हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
भराड़ीसैंण (गैरसैंण)/थराली। उत्तराखंड के खुबसूरत पहाड़ की वादियों में स्थित राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण गैरसैंण एक बार फिर से राज्य की तकदीर लिखने के लिए
सज-संवर कर तैयार हैं। चमोली जिला प्रशासन सत्र को शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित सम्पादित करने के लिए तैयारियों की आखरी समीक्षाएं कर रहा हैं।इस सत्र में जहां सरकार अनुपूरक बजट एवं कई विधायक पेश करेगी वही विपक्ष भी तमाम मुद्दों को लेकर खासा आक्रामक तेवरों से सरकार को घेरने का प्रयास करेगा। एक तरह से दो दिनों तक पूरे राज्यवासियों का ध्यान भराड़ीसैंण पर ही टिका रहेगा।
27 अक्टूबर से गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा में राज्य विधानसभा का दो दिवसीय सत्र आयोजित होगा।सत्र को लेकर चमोली जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन पिछले कई दिनों से तैयारियों में जुटा हुआ हैं।अब लगभग सभी तैयारियां पूरी हो गई हैं तों प्रशासन तैयारियों को अंतिम रूप से परखने में लगा हुआ हैं। चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार के साथ ही अन्य जिलास्तरीय अधिकारी अपने-अपने स्तरों पर तैयारियों की अंतिम समीक्षाएं कर व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने में जुटे हुए हैं। विधानसभा परिसर को जहां पूरी तरह से तैयार कर लिया गया हैं,वही सुरक्षा को लेकर भी चाक-चौबंद व्यवस्थाएं की गई हैं,सभी जरूरी सुविधाओं को भी भराड़ीसैंण में उपलब्ध करवाने के प्रयास किए गए हैं। आम यात्रियों को सत्र के चलते परेशानी ना हो इसका भी खासा ध्यान रखा गया हैं। इसके अलावा अधिग्रहित व्यक्ति विधान परिसर तक ना पहुंच सकें इसके भी पुख्ता इंतजामात किए गए हैं। कल(आज) से माननीयों के साथ ही खास एवं शासन के आलाधिकारियों का भराड़ीसैंण पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। जिनके स्वागत के लिए चमोली प्रशासन पूरी तरह से तैयार हैं।धामी सरकार के पांच सालों के कार्यकाल का यह अंतिम सत्र माना जा रहा हैं,अगले साल राज्य में छठवीं विधानसभा के गठन के लिए चुनाव होने हैं,इस लिहाज से भी भराड़ीसैंण में आयोजित हो रहे 11 वें सत्र को काफी अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धामी सरकार इस सत्र में अनुपूरक बजट पास करवाने के अलावा कई महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में पारित करवाने का प्रयास करेंगी,वही दूसरी ओर विपक्षी दल भी तमाम मुद्दों पर सदन में सरकार को घेरने का निश्चित ही प्रयास करेंगे,अब तक विपक्षीय दलों के द्वारा विभिन्न मुद्दों को सड़कों पर उठा कर सरकार को घेरने के प्रयासों में जुटी हुई हैं। जिन्हें देखकर माना जा रहा है कि विपक्ष इन्हीं मुद्दों पर सदन में सरकार को घेरने का प्रयास करेंगी, विधानसभा चुनावों के एन पहले पहाड़ की गोद में आयोजित हो रहे दो दिवसीय सत्र के दौरान सरकार अपने उपलब्धियों को सदन के माध्यम से आम जनता तक पहुंचाने का हरसंभव प्रयास करेगी वही विपक्ष सरकार को घेरने में कोई भी कसर नही छोड़गी। कुल मिलाकर इस सदन के काफी अधिक हंगामेदार के आसार बने हुए हैं।
———
9 नवंबर 2000 में उत्तराखंड राज्य गठन के बाद पहली बार गैरसैंण में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व में चल रही सरकार ने 2014 में विशेष टेंटों में बैठ कर राज्य का पहला ऐतिहासिक सत्र का आयोजन किया था। यह सत्र 3 दिनों तक चला था।दूसरा सत्र 2015 में आयोजित हुआ इसकी अवधि 2 दिन थी, तीसरी बार सत्र 2016 में नवनिर्मित विधान भवन में आयोजित हुआ था।चौथा सत्र 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार के दौरान आयोजित हुआ था,सभी सत्र मात्र दो-दो दिन ही चलें थें। पांचवां सत्र 2018 में बजट सत्र के रूप में 6 दिनों तक आयोजित किया गया,2019 में यहां पर कोई भी सत्र संचालित नही हुआ था।छठा सत्र 2020 में 5 दिनों तक आयोजित किया गया।सातवां सत्र 2021 में आयोजित हुआ। एक बार फिर से 2022 में ग्रीष्मकालीन राजधानी में कोई भी सत्र आयोजित नही हुआ था।आठवां सत्र 2023 में आयोजित हुआ, नवा सत्र 2024 में आयोजित हुआ था। पिछले बार अर्थात 10 वां सत्र 2025 में आयोजित हुआ था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सर्वाधिक 5 सत्र भराड़ीसैंण में आयोजित हुएं,आगामी 27 अक्टूबर से आयोजित होने वाला सत्र उनका छठ़ा सत्र होगा। जबकि इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व में तीन सत्र गैरसैंण-भराड़ीसैंण में आयोजित हुएं थें।2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के शासनकाल में गैरसैंण को राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया था।














