डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
गंगोत्री हिमालय में समुद्रतल से करीब बीस हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित चोटियों पर देश का पहला सफल हेली रेस्क्यू अभियान चलाया गया। दो दिन चले इस अभियान में यूकाडा की हेली सेवाओं की मदद से टीमों ने 67 लोगों को सुरक्षित निकाला। इससे पूर्व अगस्त माह में सेना के हेलिकॉप्टर ने भी लद्दाख क्षेत्र की 18,500 फीट ऊंची नुन-कुन चोटी से एक घायल पर्वतारोही का सफल रेस्क्यू किया था।यूकाडा के चार हेलिकॉप्टरों पर रेस्क्यू टीमों ने तेज हवाओं के बीच बचाव अभियान चलाया। जोगिन वन चोटी सहित कालिंदी पास, सतोपंथ चोटी, ओडेन पास, वासुकीताल समुद्रतल से करीब 15 हजार से 20 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं। ट्रैकिंग एजेंसी के संचालक ने बताया कि इससे पूर्व कहीं पर भी इतने वृहद हेली रेस्क्यू अभियान का उदाहरण नहीं देखने को मिला। उन्होंने एजेंसियों को किराए पर सैटेलाइट फोन उपलब्ध करवाने की मांग की। गढ़वाल माउंटेनियरिंग व ट्रैकिंग एजेंसी एसोसिएशन ने कहा कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में करीब पांच फीट बर्फ गिर गई थी। इसके बीच जिला प्रशासन और पूरी टीम ने मजबूती के साथ कार्य किया। यूकाडा की हेली सेवाओं की अहम भूमिका रही है। गंगोत्री हिमालय मेंं हुई बर्फबारी में फंसे 136 पर्वतारोहियों में से 67 लोगों को सफलतापूर्वक निकाल लिया गया है। अन्य पर्वतारोहियों में एक दल अपना अभियान जारी रखना चाहता है। साथ ही दूसरी चोटियों के आरोहण के लिए गए पर्वतारोही अपनी व्यवस्थाओं पर सुरक्षित वापस आ रहे हैं।ओडेन कॉल पास व कालिंदी पास से चालीस पर्वतारोहियों को सोमवार को निकाल लिया गया था। मंगलवार कोे दोबारा शुरू किए गए अभियान में कालिंदी सहित जोगिन वन, वासुकीताल, सतोपंथ से 27 पर्वतारोहियों को निकाला गया। हर्षिल में अभियान का नेतृत्व कर रहीं एडीएम ने बताया कि ओडेन कॉल पास से 29, जोगिन–I से 08, सतोपंथ से 08, कालिंदी पास से 19 तथा वासुकी ताल से तीन पोर्टरों का रेस्क्यू किया गया। श्रीकंठ अभियान पर गए 18 सदस्नीय एसएसबी दल अपने अभियान को पूरा करना चाहता है। जबकि सुदर्शन पीक पर 12 सदस्य, भागीरथी–II (आर्मी) 20 सदस्य, भागीरथी–II 09 सदस्य, शिवलिंग 07 और 05 सदस्य दल स्वयं सुरक्षित वापस आ रहे हैं। इसके बाद अब रेस्क्यू को बंद कर दिया गया है। दो दिन के भीतर शासन-प्रशासन की ओर से यूकाडा के चार हेलिकॉप्टर सहित आईटीबीपी, एसडीआरएफ, वन विभाग की ओर से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सफल अभियान चलाया गया। उच्च हिमालय में भारी बर्फबारी हो रही है. इस कारण रेस्क्यू अभियान में चुनौतियां बनी हुई हैं. बावजूद इसके एसडीआरएफ और अन्य बचाव एजेंसियों के जवान लगातार अभियान में जुटे हुए हैं. प्रशासन की ओर से सभी संबंधित टीमों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखा जा रहा है, ताकि फंसे हुए लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सके. एसडीआरएफ के सेनानायक के दिशा-निर्देशन में तथा सहायक सेनानायक के नेतृत्व में SDRF द्वारा अन्य बचाव एवं राहत एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए वासुकीताल ट्रेक पर फंसे सभी 11 ट्रेकर्स का सकुशल रेस्क्यू कर लिया गया है. SDRF टीम द्वारा चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बीच त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी 11 ट्रेकर्स को सुरक्षित निकालकर हर्षिल हेलीपैड पहुंचाया गया. हर्षिल हेलीपैड पर सभी ट्रेकर्स का मेडिकल परीक्षण किया गया, जिसमें सभी ट्रेकर्स स्वस्थ पाए गए. SDRF द्वारा वासुकीताल ट्रेक पर चलाया गया रेस्क्यू अभियान पूर्ण कर लिया गया है. वर्तमान में वासुकीताल ट्रेक पर अन्य किसी ट्रेकर के फंसे होने की सूचना नहीं है. यूएसडीएमए की ओर से अभियान के लिए आवश्यक समन्वय एवं लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराई गई है. टीम को सेटेलाइट फोन के साथ ही लो अर्थ आर्बिट डिवाइस को यूएसडीएमए की ओर से उपलब्ध कराई गई है. जिससे टीम का संचार व समन्वय बना रहे. इस सिस्टम के जरिए वसुंधरा ताल एवं उसके आसपास के पर्यावरणीय और जलवैज्ञानिक परिवर्तनों की लगातार निगरानी की जा सकेगी. सेंसरों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर संभावित असामान्य परिवर्तनों की पहचान करने और समय रहते संबंधित तंत्र को अलर्ट उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी. सर्वेक्षण के माध्यम से झीलों की गहराई, जलधारण क्षमता एवं अन्य महत्वपूर्ण जलवैज्ञानिक आंकड़े जुटाए गए हैं, जिनके आधार पर संभावित ग्लाॅफ जोखिम का वैज्ञानिक आकलन एवं आवश्यक आपदा प्रबंधन तैयारियों को और मजबूत किया जाएगा।उन्होंने कहा कि ग्लेशियल झीलों की निगरानी के लिए राज्य स्तर पर संबंधित केंद्रीय एवं तकनीकी संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। झीलों में जलस्तर, आकार में परिवर्तन तथा अन्य संभावित जोखिमों की नियमित निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ग्लाॅफ की संभावित घटनाओं से निचले क्षेत्रों में स्थित बस्तियों, सड़कों, पुलों, जलविद्युत परियोजनाओं एवं अन्य महत्वपूर्ण अवस्थापना को संभावित खतरे को देखते हुए पूर्व तैयारी और समयबद्ध चेतावनी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।राज्य सरकार का उद्देश्य वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर जोखिम की पहचान करते हुए प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते आवश्यक सुरक्षा एवं बचाव की कार्रवाई सुनिश्चित करना है। राज्य सरकार का प्रयास है कि वैज्ञानिक संस्थानों, विशेषज्ञों और आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों के समन्वय से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आधुनिक निगरानी एवं पूर्व चेतावनी तंत्र को और मजबूत किया जाए। गंगोत्री हिमालय मेंं हुई बर्फबारी में फंसे 136 पर्वतारोहियों में से 67 लोगों को सफलतापूर्वक निकाल लिया गया है। .लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











