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ज्योतिर्मठ में भीषण लैंडस्लाइड, फसलें बर्बाद

01/08/26
in उत्तराखंड, चमोली
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड के सीमांत चमोली जनपद में लगातार हो रही बारिश के चलते पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ने लगी हैं. ज्योतिर्मठ विकासखंड के किमाना गांव में गुरुवार को एक बार फिर पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर आने से कई आवासीय भवन खतरे की जद में आ गए. भूस्खलन के बाद ग्रामीणों में दहशत फैल गई. कई परिवारों को अपने घर छोड़कर विद्यालय तथा अन्य सुरक्षित स्थानों में शरण लेनी पड़ी. ग्रामीणों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही वर्षा के कारण पहाड़ी की मिट्टी पूरी तरह गीली हो चुकी है. इसके चलते पहाड़ी का हिस्सा बार-बार दरक रहा है और मलबे के साथ बड़े-बड़े पत्थर गांव की ओर आ रहे हैं. कई मकानों में मलबा घुसने से लोगों को भारी नुकसान पहुंचा है. हालांकि फिलहाल किसी जनहानि की सूचना नहीं है.  भूस्खलन की चपेट में आकर गांव के मंदिर की भोग मंडी तथा उसकी सुरक्षा दीवार भी क्षतिग्रस्त हो गई है. ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी से अभी भी रुक-रुक कर मलबा और बोल्डर गिर रहे हैं, जिससे पूरे गांव में भय का माहौल बना हुआ है. लोगों ने पूरी रात दहशत के बीच बिताई और प्रशासन से प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित आवास, राहत सामग्री तथा स्थायी सुरक्षा उपाय किए जाने की मांग की है. प्रशासन को घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. प्रभावित क्षेत्र का आकलन किया जा रहा है और हालात सामान्य होने तक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है. उधर, लगातार बारिश का असर जिले के सड़क नेटवर्क पर भी दिखाई दे रहा है. नंदप्रयाग–नंदानगर मोटर मार्ग मंगरोली के समीप पहाड़ी से भारी बोल्डर गिरने के कारण अवरुद्ध हो गया. इससे दोनों ओर वाहनों की आवाजाही ठप हो गई. वहीं पोखरी–गोपेश्वर मोटर मार्ग विशाल तिराहे से पहले हुए भारी भूस्खलन के कारण बंद हो गया है. सड़कें बंद होने से स्थानीय लोगों और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम साफ होने तक संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है. सड़कों को खोलने के लिए संबंधित विभागों की मशीनें मौके पर भेजी गई हैं, जबकि किमाना गांव में हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार, गांव में अभी भी भूस्खलन का सिलसिला जारी है। लगातार गिर रहे मलबे और चट्टानों के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल है। लोग प्रशासन से जल्द राहत और सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों और ढलानों के पास जाने से बचें तथा केवल सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।प्रशासन ने लोगों से मौसम सामान्य होने तक अनावश्यक यात्रा से बचने और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। बंद मार्गों को खोलने के लिए संबंधित विभागों की मशीनें मौके पर तैनात कर दी गई हैं, जबकि किमाना गांव में राहत एवं निगरानी कार्य लगातार जारी है।चमोली में हो रही लगातार बारिश के चलते जनजीवन प्रभावित हो चुका है. बदरीनाथ हाईवे पर अलग-अलग स्थान पर भूस्खलन जैसी समस्याएं निरंतर बनी हुई हैं. ऐसे में आवाजाही करना किसी मुसीबत से काम नहीं है. प्राकृतिक रूप से भूस्खलन के प्रति संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण अनधिकृत इमारतों के बढ़ते निर्माण से प्रभावित हुए हैं। ज्योतिर्मठ में भूस्खलन के लगभग तीन साल बाद भी सरकार के साथ हुए 11 सूत्री समझौते पर उचित कार्रवाई न होने पर जेएसएस ने निराशा व्यक्त की।अधिकारियों को सौंपे गए ज्ञापन में समिति ने आरोप लगाया कि केंद्र द्वारा स्थिरीकरण कार्य के लिए 1,640 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जाने के बाद शुरू किए गए कार्यों में गंभीर अनियमितताएं हैं। शहर में प्रभावित 55 इमारतों को गिराए जाने का विरोध करते हुए समिति ने आरोप लगाया कि वैज्ञानिक इंजीनियरिंग दृष्टिकोण अपनाने के बजाय, अधिकारी आपदा प्रभावित परिवारों को बर्बाद करने की कोशिश कर रहे हैं।समिति के समन्वयक ने कहा कि आपदा प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराए जाने तक उनके घरों को नहीं गिराया जाना चाहिए। उन्होंने प्रभावित परिवारों की जमीन और पुश्तैनी घरों के मुआवजे सहित कई मांगें भी रखीं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे विरोध प्रदर्शन को और तेज करेंगे।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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