सत्यपाल नेगी/रुद्रप्रयाग
भाजपा ने गलत नींव रख दी थी राज्य बनते ही, मात्र 21 सालों में 11 मुख्यमंत्री बदल चुके हैं। आज 11 वें मुख्यमंत्री की औपचारिक घोषणा होनी है।
आखिर नये नवेले गरीब पहाड़ी राज्य की वोटर जनता को मिल क्या रहा है, मुख्यमन्त्रियों की फैक्टरी? कुछ महीने पहले यानि मात्र 4 महीने भी पूरे नहीं हुए थे. 10 मार्च 2021 को ही उत्तराखंड में मुख्यमंत्री का पद संभालने वाले तीरथ सिंह रावत ने देर रात पद से इस्तीफा दे दिया। पिछले तीन दिनों से दिल्ली में रुके तीरथ को शुक्रवार दोपहर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उनके विधानसभा उप चुनाव में आ रही संवैधानिक अड़चन की जानकारी देते हुए साफ कर दिया कि उन्हें मुख्यमंत्री पद छोडऩा पड़ेगा। इसके बाद तीरथ उन्हें अपने इस्तीफे की पेशकश का पत्र सौंप देहरादून लौट आए।
मुख्यमंत्री तीरथ ने 2 जुलाई रात्रि सवा 11 बजे राजभवन जाकर राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को इस्तीफा सौंपा। राज्यपाल ने उनका इस्तीफा मंजूर करते हुए नए मुख्यमंत्री के कार्यभार संभालने तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में बने रहने को कहा। नया नेता चुनने के लिए भाजपा विधायक दल की बैठक आज दोपहर तीन बजे देहरादून में बुलाई गई है। यह लगभग तय माना जा रहा है कि इस बार नए नेता का चयन विधायकों में से ही किया जाएगा।
आज तीन बजे भाजपा विधायक दल की बैठक होगी। जिसमें नए नेता का नाम तय होगा। गौरतलब है कि दिल्ली में तीन दिन तक तीरथ सिंह रावत की परेड हो या फिर नेता विधानमंडल दल चुनने की औपचारिकता, सब कुछ सिर्फ नाटक है। सबकुछ पहले से तय है। डोर दिल्ली के पास है, वह सिर्फ नाटक कराती है, सबकुछ पहले ही तय हो जाता है।
अब सवाल उठते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस डबल इंजिन की मांग जनता से की, जनता ने उसे हाथों-हाथ लिया और उसमें बढ़ चढ़कर सहयोग दिया। 70 की विधानसभा में 57 का बहुमत पांच साल में तीन मुख्यमंत्री देने का प्रयोग क्यों हुआ? इससे राज्य कितना नुकसान हुआ? दिल्ली में बैठे आंकाओं को इसकी कल्पना भी है? या फिर उत्तराखंड की उनके लिए कोई औकात नहीं है? उत्तराखंड पर आंका इसी तरह के विनाशक प्रयोग करते रहेंगे? उत्तराखंड की जनता इन विदूषकों पर फिर भी ऐसे ही भरोसा करती रहेगी?











