रिपोर्ट.सत्यपाल नेगी/रुद्रप्रयाग
हम आपको अलग.अलग परिवारो के मकानों की जमीनी तस्वीरें दिखा रहे हैं, मगर इन्हें अभी आवास योजना का नहीं मिल सका लाभ।
कहते है जहाँ नीति नियन्ता सही फैसले नहीं लेते हों, वहॉ पर गरीबों का भला कैसे होगा?

जी हां हम आज आपको दिखा रहे है जमीनी हकीकत.नाम है प्रधानमंत्री आवास योजना’ जनपद रुद्रप्रयाग में भी इस योजना की पहली लिस्ट जारी होते ही चर्चाओं का बाजार भी गर्म हो चुका है।
आज हम आपको जनपद रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि ब्लाक की ग्राम पंचायत कोठगी के ऐसे कुछ परिवारों की सचाई दिखा रहे हैं, जिनके पास अपना रहने लायक घर भी नहीं है, दूसरो के मकानों पर जैसे.तैसे दिन गुजरने को मजबूर हैं, मगर हैरानी की बात तब हो गई जब प्रधानमंत्री आवाज की पहली सूची जारी हुई, इस सूची में इन पात्र लोगों का नाम तो रखा गया है, पर इनके नाम पर अभी धन स्वीकृत नहीं हुआ। कब तक इंतजार करवाएगी सरकार?

जबकि इनके घरों की स्थिति आप भी तस्वीरों मे देख रहे हैं। इन पात्र परिवारों के साथ-साथ गाँव के बुद्धिजीवी लोग भी मानते हैं कि वास्तव में पहला हक इन लोगों का बनता है, जिनके पास रहने की छत भी नसीब नहीं है। मगर सम्बन्धित अधिकारियों व कर्मचारीयों की मिली भगत के चलते ठीक.ठाक मकान वालों को भी पात्र बनाकर उनके खातों में पहली किस्त जारी कर दी गई है। आखिर इतनी बड़ी लापरवाही क्यो?
गाँव की चंदा देवी, अजय लाल, दीपा देवी, थनेंद्रलाल, हरीश सिंह जैसे गरीब परिवारों को पहली प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई? जबकि जियो टेक करने वाले अधिकारी-कर्मचारी को इनकी जमीनी सच्चाई भी मालूम थी।
इन लोगों ने 2 दिन पहले जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग मनुज गोयल को पत्र देकर जमीनी निरीक्षण करने की मांग भी की है ताकि सभी की जमीनी सच्चाई सामने दिखे।
इसे विडम्बना ही कहेंगे कि रहने के लिए घर भी नसीब नहीं है, इन्ही लोगों को, ना ही इनका अभी तक बीपीएल श्रेणी का राशन कार्ड बन सका।
जनपद के कई गाँवों से सूचना मिल रही है कि जिन लोगों की पहली किस्त जारी हुई, उनसे 5 हजार रुपये कर्मचारी मांग रहे हैं जोकि बड़ा सवाल खड़ा करने वाला है।
उम्मीद की जानी चाहिए कि जिला प्रशासन प्रधानमंत्री आवाज योजना में हुई अनियमितताओं की शीघ्र जांच करके पहले जरूरत मन्द पात्रों को आवाज दिलाने के लिए आगे आयेगा।
वही इन पीड़ित परिवारी का कहना है कि प्रधानमंत्री आवाज योजना पर सवाल उठने से पहले जमीनी पड़ताल भी जरूर की जाये। ताकि सही व पहले जरूरतमन्दों को प्रधानमंत्री आवाज योजना की छत मिल सके।
जब हमने प्रधानों से बात जाननी चाही तो सभी प्रधानों का यही कहना था कि यह योजना व सूची पूर्व के कार्यकालों में जा चुकी थी, साथ ही 2018 में इनकी फाइनल लिस्ट जा चुकी थी, सम्बन्धित अधिकारियों ने ही जीयोटेक भी कर लिये थे, मगर लिस्ट में नाम ऊपर नीचे कैसे व क्यों हुए? इसमें वतर्मान प्रधानों का कोई रोल नहीं था। हमारी पूरी कोशिश रहती है कि पहले सबसे जरूरतमन्द परिवारों को ही योजनाओं का लाभ मिले।











