गैरसैंण। माईथान में एक श्रृद्धांजलि सभा का आयोजन करते हुए उत्तराखंड राज्य निर्माण के शहीद आंदोलनकारियों को श्रृदांजलि अर्पित की गई।
पहली बार इस प्रकार के कार्यक्रम में लोगों ने भाग लेकर शहीद आंदोलनकारियों को नम आंखों से पुष्पांजली अर्पित करते हुए श्रृद्धांजली दी। इस दौरान वक्ताओं ने मुजफरनगर और रामपुर तिराहा, मसूरी कांड के दोषियों को अभी तक दंड नहीं दिये जाने पर रोष प्रकट किया गया और शासन से मांग की गई कि दोषियों को सजा दिला कर आंदोलनकारियों के परिजनों को न्याय दिलाया जाय।
कहा कि जिस मनोयोग और त्याग व क्रांति के साथ राज्यवासियों ने आंदोलन में भाग ले कर राज्य निर्माण किया और जो सपने अमर शहीदों ने संजोये थे उसे साकार करने में राज्य सरकार को कार्य करना होगा। आज राज्य में बेरोजगारी रोग भय, जंगली जानवारों का आतंक, युवाओं में नशाखोरी की बढ़ती लत स्वास्थ्य, शिक्षा की बिगड़ती दशा आदि का साम्राज्य है। हमारी केंद्र व
राज्य की सरकारों को इस ओर ध्यान देना होगा।
इस मौके पर खनसर विकास संघष समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह ने कहा कि हमारा दुर्भाग्य है कि जिसने राज्य की स्थाई राजधानी गैरसैंण की मांग उठायी हो उन पर आज राज्य सरकार ने संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज कर आंदोलनकारियों की आवाज को दबाने का कार्य किया है। राज्य की स्थायी राजधानी गैरसैंण ही शहीद आंदोलनकारियों का सपना रहा था। इस दौरान जिपं सदस्य अवतार सिंह पुंडीर, नारायण सिंह प्रधान संघ के अध्यक्ष पानसिंह नेगी, पूर्व क्षेपं सदस्य धनसिंह बिष्ट, लाल सिंह रावत, बागेश्वर के जिला बार संध अध्यक्ष डुंगरसिंह नेगी, एडवोकेट, गोबिंद सिंह, मथुरादत पांडे, गोपालदत कांडपाल, महेशचंद्र
पांडे, डी आर आर्य, त्रिलोक सिंह बागोड़ा, भगवान सिंह रावत, चंद्र सिंह नेगी, रघुवीर सिंह नेगी, राधा विष्ट मौजू थे।











