डॉ.हरीश चन्द्र अन्डोला
लोहाघाट। आयुश्री भावे की प्रतिभा और कड़ी मेहनत ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। अपनी लगन और मेहनत के दम पर उन्होंने सात समुंदर पार अमेरिका की एक प्रतिष्ठित केलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर का पद हासिल किया है। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने जीआरपी जैसी कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षा उत्तीर्ण की।
मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के कुल्हेल गांव की निवासी आयुश्री का परिवार लंबे समय से लोहाघाट में रह रहा है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा देवीधुरा के योगेश जोशी मेमोरियल शिव शक्ति पब्लिक स्कूल से प्राप्त की, जबकि आगे की पढ़ाई मल्लिकार्जुन पब्लिक स्कूल लोहाघाट से पूरी की। इसके बाद उन्होंने भीमताल से बी-फार्मा और जयपुर से एम-फार्मा की डिग्री हासिल की।
अध्ययन के साथ-साथ लेखन में भी उनकी गहरी रुचि रही है। उन्होंने फार्माकोलाजी क्षेत्र में एक पुस्तक लिखी है और दूसरी पुस्तक प्रकाशनाधीन है। इसके अलावा आयुश्री ने फाइन आर्ट और संगीत में भी डिग्री हासिल की है, जो उनके बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण है।
उनकी प्रारंभिक शिक्षा मां भावना आर्य के संरक्षण में हुई, जो वर्तमान में देवीधुरा के राजकीय इंटर कॉलेज की कार्यवाहक प्रधानाचार्य हैं। आयुश्री को आगे बढ़ने की प्रेरणा उनके पिता किशोर चंद्र व माता भावना से मिली। वे अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, नानी और गुरुओं को देती हैं।
उनकी इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री , सामाजिक कार्यकर्तासहित कई गणमान्य लोगों ने बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। आयुश्री भावे की यह उपलब्धि न केवल लोहाघाट बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय बन गई है। जिलाधिकारी मनीष कुमार आयुश्री को उनकी इस अभूतपूर्व सफलता पर जिला प्रशासन की ओर से सम्मानित करेंगे।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











