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चारधाम यात्रा में कब थमेगा श्रद्धालुओं की जान जाने का सिलसिला!

07/05/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला

चारधाम यात्रा को शुरू हुए अभी कुछ ही दिन हुए हैं और श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. मगर, इसके साथ ही चिंता का विषय भी खड़ा हो गया है. 19 अप्रैल से शुरू हुई उत्तराखंड चारधाम यात्रा में अब तक लाखों की संख्या में श्रद्धालु चारों धाम के दर्शन कर चुके हैं. वहीं चारधाम यात्रा के दौरान मरने वालों की संख्या एक भी इजाफा हुआ है. अब तक 29 लोगों की जान जा चुकी है. सोचिए महज 18 दिन में 29 मौत होने का क्या मतलब है. इस बार भी उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की शुरुआत के साथ ही श्रद्धालुओं की मौत का सिलसिला शुरू हो गया है. चारधाम यात्रा के दौरान हार्ट अटैक समेत विभिन्न स्वास्थ्य कारणों के चलते अभी तक 29 लोगों की मौत हो चुकी है. सबसे अधिक 15 मौतें केदारनाथ यात्रा रूट पर हुई हैं. सचिव स्वास्थ्य का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं. प्रमुख रजिस्ट्रेशन केंद्रों के आसपास स्क्रीनिंग प्वाइंट बनाए गए हैं, ताकि यात्रा शुरू करने से पहले श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित की जा सके. विशेष रूप से यमुनोत्री और केदारनाथ जैसे कठिन ट्रैक रूट्स पर स्वास्थ्य सेवाओं का फोकस बढ़ाया गया है. इन मार्गों पर मेडिकल रिलीफ प्वाइंट की संख्या बढ़ाई गई है, जिससे आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके. इस बार एक अहम कदम उठाते हुए मेडिकल एजुकेशन विभाग को भी यात्रा प्रबंधन में शामिल किया गया है. इसके तहत मेडिकल कॉलेजों से विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की गई है. यही नहीं इस वर्ष यात्रा रूट पर पोर्टेबल ईसीजी जैसी सुविधाओं को भी शामिल किया है, जिससे हृदय संबंधी समस्याओं वाले श्रद्धालुओं की समय पर पहचान कर उन्हें उचित सलाह और उपचार दिया जा सके. उत्तराखंड सरकार चारधाम यात्रा को सुलभ और सुरक्षित बनाए जाने पर जोर दे रही है. जिसके मद्देनजर चारधाम की यात्रा शुरू होने से पहले यात्रा से संबंधित विभागों की ओर से व्यवस्थाएं की मुकम्मल कर ली गई थी. इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से बकायदा हेल्थ एडवाइजरी भी जारी की गई थी. ताकि, चारधाम की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु हेल्थ एडवाइजरी को ध्यान में रखते हुए यात्रा करें.इन सबके बीच चारधाम यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य खराब होने की वजह से लगातार हो रहे श्रद्धालुओं की मौतों के आंकड़े ने राज्य सरकार की चिताओं को और ज्यादा बढ़ा दिया है. जबकि, वर्तमान स्थिति या है कि अभी भी कामों में मौसम खराब चल रहा है. ऐसे में यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है. चारधाम के मंदिर समुद्र तल से 3 हजार से साढ़े 3 हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं। पहाड़ों पर जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती है, हवा में ऑक्सीजन का स्तर कम होता जाता है। समुद्र तल पर हवा में ऑक्सीजन की मात्रा 21% होती है, लेकिन 3,000 मीटर की ऊंचाई पर यह स्तर काफी कम हो जाता है। इसे मेडिकल भाषा में ‘हाइपोक्सिया’ कहते हैं। मैदानी इलाकों से सीधे पहाड़ों पर चढ़ने वाले लोगों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि बिना तैयारी के ऊंचाई पर चढ़ने से ‘एक्यूट माउंटेन सिकनेस’ का खतरा बढ़ जाता है। ‘एक्यूट माउंटेन सिकनेस’ के लक्षणों में सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी और सांस फूलना शामिल मौत के आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा प्रभावित बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग हैं। हार्ट रोग, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर और सांस की बीमारियों से जूझ रहे श्रद्धालु इस ऊंचाई पर सबसे ज्यादा जोखिम में होते हैं। कई लोग बिना मेडिकल जांच और तैयारी के यात्रा पर निकल पड़ते हैं, जो खतरे को और बढ़ा देता है। इन मौतों के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रशासन इस स्थिति को संभालने के लिए तैयारहै?उत्तराखंड सरकार ने यात्रा मार्गों पर मेडिकल कैंप, ऑक्सीजन सिलेंडर और आपातकालीन सेवाएं शुरू की हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के सामने ये सुविधाएं नाकाफी साबित हो रही हैं। मौसम की मार भी यात्रियों के लिए मुश्किलें बढ़ा रही है। अचानक बारिश, भूस्खलन और ठंड यात्रा को और जोखिम भरा बना देती है।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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