लाभदायक होता है इसमेंमेग्निश्यम, कैल्शियम, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाशियम आयरन और जिंक होता है। जिससे यह कुपोषण से निपटने के लिए भी इसे अच्छा प्राकृतिक स्त्रोत माना गया है। यह शरीर में इम्यून सिस्टम को ठीक करता हैण्यह सब्जी लिवर को स्वस्थ बनाने का कार्य करती है। फैटी लिवर के लिए भी इसकी सब्जी लाभदायक है। इसकी सब्जी रक्त में मौजूद शर्करा की मात्रा को नियंत्रण करती है। इसकी सब्जी जोड़ों के दर्द में लाभदायक होती है। यह शरीर में रुधिर संचरण को सुचारू रूप से नियंत्रण रखने में सहायक है। उत्तराखंड की एक नहीं अनेक जड़ी बूटियां लोगों को स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
यहां सब्जियों और फलों की एक लंबी श्रृंखला है जो लोगों को सवाद के साथ साथ स्वास्थ्य भी देती है। ऐसी ही सब्जियों में शामिल है पौष्टिकता से भरपूर सब्जी लिंगड़ा। लिंगड़ा गाड़.गधेरों के आस.पास उगता है। विदेशों में भी इसकी काफी मांग है। इसे सब्जी के साथ.साथ अचार और सलाद के रूप में भी खाया जाता है। यह लिंगड़ा गाड़ .गधेरों के किनारे उगने वाली फर्न है। विश्व के कई देशों में लिंगड़ा की खेती वैज्ञानिक एवं व्यवसायिक रूप से भी की जाती है। लिंगड़ा उत्तराखंड में ही नहीं बल्कि चीन, जापान आदि कई देशों में पाया जाता है। उत्तराखंड में इसे उगाया नहीं जाता बल्कि यह प्रकृति की देन है, जिससे स्थानीय लोगों को भी सही मूल्य पर स्थानीय स्तर पर उत्पादित सब्जी मिल रही है। वे कहते हैं लॉकडाउन का भी काफी प्रभाव रहा, फिर भी काम चल रहा है। हालांकि इस बार.बार मौसम की मार से किसान परेशान हैं, उनका काफी नुकसान भी हो चुका है। वैज्ञानिकों के इन शोध द्वारा उत्तराखंड में इसे पूरा वर्ष उत्पादिक किया जा सकता हैं एवं उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी वैज्ञानिक तरीके से खेती करके इसे राज्य की आर्थिकी के लिए बेहतर विकल्प बनाया जा सकता है। लेकिन पलायन के कारण नई जनरेशन इस सब्जी को भूलती जा रही है। शायद वो ये नहीं जानते की हम प्रकृति के दिए हुए इस अनमोल उपहार जो की कई रोगो में लाभदायक है उसे खुद से दूर करते जा रहे है। साथ ही हमें अपने उत्तराखंड की इस तरह की औषधीय गुणों को ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुंचाने की कोशिश करनी चाहिए। उत्तराखंड में सरकारी व स्थानीय सहयोग की बड़ी आवश्यकता है। उत्तराखंड राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

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