
डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
राष्ट्र सेवा और शुचिता के प्रतीक मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी का गौरवशाली सफरभारतीय राजनीति और सैन्य इतिहास में बहुत कम ऐसे व्यक्तित्व हुए हैं जिन्होंने युद्ध के मैदान से लेकर सियासत के गलियारों तक अपनी ईमानदारी और अनुशासन का परचम समान रूप से लहराया हो। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (रिटायर्ड) एक ऐसे ही विरले राजनेता थे, जिनका जीवन देश की सेवा और सुशासन के प्रति समर्पित रहा।सैन्य जीवन: शौर्य और अनुशासन की नींव1 अक्टूबर 1934 को जन्मे भुवन चंद्र खंडूड़ी ने युवावस्था में ही भारतीय सेना को अपने कार्यक्षेत्र के रूप में चुना।इंजीनियरिंग कोर में सेवा: वह सेना के ‘कोर ऑफ इंजीनियर्स’ (मद्रास सैपर्स) में शामिल हुए।युद्धों में सहभागिता: उन्होंने 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों में देश की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।विशिष्ट सेवा पदक: सेना में उनके अद्वितीय नेतृत्व और समर्पण के लिए उन्हें ‘अति विशिष्ट सेवा पदक’ से सम्मानित किया गया।मेजर जनरल पद से सेवानिवृत्ति: वह वर्ष 1990 में मेजर जनरल के प्रतिष्ठित पद से सेवानिवृत्त हुए।केंद्रीय राजनीति: देश को दी ‘सड़कों की सौगात’सेना से सेवानिवृत्ति के बाद खंडूड़ी ने भारतीय जनता पार्टी के माध्यम से सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया। वह पौड़ी गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र से कई बार सांसद चुने गए।सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय: अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के कार्यकाल के दौरान उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में कार्य किया।स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना: प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘स्वर्णिम चतुर्भुज योजना’ को धरातल पर उतारने का मुख्य श्रेय जनरल खंडूड़ी को जाता है। उनके कुशल प्रबंधन की वजह से देश के चारों महानगरों को जोड़ने वाले इस हाईवे नेटवर्क का काम रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ।प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ग्रामीण भारत की सूरत बदलने वाली इस योजना के क्रियान्वयन में भी उनकी अहम भूमिका रही। केंद्रीय राजनीति में उन्हें ‘सड़क पुरुष’ के रूप में एक नई पहचान मिली।भुवन चंद्र खंडूड़ी दो बार (2007 से 2009 और फिर 2011 से 2012) उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। राज्य के विकास के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदम आज भी मील का पत्थर माने जाते हैं। मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने नौकरशाही और प्रशासनिक व्यवस्था में कड़ा अनुशासन लागू किया। भ्रष्टाचार के खिलाफ उन्होंने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई। अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने देश का सबसे मजबूत और पारदर्शी ‘लोकायुक्त विधेयक’ राज्य विधानसभा से पारित कराया, जिसके दायरे में मुख्यमंत्री और मंत्रियों को भी लाया गया था। इस कदम की देश भर में सराहना हुई। उनके कार्यकाल में सरकारी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए परीक्षार्थियों को उत्तर पुस्तिकाओं की कार्बन कॉपी साथ ले जाने की अनुमति जैसी व्यवस्थाएं शुरू की गईं।एक अमिट विरासतमेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी का जाना न केवल उत्तराखंड बल्कि संपूर्ण राष्ट्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है। राजनीति में शुचिता, सादगी और कड़े नीतिगत फैसलों के लिए उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी बेटी ऋतु खंडूरी वर्तमान में उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उनकी इस गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। जनरल खंडूड़ी का अनुशासित और बेदाग जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव एक प्रेरणास्रोत बना रहेगा। 2011 में पार्टी ने फिर उन्हें मुख्यमंत्री बनाया. 2012 का विधानसभा चुनाव उनके राजनीतिक जीवन का सबसे कठिन दौर साबित हुआ. वे खुद कोटद्वार सीट से चुनाव हार गए. इसके बावजूद उनकी व्यक्तिगत छवि पर कभी बड़ा दाग नहीं लगा. राजनीति में विरोधी दलों के नेता भी उनकी ईमानदारी की तारीफ करते थे. उत्तराखंड की राजनीति में अक्सर यह कहा जाता था अगर सिस्टम में खंडूड़ी जैसे दो-चार नेता और होते तो तस्वीर अलग होती यह बात उनकी सार्वजनिक छवि को समझने के लिए काफी मानी जाती है. उत्तराखंड के चौथे मुख्यमंत्री रहे भुवन चंद्र खंडूड़ी को पूर्व प्रधानमंत्री स्व.अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति में लाए थे। ये 1990 का दौर था। खंडूड़ी सेना से रिटायर हुए थे। भुवन चंद्र खंडूड़ी की गिनती पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भरोसेमंदों में होती थी। पहली बार लोकसभा पहुंचने के दो साल के भीतर ही खंडूड़ी को पार्टी का मुख्य सचेतक बना दिया गया।1996 के लोकसभा चुनाव में खंडूड़ी को हार का सामना करना पड़ा। 1999 में अटल बिहारी सरकार में सड़क परिवहन मंत्री बनाया गया। इस दौर में देश में सड़कों की शक्ल बदलने और हाईवे बनाने का काम हुआ जिसके लिए खंडूड़ी की आज तक प्रशंसा होती है। कहा जाता है कि वाजपेयी का खंडूड़ी पर इतना भरोसा था कि उन्हें काम करने की पूरी आजादी मिली हुई थी।लोकायुक्त विधेयक को लेकर बीसी खंडूड़ी ने ऐतिहासिक कदम उठाया था. सल 2011 में बीसी खंडूड़ी ने उत्तराखंड में सबसे सख्त लोकायुक्त कानून पास करवाया. उत्तराखंड में पास इस लोकायुक्त में मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, आईएएस, आईपीएससहित सभी अधिकारी लोकायुक्त की जांच के दायरे में थे. इसमें भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई का नियम था. बीसी खंडूड़ी ने फाइल प्रोसेसिंग में तेजी, जन शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया. साथ ही उन्होंने सरकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर में पारदर्शिता लाने की कोशिशें की. इसके लिए उन्होंने कई सुधार किये.बीसी खंडूड़ी को ई-गवर्नेंस और पारदर्शी ट्रांसफर पॉलिसी के लिए जाना जाता है. बीसी खंड़ूड़ी सैनिक अधिकारी रहे. इसलिए वे भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति का पालन करते थे. इसके लिए वे सख्त राजनेता के तौर पर जाने जाते थे. वे किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करते थे. उन्होंने भ्रष्टाचार मुक्त शासन का नारा दिया. जिससे राज्य़ के साथ ही देश में उनकी अलग छवि बनी.बीसी खंडूड़ी ईमानदार छवि के नेता थे. इसलिए उन्होंने सरकारी खर्च में कटौती की. साथ ही सरकार में अनुशासन को प्राथमिकता थी. उन्होंने सीएम बनते ही नेताओ, मंत्रियों और अधिकारियों से समय का पालन करने की अपील की. साथ ही वे खुद परियोजनाओं में फंड के खर्च खे पक्षधर थे. खंडूरी जी का योगदान उत्तराखंड के विकास और सुशासन के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। वे अनुशासित, कर्मठ और दूरदर्शी नेता थे बीसी खंडूरी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्धितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सार्वजनिक जीवन में भी उन्होंने उत्तराखंड के विकास, सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई। उन्होंने प्रदेश हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लेकर विकास को नई दिशा प्रदान की। उन्हें खंडूडूी को उनके ऐतिहासिक फैसलों के लिए जाना जाता है। 2011 में जब अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन चरम पर था, तब जनरल खंडूड़ी ने उत्तराखंड में देश का सबसे सख्त लोकायुक्त बिल पेश किया। इसमें मुख्यमंत्री को भी जांच के दायरे में रखा गया था। उनकी सादगी, स्पष्टवादिता और कार्यकुशलता सदैव प्रेरणास्रोत रहेगी।जिनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी। उन्होंने राजनीति में स्वच्छता, पारदर्शिता और अनुशासन को प्राथमिकता दी। आज उत्तराखंड के लोग नम आंखों से उनको विदाई दे रहे हैं और उनके योगदान को हमेशा याद रखेंगे। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी के निधन से आज पूरे प्रदेश में शोक की लहर है।।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











