हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
थराली/देवाल।
बेहद खुशगवार मौसम के बीच श्री नंदादेवी बड़ी जात यात्रा अपने 15 वें पड़ाव पातरनचौनिया व बगवाबासा पहुंच गई हैं। जबकि बधाण की श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी की लोकजात यात्रा शुक्रवार को वेदनी में पूजा अर्चना के बाद नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा थराली के लिए वापस लौट पड़ी हैं।
श्री नंदादेवी बड़ी जात यात्रा के तहत दशोली, बण्ड़, ज्वाल्पा की देव डोलियां,छतोलियां एवं चौसिंगा खंडुओं के साथ देवी भक्तों ने वेदनी कुंड में स्नान करने के साथ ही यहां स्थापित नंदादेवी मंदिर में पूजा अर्चना की और उसके बाद 14 वें पड़ाव वेदनी से विदा होकर 15 वें व दूसरे निर्जन पड़ाव पातरनचौनियां व बगवाबासा पहुंच गई हैं। बड़ी जात यात्रा में चल रहे श्रद्धालुओं के हौंसले काफी अधिक बुलंद हैं। शनिवार को बड़ी जात यात्रा रहस्यमई रूपकुंड, यात्रा मार्ग से सर्वाधिक कठिन रास्तों में सुमार ज्यूरौगली होते हुए 16 वें व तीसरे निर्जन पड़ाव शीला समुद्र पहुंचेगी। इधर श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी बधाण की डोली 13 वें पड़ाव गौरोलीपातल से शुक्रवार को प्रातः यात्रा कर वेदनी बुग्याल पहुंची, यहां पर श्रद्धालुओं ने वेदनी कुंड की परिक्रमा कर एवं पितरों को तर्पण देते हुए उनके तारण की प्रार्थना की। इसके बाद दोपहर बाद वापसी के तहत यात्रा वेदनी बुग्याल से आली बुग्याल,दिदिना होते हुए रात्रि प्रवास के लिए देवाल ब्लाक के बांक गांव पहुंच गई हैं,बांक गांव पहुंचने पर देवी भक्तों ने गर्मजोशी के साथ यात्रा का स्वागत किया। शनिवार को यात्रा लोहाजंग,बगड़ीगाड़ होते हुए रात्रि प्रवास पर ल्वाणी गांव पहुंचेगी।
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*घंटों करते रहे फोटोग्राफी यात्री, यात्रा में सामिल होने को बताया सार्थक*
पिछले 6 दिनों से क्षेत्र में मौसम बेहद खुशगवार होने के चलते श्री नंदादेवी बड़ी जात यात्रा में सामिल हो रहें यात्री बेहद प्रसन्न हैं। शुक्रवार की प्रातः काल से दोपहर तक जिस तरह से वेदनी,आला आदि क्षेत्रों का मौसम एकदम से साफ था और यहां से दिखने वाली हिमपर्वत श्रंखला त्रिशूली, नंदा घुंघटी सहित अन्य पर्वत श्रृंखला जिस तरह से चमक रही थी,उसे देख यात्री बेहद खुश दिखाई दे रहे थे, प्रातः काल 6.30 बजें से ही यात्री दुर्लभ नाजारों को घंटों अपने कैमरों, मोबाइल फोनों में कैद करने में जुटे हुए थे। यात्री अपनी इस यात्रा को सार्थक बतानें से नही चूके।कहा जा रहा है कि इस तरह का साफ मौसम काफी कम देखने को मिलता हैं,यात्री इसे देवी नंदा की कृपा मान रहे हैं।











