• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

मंदाकिनी में कचरे का संकट एसटीपी व्यवस्था पर उठे सवाल

21/08/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
9
SHARES
11
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

 

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
केदारनाथ मंदिर करीब 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. जहां ग्लेशियर भी है. केदारनाथ में उचित कचरा प्रबंधन प्रणाली की कमी पिछले साल पीएम के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी सामने आई थी. फिर भी अधिकारियों ने प्लास्टिक कचरे को निचले इलाके में ले जाने और इसके निस्तारण को लेकर कोई काम नहीं किया.वहीं, आरटीआई कार्यकर्ता ने कहा कि अगर हालात इसी तरह से चलते रहे तो साल 2013 की आपदा जैसी एक और त्रासदी से इनकार नहीं किया जा सकता है. चिंता की बात ये है कि आरटीआई के जवाब में दावा किया गया है कि इस अवधि के दौरान गैर-जिम्मेदाराना तरीके से कचरा निपटान के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई या फिर कोई कार्रवाई नहीं की गईएनएमसीजी ने जिला प्रशासन को ये निर्देश के आरटीआई के आधार पर दायर की गई शिकायत पर जारी किए हैं. इस शिकायत में ये भी खुलासा हुआ है कि केदारनाथ में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कमी की वजह से गंगा की सहायक नदी मंदाकिनी में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है. इतना ही नहीं गंदगी और कचरा सीधे इसमें छोड़ा जा रहा है. वर्ष 2024 में दाखिल मूल आवेदन में केदारनाथ क्षेत्र की सीवेज व कचरा व्यवस्था को लेकर एनजीटी में याचिका दाखिल की गई थी। अब दो वर्ष बाद भी बहस इस बात पर आकर अटक गई है कि नदी को प्रदूषण से बचाने की व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी है। केदारनाथ में सीवेज और कचरा प्रबंधन के दावों पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकार के मुताबिक केदारनाथ (गुप्तकाशी) का 600 केएलडी और गौरीकुंड का 200 केएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट चालू है।दूसरी ओर याचिकाकर्ता ने दोनों की क्षमता को अपर्याप्त बताते हुए दावा किया है कि मंदाकिनी नदी में अब भी कचरा डाला जा रहा है। मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) पहुंचा तो अधिकरण ने दावे को प्रमाणित करने के लिए चार सप्ताह में साक्ष्य पेश करने का समय दे दिया।18 अगस्त को एनजीटी की प्रधान पीठ में हुई सुनवाई में रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी की 14 अगस्त की रिपोर्ट भी सामने आई। इसमें कहा गया है कि केदारनाथ एसटीपी का निर्माण पूरा हो चुका है, ड्राई रन सफल रहा है और सीवरेज नेटवर्क को क्रियान्वित करने की योजना पर काम चल रहा है। राज्य सरकार की ओर से दोनों एसटीपी को कार्यशील बताया गया। एनजीटी के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर एसटीपी संचालित हैं तो मंदाकिनी तक कचरा पहुंचने का आरोप क्यों सामने आ रहा है। याचिकाकर्ता ने स्पष्ट रूप से कहा कि एसटीपी की क्षमता पर्याप्त नहीं है और नदी में अभी भी कचरा डाला जा रहा है। इसके समर्थन में संबंधित सामग्री प्रस्तुत करने को चार सप्ताह का समय मांगा गया, जिसे अधिकरण ने स्वीकार कर लिया। यानी मामला सिर्फ एसटीपी बनने तक सीमित नहीं रहा। पूरा सीवरेज नेटवर्क उससे जुड़ा है या नहीं, अब यह भी देखा जाएगा। त्तराखंड की पवित्र मंदाकिनी नदी में गंदगी और कचरा डाले जाने का मामला सामने आने के बाद अब सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। केदारघाटी और रुद्रप्रयाग क्षेत्र में नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए किए जा रहे दावों के बीच स्थानीय स्तर पर गंदे पानी और कचरे के सीधे नदी में जाने की शिकायतें सामने आई हैं।मंदाकिनी नदी में कचरा जाने की शिकायतों के बाद अब एसटीपी की कार्यप्रणाली और सीवेज व्यवस्था की जांच की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में नदी की प्राकृतिक सुंदरता और जल गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ सकता है। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती मंदाकिनी नदी की पवित्रता बनाए रखने के साथ-साथ बढ़ते पर्यटन दबाव को संभालने की है। नदी संरक्षण के लिए प्रभावी योजना और उसका सख्ती से पालन ही इस समस्या का स्थायी समाधान माना जा रहा है।
पहाड़ी क्षेत्रों में नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए छोटे-छोटे ट्रीटमेंट प्लांट, कचरा संग्रहण केंद्र और नियमित निगरानी की जरूरत होती है। खासतौर पर तीर्थ क्षेत्रों में सीवेज प्रबंधन को प्राथमिकता देना जरूरी है। मंदाकिनी नदी में कचरा जाने की शिकायतों के बाद अब एसटीपी की कार्यप्रणाली और सीवेज व्यवस्था की जांच की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में नदी की प्राकृतिक सुंदरता और जल गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ सकता है। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती मंदाकिनी नदी की पवित्रता बनाए रखने के साथ-साथ बढ़ते पर्यटन दबाव को संभालने की है। नदी संरक्षण के लिए प्रभावी योजना और उसका सख्ती से पालन ही इस समस्या का स्थायी समाधान मानाजारहाहै। केदारनाथ में मंदाकिनी नदी में सीवर बहाए जाने की शिकायत से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश जारी किए हैं। एनजीटी ने कहा कि केदारनाथ क्षेत्र में सीवेज ट्रीटमेंट और सालिड वेस्ट मैनेजमेंट की स्थिति के आकलन के लिए गठित समिति की संस्तुतियों पर गंभीरता से कदमउठाएजाएं। विडम्बना है कि नदी का पानी तो सबको दिखाई पड़ता है, मगर बालू को लोग भूल जाते हैं। कड़वी सच्चाई यह है कि हमारे इंजीनियर पानी का क्या करना है उसके बारे में तो सब कुछ या बहुत कुछ जानते हैं, मगर बालू का क्या करना है, यह तय कर पाना उनके लिए कठिन हो जाता है। इस दिशा में कोई कदम उठाने के पहले एक बार फरक्का परियोजना का मूल्यांकन जरूरी है। गंगा की निर्मलता पर कोई दोराय नहीं हो सकती है। मगर इसे नौ-परिवहन से जोड़े जाने के बाद इसकी अविरलता पर आँच आएगी। मंदाकिनी की निर्मलता के लिए अविरलता बुनियादी शर्त है। नौ-परिवहन का लोभ अविरलता की राह के रोड़े बनेगा। दोनों उद्देश्यों के बीच सामंजस्य बैठा पाने की चुनौती सामने है।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

Share4SendTweet2
Previous Post

डाक्टर दाभोलकर की शहादत को याद कर मनाया राष्ट्रीय वैज्ञानिक चेतना दिवस

Next Post

यूजेवीएन लिमिटेड को पीएफसी (PFC) ने दी ‘ए+’ श्रेणी

Related Posts

उत्तराखंड

अपर निदेशक ने श्रीनगर पशुचिकित्सालय का आकस्मिक निरीक्षण कर निर्माण की तैयारियों का लिया जायज़ा

October 22, 2026
8
उत्तराखंड

दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए डोईवाला में शिविर

October 22, 2026
8
उत्तराखंड

डोईवाला: एसडीआरएफ उत्तराखंड को मिला गुणवत्ता प्रबंधन का प्रमाणपत्र

October 22, 2026
8
उत्तराखंड

डोईवाला: 50 हजार के इनामी को पश्चिम बंगाल से किया गिरफ्तार

October 22, 2026
39
उत्तराखंड

डोईवाला: वित्तीय योजनाओं का लाभ लेने के लिए किया जागरूक

October 22, 2026
12
उत्तराखंड

देहरादून: मुख्यमंत्री ने किया डॉ. ममता कुंवर की पुस्तक ‘श्रीरामलीला’ का विमोचन

October 22, 2026
40

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67758 shares
    Share 27103 Tweet 16940
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45794 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38082 shares
    Share 15233 Tweet 9521
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37461 shares
    Share 14984 Tweet 9365
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37384 shares
    Share 14954 Tweet 9346

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

अपर निदेशक ने श्रीनगर पशुचिकित्सालय का आकस्मिक निरीक्षण कर निर्माण की तैयारियों का लिया जायज़ा

October 22, 2026

दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए डोईवाला में शिविर

October 22, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.