डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
बदरीनाथ धाम की यात्रा के दौरान सफाई की चाक चौबंद व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बनी रहती थी. नगर पंचायत बदरीनाथ ने धाम में होने वाले कूड़े को समृद्धि का आधार बना लिया है. यहां नगर पंचायत की ओर से कूड़े का विपणन (मार्केटिंग) कर 8 लाख रुपए से अधिक की आय अर्जित की है, जो अब जनपद की अन्य नगर पालिकाओं और पंचायतों के लिए भी मॉडल के रूप में स्थापित हो गया है.बदरीनाथ धाम में सफाई व्यवस्था का जिम्मा नगर पंचायत के पास है. जिसके लिए पंचायत की ओर से जहां प्रतिवर्ष यात्राकाल में यहां पर्यावरण मित्रों की तैनाती की जाती है. वहीं कूड़ा निस्तारण के लिए एमआरएफ सेंटर, कॉम्पैक्टर मशीन, ऑर्गेनिक वेस्ट कनवर्टर मशीन के साथ ही अन्य व्यवस्थाएं की गई हैं. जिनके माध्यम से एक ओर नगर पंचायत की ओर से प्लास्टिक और अन्य कचरे के ब्लॉक बनाकर विपणन किया जाता है. वहीं खाद्य सामग्री के कचरे से कम्पोस्ट खाद बनाकर बेचा जा रहा है. जिससे धाम में सफाई व्यवस्था को चाक चौबंद रखने के साथ पंचायत को अच्छी खासी आय भी प्राप्त हो रही है. बदरीनाथ धाम की यात्रा के दौरान सफाई की चाक चौबंद व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बनी रहती थी. नगर पंचायत बदरीनाथ ने धाम में होने वाले कूड़े को समृद्धि का आधार बना लिया है. यहां नगर पंचायत की ओर से कूड़े का विपणन (मार्केटिंग) कर 8 लाख रुपए से अधिक की आय अर्जित की है, जो अब जनपद की अन्य नगर पालिकाओं और पंचायतों के लिए भी मॉडल के रूप में स्थापित हो गया है.बदरीनाथ धाम में सफाई व्यवस्था का जिम्मा नगर पंचायत के पास है. जिसके लिए पंचायत की ओर से जहां प्रतिवर्ष यात्राकाल में यहां पर्यावरण मित्रों की तैनाती की जाती है. वहीं कूड़ा निस्तारण के लिए एमआरएफ सेंटर, कॉम्पैक्टर मशीन, ऑर्गेनिक वेस्ट कनवर्टर मशीन के साथ ही अन्य व्यवस्थाएं की गई हैं. जिनके माध्यम से एक ओर नगर पंचायत की ओर से प्लास्टिक और अन्य कचरे के ब्लॉक बनाकर विपणन किया जाता है. वहीं खाद्य सामग्री के कचरे से कम्पोस्ट खाद बनाकर बेचा जा रहा है. जिससे धाम में सफाई व्यवस्था को चाक चौबंद रखने के साथ पंचायत को अच्छी खासी आय भी प्राप्त हो रही है. इस यात्राकाल में बदरीनाथ नगर पंचायत ने कुल 230 टन कूड़े का निस्तारण किया है. जबकि 133 टन सूखे के ब्लॉक और 97 गीले कूड़े की कम्पोस्ट खाद बनाकर 8 लाख 89 हजार 598 रुपए की आय अर्जित की है. इसके साथ ही पंचायत ने ईको पर्यटक शुल्क के माध्यम से 1 करोड़ 14 लाख 97 हजार 56 रुपए की आय अर्जित की गई है. वहीं फास्टैग बैरियर से 92 लाख 60 हजार 796 रुपए और हेलीकॉप्टर संचालन से मिलने वाले शुल्क से 22 लाख 36 हजार 260 लाख की आय अर्जित की है. बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद नगर पंचायत बदरीनाथ की ओर से सफाई व्यवस्था को चाक चौबंद रखने के लिए डीप सैनिटाइजेशन अभियान चलाया गया. यहां पर्यावरण मित्रों की ओर से धाम के मंदिर परिसर के साथ ही ब्रह्म कपाल, तप्त कुंड, बामणी पैदल मार्ग, मुख्य बाजार, साकेत चौराहे, बद्रीश झील, शेषणेत्र झील के आसपास सफाई अभियान चलाया. पंचायत ने धाम से एकत्रित कचरे का निस्तारण कर दिया है. नगर पंचायत की ओर से बदरीनाथ धाम में आने वाले बाहरी वाहनों से ईको पर्यटक शुल्क लिया जाता है. जिससे होने वाली आय से पंचायत धाम में सफाई व्यवस्था, पर्यटन विकास के साथ अन्य व्यय वहन किया जाता है. नगर पंचायत की ओर से बदरीनाथ धाम में आने वाले बाहरी वाहनों से ईको पर्यटक शुल्क लिया जाता है. जिससे होने वाली आय से पंचायत धाम में सफाई व्यवस्था, पर्यटन विकास के साथ अन्य व्यय वहन किया जाता है. नगर पंचायत ने बदरीनाथ धाम में ईको पर्यटन शुल्क और कूड़ा निस्तारण प्रणाली से अब तक एक करोड़ सात लाख 64 हजार रुपये की आय अर्जित कर ली है। नगर पंचायत द्वारा एकत्रित कूड़े को रिसाइक्लिंग के लिए उत्तर प्रदेश के बिजनौर और सहारनपुर की फैक्ट्रियों को बेचा जा रहा है।हर वर्ष छह माह तक चलने वाली बदरीनाथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से भगवान बदरी विशाल के दर्शन को पहुंचते हैं। बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने से प्लास्टिक और ठोस कचरे की चुनौती बढ़ी, जिसके समाधान के लिए नगर पंचायत ने वर्ष 2021 में एक समग्र कचरा प्रबंधन योजना लागू की। इसके तहत यात्रा वाहनों से ईको शुल्क वसूला जाने लगा, नगर क्षेत्र में कूड़ेदान और वाहनों की संख्या बढ़ाई गई, और पर्यावरण मित्रों की मदद से कचरे को निस्तारण केंद्र तक पहुँचाने की व्यवस्था की गई।वर्तमान में निस्तारण केंद्र में दो प्लास्टिक कॉम्पेक्टर और एक ऑर्गेनिक वेस्ट कन्वर्टर मशीन लगाई गई है। प्लास्टिक कचरे की बिक्री से आय हो रही है, जबकि जैविक कचरे से खाद तैयार कर बदरीनाथ धाम के तुलसी वन और हरित क्षेत्रों में उपयोग किया जा रहा है। कंपोस्टिंग के लिए 12 पिट बनाए गए हैं और 15 कर्मचारी छंटाई व कंपोस्टिंग कार्य में तैनात हैं। नगर पंचायत देश के प्रथम गांव माणा में भी सफाई व्यवस्था देख रही है। यहाँ आने वाले वाहनों से पार्किंग शुल्क वसूला जाता है, जिसमें से 30 प्रतिशत राशि ग्राम पंचायत माणा को दी जाती है और 70 प्रतिशत राशि सफाई कार्यों में खर्च होती है। माणा में 15 सफाई कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं। यात्राकाल के दौरान यात्रियों से ईको पर्यटन शुल्क लिया जाता है, जो अब नगर पंचायत के लिए एक महत्वपूर्ण आय का स्रोत बन चुका है. यह शुल्क यात्री वाहनों से लिया जाता है, जिसमें चौपहिया वाहनों से 60 रुपये, टेंपो ट्रैवलर से 100 रुपये, और बस से 120 रुपये वसूले जाते हैं. इसके अतिरिक्त, हेलीकाप्टर से आने वाले यात्रियों से प्रति फेरा 1,000 रुपये का शुल्क लिया जाता है. फास्टैग बैरियर की मदद से यह शुल्क अब और भी आसान तरीके से वसूल किया जा रहा है, जिससे मैनपावर की लागत भी कम हो गई है.। *लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं*









