डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
नैनीताल के प्रसिद्ध कैंची धाम में श्रद्धालुओं के लिए अब पंजीकरण कराने का सिस्टम तैयार किया जा रहा है। धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और जाम की समस्या के समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर पहल शुरू हो गई है।कुमाऊं आयुक्त ने अधिकारियों और पर्यटन कारोबारियों के साथ बैठक कर धाम में प्री-रजिस्ट्रेशन व्यवस्था शुरू करने पर चर्चा की। उन्होंने डीएम और एसएसपी को इस संबंध में तत्काल शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। नैनीताल के प्रसिद्ध कैंची धाम में श्रद्धालुओं के लिए अब पंजीकरण कराने का सिस्टम तैयार किया जा रहा है। धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और जाम की समस्या के समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर पहल शुरू हो गई है।कैंची धाम मंदिर में प्रतिदिन 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं को प्रवेश देने की सीमा निर्धारित की जा सकती है। मंदिर में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग द्वार की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। चारधाम यात्रा की तर्ज पर एक ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया जाएगा। श्रद्धालु पोर्टल और संबंधित मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण करा सकेंगे।कैंची धाम में श्रद्धालुओं का दबाव बढ़ता जा रहा है। हनुमान अंश मूवी के बाद कैंची धाम में ज्यादा श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। जिससे घंटों जाम की स्थिति बन रही है। बीते दिनों में हालात ज्यादा खराब हुए हैं।बैठक में होटल और होमस्टे की ओर से मनमाना किराया वसूलने, दुकानों व रेस्टोरेंटों में प्रसाद और सामान महंगा बेचने, टैक्सी व दुपहिया वाहनों से जाम लगने तथा मंदिर के नाम पर फर्जी वेबसाइट बनाकर ठगी करने मुद्दे उठे। कुमाऊं आयुक्त ने क्षेत्र में संचालित हो रहे होटल व होमस्टे का नियमित निरीक्षण करने, रेस्टोरेंट में रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से लगवाने और वीकेंड पर प्रशासन व पुलिस की संयुक्त टीमों की ओर से निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।आयुक्त ने पर्यटन विभाग को निर्देश दिया कि रेस्टोरेंटों में रेट लिस्ट लगवाना अनिवार्य किया जाए और उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही होटल व होमस्टे का औचक निरीक्षण करने के आदेश दिए। उन्होंने अवैध रूप से किराये पर चल रहे दोपहिया व टैक्सी वाहनों पर कार्रवाई करने को कहा। 2024 में कैंची धाम स्थापना दिवस से पहले पुलिस-प्रशासन ने सिर्फ डायवर्जन का नक्शा जारी नहीं किया था, बल्कि 14 पार्किंग स्थल चिह्नित किए थे। भवाली, भीमताल और खैरना से श्रद्धालुओं को शटल से कैंची धाम पहुंचाने की व्यवस्था बनाई गई थी। पुलिस ने यह भी माना था कि कैंची धाम में सीमित पार्किंग क्षमता के कारण हर वाहन को सीधे मंदिर क्षेत्र तक जाने देना संभव नहीं है। इसलिए प्रवेश बिंदुओं पर वाहनों को रोकने की रणनीति बनाई गई थी। इसी प्लान में हल्द्वानी और पहाड़ के बीच यातायात को अलग-अलग कॉरिडोर में बांटते हुए क्वारब, रामगढ़, खुटानी, धानाचूली और भीमताल जैसे वैकल्पिक मार्ग तय किए गए थे। यानी सोच साफ थी जाम लगने के बाद उसे खोलने के बजाय जाम बनने से पहले ट्रैफिक का दबाव बांटा जाए। 2025 में इसी व्यवस्था को और विस्तार दिया गया। कैंची धाम के लिए 500 से अधिक शटल वाहनों की व्यवस्था की गई। हल्द्वानी-काठगोदाम, भीमताल, भवाली और नैनीताल से अलग-अलग शटल कॉरिडोर बनाए गए। बाहरी दोपहिया वाहनों को काठगोदाम और कालाढूंगी में रोकने तक का निर्णय लिया गया। यानी पिछले साल पुलिस ने यह मानकर तैयारी की थी कि हर वाहन को पहाड़ पर भेजना समाधान नहीं, बल्कि समस्या बढ़ाने वाला कदम हो सकता है। इसी दौरान कैंची धाम की यातायात व्यवस्था के लिए आईआईएम की स्टडी टीम के सहयोग से समग्र ट्रैफिक प्लान तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी। इसमें तत्कालीन सीओ हल्द्वानी समेत पुलिस और प्रशासन के अधिकारी शामिल थे। यही सबसे बड़ा सवाल है। समस्या केवल यह नहीं थी कि सड़क पर वाहन ज्यादा हो गए। असली सवाल यह है कि क्या संभावित वाहन संख्या और पहाड़ी सड़कों की वास्तविक क्षमता का पहले से मिलान किया गया था। अगर एक दिन में 35 हजार से अधिक वाहनों के पहुंचने के बाद छह घंटे के लिए पहाड़ की ओर यातायात रोकना पड़े, तो इनफ्लो और आउटफ्लो का संतुलन चुनौती बन गया था। अगले दिन पुलिस ने इसी को साधने के लिए पहाड़ से लौटने वाले वाहनों को प्राथमिकता दी। 2024 और 2025 की तैयारियां सवाल खड़े करती हैं। तब पार्किंग क्षमता, शटल संख्या, वैकल्पिक कॉरिडोर और बाहरी वाहनों की रोक जैसे उपायों पर पहले से काम हुआ था। आईआईएम की मदद से समग्र ट्रैफिक प्लान बनाने की पहल भी हुई थी। तो फिर इस बार लंबे वीकेंड से पहले प्रति घंटे पहाड़ पर भेजे जा सकने वाले वाहनों की सीमा, पार्किंग की वास्तविक क्षमता, शटल की जरूरत और प्रवेश बिंदुओं पर चरणबद्ध रोक का स्पष्ट गणित क्यों नहीं सामने आया। ऐसे में 2026 के लिए उसी अनुभव को जोड़कर पहले से वाहन सीमा तय करना, प्रवेश बिंदुओं पर फिल्टरिंग करना और पार्किंग-शटल क्षमता के हिसाब से वाहनों को पहाड़ पर भेजना ज्यादा प्रभावी तैयारी हो सकती थी। क्योंकि ट्रैफिक प्लान सिर्फ रूट का नक्शा नहीं होता। वह भीड़ का गणित होता है। नीम करोली बाबा के प्रसिद्ध कैंची धाम में आने वाले श्रद्धालुओं को भले ही लंबे ट्रैफिक जाम से थोड़ी राहत मिल गई हो, लेकिन वहां लगातार बढ़ रही भारी भीड़ अब एक बड़े खतरे की ओर इशारा कर रही है. ‘हनुमान अंश’ फिल्म की सफलता के बाद यहां दर्शन करने वालों की संख्या में अभूतपूर्व उछाल आया है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स द्वारा किए गए शोध के नतीजे बताते हैं कि पहाड़ों पर उनकी क्षमता से कई गुना अधिक दबाव पड़ रहा है. वीकेंड्स पर बेकाबू होती भीड़ और सड़कों पर दौड़ते हजारों वाहन न केवल ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त कर रहे हैं, बल्कि इस नाजुक पहाड़ी इलाके के पर्यावरण और बुनियादी ढांचे को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं. फिल्म ‘हनुमान अंश’ के सुपरहिट होने के बाद बाबा नीम करोली के पावन धाम में भक्तों का तांता लगा हुआ है. खासकर शनिवार और रविवार को स्थिति यह हो जाती है कि मंदिर प्रांगण से लेकर मुख्य मार्ग तक पैर रखने की जगह नहीं बचती है. बीते वीकेंड पर दिल्ली-एनसीआर और देश के अन्य हिस्सों से आने वाले लोग घंटों भीषण जाम में फंसे रहे. इस अफरा-तफरी का खामियाजा अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ की तरफ जाने वाले आम यात्रियों को भी भुगतना पड़ा. हालांकि उत्तराखंड पुलिस ने पूरी ताकत लगाकर यातायात को सामान्य किया, लेकिन भीड़ का यह दबाव स्थायी समस्या बनता जा रहा है. कैरिंग कैपेसिटी का साधारण भाषा में मतलब उस क्षमता से है, जिसे कोई भी क्षेत्र वहां के प्राकृतिक संतुलन को नुकसान पहुंचाए बिना संभाल सकता है. इसमें पीने के पानी की उपलब्धता, सीवेज सिस्टम, कचरा निस्तारण, पार्किंग और सड़कों की चौड़ाई जैसे कारक शामिल होते हैं. यदि किसी पहाड़ी शहर का बुनियादी ढांचा 10 हजार लोगों के हिसाब से तैयार किया गया है और वहां अचानक 20 हजार से ज्यादा पर्यटक पहुंच जाएं, तो वहां की पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है. यही असंतुलन आगे चलकर प्राकृतिक आपदाओं और संसाधनों की किल्लत का मुख्य कारण बनता है. इतनी विशाल संख्या में वाहनों की आवाजाही से न केवल जहरीला धुआं और प्रदूषण बढ़ रहा है, बल्कि पहाड़ी सड़कों की ढलान और मजबूती पर भी अत्यधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.














