
फोेटो-
1-आजादी के 73वर्ष बाद भी सडक की वाट जोह रहा किमाणा गाॅव।
02- बेटी के सदमे से बीमार माॅ को ग्रामीण डंडी के सहारे अस्पताल लाते हुए।
प्रकाश कपरूवाण
जोशीमठ। दूरस्थ ग्राम किमाणा में एक बच्ची की मौत ने 33 वर्ष पुरोने जख्मों की यादें ताजा कर दी। तब खूनी पेचिस से इस गाॅव के तीस मासूम काल की ग्रास में समा गए थे। और कई माताओं की गोद सूनी हो गई थी। यह गाॅव तब भी सडक विहीन था और आज भी। इस गाॅव में तब भी एक अदद आयुवैदिक चिकित्सालय था और आज भी वही स्थिति है। इस 11वर्षीय बच्ची की मौत से पूरा गाॅव सदमे के साथ दहशत में है।
सीमावर्ती विकास खंड जोशीमठ के सडक विहीन दूरस्थ गाॅव किमाणा मे बीते रोज एक 11वर्षीय सिमरन कॅुवर की उल्टी और पेचिस के कारण दर्दनाम मौत हो गई थी। और बच्ची की माॅ इस सदमे के कारण खुद भी बीमार हो गई जिसे ग्रामीण डंडी के सहारे किसी तरह सडक मार्ग तक लाए और उनका उपचार सीएचसी जोशीमठ मे चल रहा है।
जोशीमठ प्रंखड के सडक व स्वास्थ्य विहीन इसी किमाणा गाॅव मे वर्ष 1987-88 मे खूनी पेचिस से तीस मासूम बच्चो की अकाल मृत्यु हो गई थी। और कई माताओं की गोद हमेशा के लिए सूनी हो गई थी। तब भी ग्रामीण सडक और स्वास्थ्य के लिए सरकारो व अधिकारियों के आगे गिडगिडाते थे और आज 33वर्षो के बाद भी इस गाॅव की दशा नही बदली। एक आयुवेैदिक चिकित्सालय आज भी है लेकिन 33वर्षो के बाद सडक से नही जुड सका यह गाॅव।
33वर्ष पूर्व इस गाॅव मे जब तीस बच्चो की अकाल मृत्यु हुई थी। तब जिले के कलैक्टर लव वर्मा भी इस दूरस्थ गाॅव मे मेडिकल टीम के साथ पंहुचे थे। और ग्रामीणों को सांत्वना देते हुए एलोपैथिक अस्पताल व सडक के लिए शासन स्तर पर वार्ता करने का भरोसा दे गए थे। जिस गाॅव मे पटवारी ही कभी-कभी पंहुचते हो उस गाॅव मे जिलाधिकारी के पंहुचने के बाद ग्रामीणों को भी भरोसा था कि अब आर्युवैैद के साथ एलोपैथिक चिकित्सालय खुलेगा और सडक भी बनेगी। लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ और आज भी इस गाॅव के ग्रामीण बीमार को डंडी के सहारे अस्पताल तक पंहुचाने को विवश है।
इन पंक्तियों का लेखक भी जिलाधिकारी लव वर्मा के भ्रमण के दौरान बतौर पत्रकार किमाणा गाॅव मे मौजूद था। तब गाॅव के चैपाल मे एक सभा भी हुई थी और गाॅव के ही एक समााजिक कार्यकर्ता थेप्पड सिंह ने अपने भाषण मे जिलाधिकारी लव वर्मा की ओर इशारा करते हुए कहा था कि सतयुग की तो जानकारी नही किंतु कलयुग मे आप पहले बडे अधिकारी है जो इस गाॅव तक पंहुचे है। और अब उन्है उम्मीद है कि इस गाॅव को इस प्रकार की त्रासदी दुबारा देखने को नही मिलेगी। लेकिन इस दूरस्थ गाॅव की स्थिति आज भी जस की तस है।
उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद तो ग्रामीणों को लगा कि अब तो वे तहसील व ब्लाक मुख्यालय जोशीमठ से सीधे सडक मार्ग से अपने गाॅव पंहुचेगे। लेकिन राज्य बने बीस वर्षो के बाद भी इस गाॅव तक सडक नही पंहुच सकी। सीमांत विकास खंड जोशीमठ का सडक विहीन किमाणा गाॅव अकेला गाॅव नही है कई अन्य गाॅव भी है जो आजादी के बाद से सडक की वाट जोह रहे है।
बहरहाल 11वर्षीय सिमरन की दर्दनाक मौत के बाद ग्रामीणों मे 33वर्ष पूर्व की दहशत को देखते हुए मेडिकल टीम ने डेरा डाला हुआ है और अब तक करीब डेढ सौ ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाईया दे चुका है। चमोली के मुख्य चिकित्साधिकारी जीएस राणा के अनुसार लोगो को बुखार की ज्यादा शिकायत है और तीन लोगो को ड्रिप चढाया गया है। कहा कि मेडिकल टीम को स्थिति सामान्य होने तक गाॅव मे ही रहने को कहा गया है।
किमाणा गाॅव के प्रधान मुकेश सेमवाल कहते है कि यदि सडक संपर्क होता तो संभवत 11वर्षीय बेटी को बचाया जा सकता था। उनका कहना था कि फिलहाल मेडिकल टीम द्वारा सभी ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाईयाॅ वितरित की जा रही है।











