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पहले लखनऊ से लूटते थे, अब देहरादून से लूट रहे हैंः डा.शेखर पाठक

07/12/20
in उत्तराखंड, देहरादून
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उत्तराखंड की परिसंपत्तियों पर उत्तर प्रदेश का कब्जा क्यों ?
शंकर सिंह भाटिया
देहरादून। इतिहासकार, लेखक, घुमक्कड़ पद्मश्री डा.शेखर पाठक ने कहा कि उत्तराखंड में जो हो रहा है नागरिक की हैसियत से हम सभी को बोलना चाहिए। जब राज्य बन रहा था, यह शंका जाहिर की गई थी कि कैसा होगा राज्य। शासक हमेशा राज्य को जनहित के बजाय स्वहित में लागू करते हैं। टिहरी रियासत की याद है, किस तरह हमारी संपत्ति पर राजसत्ता बैठी रही। उत्तराखंड से सबल आवाज न आने के कारण उत्तर प्रदेश अपनी दबंगता दिखा रहा है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
श्री पाठक उत्तराखंड समाचार की लाइव डिबेट पर ‘उत्तराखंड की परिसंपत्तियों पर यूपी का कब्जा क्यों?’ विषय पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि टिहरी परियोजना का मामला गंभीर है, उस समय की केंद्र सरकार पर बिचैलियों का प्रभाव था। जैसे आज चार धाम मार्ग को लेकर चल रहा है, उस समय टिहरी डैम को लेकर इसी तरह की राजनीति होती रही। टिहरी डैम में बहुत बड़ा अन्याय उत्तराखंड के साथ हुआ। भूटान जो सरपलस बिजली पैदा करता है वह भारत को बेचता है। उत्तराखंड के लिए यही कहा जाता था। टीएचडीसी के साथ कुछ और प्रोजेक्ट चल रहे हैं, उन सब पर उत्तर प्रदेश का ही अधिकार है। जब हम राज्य बन गए हैं, इतने बड़े विरोध को कुचलने के बाद आपने हमारी छाती पर टिहरी डैम बनाया। भिलंगना-भागीरथी की उपजाऊ घाटी को डुबो दिया। हमारी सरकार इस बात पर खुश है कि उसे झील में वोट चलाने का मौका मिला है। जो हमारा प्रशासनिक और राजनीतिक प्रतिरोध होना चाहिए था, वह कहीं है ही नहीं। टिहरी डैम इस तरह की विडंबना है कि इतने बड़े विस्थापन के बाद बनाया गया। दूसरी तरफ प्रति वर्ष एक हजार करोड़ रुपये का राजस्व यूपी हड़प रहा है। टिहरी डैम के चारों तरफ जो जमीनें हैं, वह वहां ठेकेदार बनकर आई कंपनियां हड़प चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि एक ही पार्टी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड तथा देश में राज कर रही है। उनका समर्पण देश के लिए नहीं बल्कि अपनी पार्टी के प्रति है। जहां तक कुंभ मेले की बात है सभी को यहां आने का अधिकार है, जहां तक स्वामित्व की बात है, वह उत्तराखंड का होना चाहिए। हरिद्वार जबरदस्ती उत्तराखंड के साथ जोड़ा गया। उत्तराखंड का सपना गड़बड़ा गया है। जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व से भी राज्य की हालत बिगड़ जाएगी। अगर एक ही पार्टी की सरकार उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, केंद्र में हो इसका इतना बड़ा नुकसान हो सकता है? मुख्यमंत्री बनने के बाद आप पार्टी के नहीं राज्य की जनता के हो जाते हैं। इसलिए आपका दायित्व है कि आप राज्य के अधिकारों के लिए लड़ें। पहाड़ों में सिर्फ पांच प्रतिशत जमीन बची है, 55 साल से बंदोबस्त नहीं हुआ है, इसलिए स्थिति बहुत स्पष्ट नहीं है। बहुत सारे लोग कोविड के समय दूसरे शहरों से उत्तराखंड आए थे, यदि हमारी सरकारें संवेदनशील होती तो हमारे जो संसाधन दूसरे राज्य के कब्जे में हैं, उनका उपयोग इन लोगों को रोजगार देने के लिए संसाधन के रूप में किया जा सकता था। लेकिन ऐसा करने की पहल तक नहीं की गई। अपने अधिकारों को वापस पाने का आग्रह तक नहीं किया गया है। हमारा समाज अपेक्षा कर रहा था कि नया राज्य बनेगा तो हमारे संसाधन हमारे काम आएंगे। बीस साल बाद देखिए हालात खराब हो गए हैं। जिला मुख्यालयों के जीआईसी कभी बहुत अच्छे शिक्षा केंद्र माने जाते थे, अब उनकी दुर्दशा देखिये। लीडरशिप पहले लखनऊ से लूटती थी, अब वह देहरादून से लूट रहे हैं। संपदाओं के संदर्भ में स्पष्ट है कि हम झेल रहे हैं। उनका न मिलना एक बात है, यहां तक नहीं कहा जा रहा है कि यह हमारा है।
श्री पाठक ने कहा कि हमारे नेताओं की राजनीतिक सोच का परिणाम इसी बात से मिल जाता है कि केंद्र सरकार से एक केंद्रीय विश्वविद्यालय आया। इसे श्रीनगर में पहले से मौजूद गढ़वाल विश्वविद्यालय में बना दिया गया। जबकि गढ़वाल विश्वविद्यालय एक स्थापित संस्थान था, वह अपनी उंचाइयों को छू चुका था। होना यह चाहिए था कि गैरसैंण या फिर पौड़ी जिले में ही किसी स्थान पर केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित किया जाता। यह एक नया शहर बसाने जैसा होता। यहां हजार से अधिक शिक्षक कर्मचारी होते, जो राज्य को मौका मिला था, उसका लाभ लेने में राज्य विफल रहा। इसी तरह अल्मोड़ा परिसर को विश्वविद्यालय बनाने में हुआ। यदि जीना जी के नाम पर विश्वविद्यालय बनाना चाहते थे, तो कोई नए स्थान पर बनाते।
चर्चा में भाग लेते हुए सर्वोदयी नेता जमनालाल बजाज पुरस्कार विजेता धूम सिंह नेगी ने कहा कि हमने राजनीतिक सत्ता के लिए कभी काम नहीं किया, हम लोक सत्ता के समर्थक रहे हैं, उसके लिए ही काम करते हैं। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में हम सक्रिय नहीं रहे, इसकी वजह यह रही कि हमारे आंदोलन के उस दौर से कुछ मतभेद थे। उस पर बहस होनी चाहिए थी, वह नहीं हो पाई।
श्री नेगी उत्तराखंड समाचार के लाइव चर्चा में हिस्सा ले रहे थे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का उत्तराखंड की परिसंपत्तियों पर कब्जे के हम खिलाफ हैं। योगी जमीन से जुड़े व्यक्ति हैं। उन्हें अपनी माटी का ऋण चुकाना हो तो उनके लिए मौका था, लेकिन जैसे कि जो बात उन्होंने कही वह हम सब की अपेक्षाओं पर कुठाराघात है। यह असंवैधानिक भी है और अनैतिक भी है। जहां तक परिसंपत्तियों का सवाल है, टिहरी बांध का जो राजस्व है, वह उत्तर प्रदेश सरकार ले रही है। उस समय भी टिहरी बांध के इन्हीं सवालों को लेकर चर्चा हुई थी। उत्तराखंड राज्य को लेकर यदि उतावलापन नहीं होता तो स्थिति बेहतर होती।
सर्वोदयी नेता ने कहा कि इस समय मौका है कि मोदी जी उत्तराखंड जैसे राज्य की इतनी बड़ी समस्या का समाधान करते। हमारी जमीनें भूमाफियाओं के कब्जे में जा रही है। इससे बचाने के लिए जनता को आगे आना होगा। आंदोलन करना होगा, लड़ाई लड़नी पड़ेगी। तभी सरकारें इसे समझेगी।

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