• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

कैंची धाम में खतरे की घंटी जाम नहीं ये है सबसे बड़ी आफत

10/10/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
1
SHARES
1
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

 

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
नैनीताल के प्रसिद्ध कैंची धाम में श्रद्धालुओं के लिए अब पंजीकरण कराने का सिस्टम तैयार किया जा रहा है। धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और जाम की समस्या के समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर पहल शुरू हो गई है।कुमाऊं आयुक्त ने अधिकारियों और पर्यटन कारोबारियों के साथ बैठक कर धाम में प्री-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था शुरू करने पर चर्चा की। उन्होंने डीएम और एसएसपी को इस संबंध में तत्काल शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। नैनीताल के प्रसिद्ध कैंची धाम में श्रद्धालुओं के लिए अब पंजीकरण कराने का सिस्टम तैयार किया जा रहा है। धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और जाम की समस्या के समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर पहल शुरू हो गई है।कैंची धाम मंदिर में प्रतिदिन 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं को प्रवेश देने की सीमा निर्धारित की जा सकती है। मंदिर में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग द्वार की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। चारधाम यात्रा की तर्ज पर एक ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया जाएगा। श्रद्धालु पोर्टल और संबंधित मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण करा सकेंगे।कैंची धाम में श्रद्धालुओं का दबाव बढ़ता जा रहा है। हनुमान अंश मूवी के बाद कैंची धाम में ज्यादा श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। जिससे घंटों जाम की स्थिति बन रही है। बीते दिनों में हालात ज्यादा खराब हुए हैं।बैठक में होटल और होमस्टे की ओर से मनमाना किराया वसूलने, दुकानों व रेस्टोरेंटों में प्रसाद और सामान महंगा बेचने, टैक्सी व दुपहिया वाहनों से जाम लगने तथा मंदिर के नाम पर फर्जी वेबसाइट बनाकर ठगी करने मुद्दे उठे। कुमाऊं आयुक्त ने क्षेत्र में संचालित हो रहे होटल व होमस्टे का नियमित निरीक्षण करने, रेस्टोरेंट में रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से लगवाने और वीकेंड पर प्रशासन व पुलिस की संयुक्त टीमों की ओर से निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।आयुक्त ने पर्यटन विभाग को निर्देश दिया कि रेस्टोरेंटों में रेट लिस्ट लगवाना अनिवार्य किया जाए और उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही होटल व होमस्टे का औचक निरीक्षण करने के आदेश दिए। उन्होंने अवैध रूप से किराये पर चल रहे दोपहिया व टैक्सी वाहनों पर कार्रवाई करने को कहा। 2024 में कैंची धाम स्थापना दिवस से पहले पुलिस-प्रशासन ने सिर्फ डायवर्जन का नक्शा जारी नहीं किया था, बल्कि 14 पार्किंग स्थल चिह्नित किए थे। भवाली, भीमताल और खैरना से श्रद्धालुओं को शटल से कैंची धाम पहुंचाने की व्यवस्था बनाई गई थी। पुलिस ने यह भी माना था कि कैंची धाम में सीमित पार्किंग क्षमता के कारण हर वाहन को सीधे मंदिर क्षेत्र तक जाने देना संभव नहीं है। इसलिए प्रवेश बिंदुओं पर वाहनों को रोकने की रणनीति बनाई गई थी। इसी प्लान में हल्द्वानी और पहाड़ के बीच यातायात को अलग-अलग कॉरिडोर में बांटते हुए क्वारब, रामगढ़, खुटानी, धानाचूली और भीमताल जैसे वैकल्पिक मार्ग तय किए गए थे। यानी सोच साफ थी जाम लगने के बाद उसे खोलने के बजाय जाम बनने से पहले ट्रैफिक का दबाव बांटा जाए। 2025 में इसी व्यवस्था को और विस्तार दिया गया। कैंची धाम के लिए 500 से अधिक शटल वाहनों की व्यवस्था की गई। हल्द्वानी-काठगोदाम, भीमताल, भवाली और नैनीताल से अलग-अलग शटल कॉरिडोर बनाए गए। बाहरी दोपहिया वाहनों को काठगोदाम और कालाढूंगी में रोकने तक का निर्णय लिया गया। यानी पिछले साल पुलिस ने यह मानकर तैयारी की थी कि हर वाहन को पहाड़ पर भेजना समाधान नहीं, बल्कि समस्या बढ़ाने वाला कदम हो सकता है। इसी दौरान कैंची धाम की यातायात व्यवस्था के लिए आईआईएम की स्टडी टीम के सहयोग से समग्र ट्रैफिक प्लान तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी। इसमें तत्कालीन सीओ हल्द्वानी समेत पुलिस और प्रशासन के अधिकारी शामिल थे। यही सबसे बड़ा सवाल है। समस्या केवल यह नहीं थी कि सड़क पर वाहन ज्यादा हो गए। असली सवाल यह है कि क्या संभावित वाहन संख्या और पहाड़ी सड़कों की वास्तविक क्षमता का पहले से मिलान किया गया था। अगर एक दिन में 35 हजार से अधिक वाहनों के पहुंचने के बाद छह घंटे के लिए पहाड़ की ओर यातायात रोकना पड़े, तो इनफ्लो और आउटफ्लो का संतुलन चुनौती बन गया था। अगले दिन पुलिस ने इसी को साधने के लिए पहाड़ से लौटने वाले वाहनों को प्राथमिकता दी। 2024 और 2025 की तैयारियां सवाल खड़े करती हैं। तब पार्किंग क्षमता, शटल संख्या, वैकल्पिक कॉरिडोर और बाहरी वाहनों की रोक जैसे उपायों पर पहले से काम हुआ था। आईआईएम की मदद से समग्र ट्रैफिक प्लान बनाने की पहल भी हुई थी। तो फिर इस बार लंबे वीकेंड से पहले प्रति घंटे पहाड़ पर भेजे जा सकने वाले वाहनों की सीमा, पार्किंग की वास्तविक क्षमता, शटल की जरूरत और प्रवेश बिंदुओं पर चरणबद्ध रोक का स्पष्ट गणित क्यों नहीं सामने आया। ऐसे में 2026 के लिए उसी अनुभव को जोड़कर पहले से वाहन सीमा तय करना, प्रवेश बिंदुओं पर फिल्टरिंग करना और पार्किंग-शटल क्षमता के हिसाब से वाहनों को पहाड़ पर भेजना ज्यादा प्रभावी तैयारी हो सकती थी। क्योंकि ट्रैफिक प्लान सिर्फ रूट का नक्शा नहीं होता। वह भीड़ का गणित होता है। नीम करोली बाबा के प्रसिद्ध कैंची धाम में आने वाले श्रद्धालुओं को भले ही लंबे ट्रैफिक जाम से थोड़ी राहत मिल गई हो, लेकिन वहां लगातार बढ़ रही भारी भीड़ अब एक बड़े खतरे की ओर इशारा कर रही है. ‘हनुमान अंश’ फिल्म की सफलता के बाद यहां दर्शन करने वालों की संख्या में अभूतपूर्व उछाल आया है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स द्वारा किए गए शोध के नतीजे बताते हैं कि पहाड़ों पर उनकी क्षमता से कई गुना अधिक दबाव पड़ रहा है. वीकेंड्स पर बेकाबू होती भीड़ और सड़कों पर दौड़ते हजारों वाहन न केवल ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त कर रहे हैं, बल्कि इस नाजुक पहाड़ी इलाके के पर्यावरण और बुनियादी ढांचे को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं. फिल्म ‘हनुमान अंश’ के सुपरहिट होने के बाद बाबा नीम करोली के पावन धाम में भक्तों का तांता लगा हुआ है. खासकर शनिवार और रविवार को स्थिति यह हो जाती है कि मंदिर प्रांगण से लेकर मुख्य मार्ग तक पैर रखने की जगह नहीं बचती है. बीते वीकेंड पर दिल्ली-एनसीआर और देश के अन्य हिस्सों से आने वाले लोग घंटों भीषण जाम में फंसे रहे. इस अफरा-तफरी का खामियाजा अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ की तरफ जाने वाले आम यात्रियों को भी भुगतना पड़ा. हालांकि उत्तराखंड पुलिस ने पूरी ताकत लगाकर यातायात को सामान्य किया, लेकिन भीड़ का यह दबाव स्थायी समस्या बनता जा रहा है. कैरिंग कैपेसिटी का साधारण भाषा में मतलब उस क्षमता से है, जिसे कोई भी क्षेत्र वहां के प्राकृतिक संतुलन को नुकसान पहुंचाए बिना संभाल सकता है. इसमें पीने के पानी की उपलब्धता, सीवेज सिस्टम, कचरा निस्तारण, पार्किंग और सड़कों की चौड़ाई जैसे कारक शामिल होते हैं. यदि किसी पहाड़ी शहर का बुनियादी ढांचा 10 हजार लोगों के हिसाब से तैयार किया गया है और वहां अचानक 20 हजार से ज्यादा पर्यटक पहुंच जाएं, तो वहां की पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है. यही असंतुलन आगे चलकर प्राकृतिक आपदाओं और संसाधनों की किल्लत का मुख्य कारण बनता है. इतनी विशाल संख्या में वाहनों की आवाजाही से न केवल जहरीला धुआं और प्रदूषण बढ़ रहा है, बल्कि पहाड़ी सड़कों की ढलान और मजबूती पर भी अत्यधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

ShareSendTweet
Previous Post

विलुप्ति की कगार पर हिमालयन जटामांसी

Next Post

चंपावत के राहुल नरियाल ने अपने नवाचार तकनीकी और मेहनत से बनाया

Related Posts

उत्तराखंड

चंपावत के राहुल नरियाल ने अपने नवाचार तकनीकी और मेहनत से बनाया

October 10, 2026
3
उत्तराखंड

विलुप्ति की कगार पर हिमालयन जटामांसी

October 10, 2026
1
उत्तराखंड

डोईवाला: स्वच्छता और बेहतर यात्री सेवाओं के संकल्प के साथ यात्री सेवा अभियान संपन्न

October 10, 2026
3
उत्तराखंड

विकसित भारत @2047 के संकल्प को साकार करने में युवाओं की भूमिका अहम’

October 10, 2026
5
उत्तराखंड

जनसमस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें अधिकारी, लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें : मुख्यमंत्री

October 10, 2026
5
उत्तराखंड

बेमौसम बारिश से किसानों को भारी नुक़सान की आशंका

October 10, 2026
3

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67751 shares
    Share 27100 Tweet 16938
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45794 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38079 shares
    Share 15232 Tweet 9520
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37459 shares
    Share 14984 Tweet 9365
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37382 shares
    Share 14953 Tweet 9346

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

चंपावत के राहुल नरियाल ने अपने नवाचार तकनीकी और मेहनत से बनाया

October 10, 2026

कैंची धाम में खतरे की घंटी जाम नहीं ये है सबसे बड़ी आफत

October 10, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.