डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
पहाड़ के युवाओं में प्रतिभा और तकनीकी सोच की कोई कमी नहीं है। इसका उदाहरण चम्पावत के मादली निवासी 20 वर्षीय राहुल नरियाल ने पेश किया है। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे राहुल ने करीब एक महीने की मेहनत और लगभग 40 हजार रुपये की लागत से ऐसा सोलर वाहन तैयार किया है, जिसे वह पेट्रोल के बजाय मुख्य रूप से सौर ऊर्जा से चलाने का दावा करते हैं। राहुल के इस प्रयोग की इन दिनों क्षेत्र में खूब चर्चा हो रही है। उत्तराखंड के चंपावत जिले के मडली निवासी 20 वर्षीय राहुल नरियाल ने अपनी तकनीकी सूझबूझ और कड़ी मेहनत से एक अनोखी सोलर कार (सौर ऊर्जा चालित वाहन) का आविष्कार किया है. राहुल वर्तमान में चंडीगढ़ में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं राहुल ने अपनी स्कूली शिक्षा चम्पावत के यूनिवर्सल स्कूल से पूरी की है। उनके पिता भैरव नरियाल ठेकेदारी का काम करते हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। कम उम्र में अपने स्तर पर तैयार किया गया यह वाहन राहुल की तकनीकी रुचि, प्रयोगधर्मिता और कुछ नया करने की सोच को सामने लाता है। अब उनकी नजर 5 सीटर सोलर कार के अगले प्रोजेक्ट पर है सड़क पर जब राहुल अपने बनाए वाहन को लेकर निकलते हैं तो लोग रुककर उसे देखने लगते हैं। कई लोग वाहन की तस्वीरें और वीडियो भी बना रहे हैं। राहुल के मुताबिक पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और भविष्य में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की जरूरत को देखते हुए उनके मन में ऐसा वाहन तैयार करने का विचार आया, जो पेट्रोल पर निर्भर न हो। इसी सोच को उन्होंने प्रयोग का रूप दिया और करीब एक महीने में वाहन का प्रोटोटाइप तैयार कर लिया। राहुल ने बताया कि प्रोजेक्ट पर करीब 40 हजार रुपये खर्च हुए। इसके लिए उन्होंने कुछ समय तक अपने व्यक्तिगत खर्च के लिए मिलने वाले पैसों में से बचत की और उसी रकम से वाहन के लिए आवश्यक सामान खरीदा। वाहन में सोलर प्लेट, बैटरी समेत कार में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न उपकरण लगाए गए हैं। राहुल के अनुसार वाहन का प्रमुख ऊर्जा स्रोत सूर्य से मिलने वाली सौर ऊर्जा है। हालांकि पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम हमेशा अनुकूल नहीं रहता, इसलिए उन्होंने वाहन में सामान्य बिजली से बैटरी चार्ज करने की सुविधा भी रखी है। धूप कम होने अथवा लंबे समय तक मौसम खराब रहने पर बैटरी को बिजली से चार्ज किया जा सकता है।राहुल का दावा है कि उनके तैयार किए गए वाहन की अधिकतम गति करीब 65 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा है। वाहन में दो बैटरियां लगाई गई हैं। उनके मुताबिक एक बैटरी से करीब 75 किलोमीटर तक सफर किया जा सकता है, जबकि दोनों बैटरियों के इस्तेमाल से कुल दूरी करीब 150 किलोमीटर तक पहुंच सकती है। राहुल अब तक वाहन को करीब 90 किलोमीटर चला चुके हैं और कॉलेज आने-जाने में भी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। राहुल फिलहाल चंडीगढ़ में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं। इलेक्ट्रिकल क्षेत्र की जानकारी ने उन्हें वाहन के ऊर्जा और बैटरी सिस्टम को समझने में मदद की, लेकिन वाहन के मैकेनिकल हिस्से पर काम करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा। राहुल के अनुसार मैकेनिकल से जुड़े कुछ कामों में उन्हें परेशानी आई। इस दौरान उनके एक सीनियर ने जरूरी तकनीकी चीजों को समझने में मदद की, जिसके बाद वह प्रोजेक्ट को पूरा कर सके।राहुल बताते हैं कि शुरुआत में उनके इस आइडिया को कॉलेज के कुछ छात्रों और परिवार के लोगों ने गंभीरता से नहीं लिया। शुरुआती दौर में परिवार की नाराजगी भी सामने आई, लेकिन जब वाहन तैयार होकर सड़क पर चलने लगा तो लोगों का नजरिया बदल गया। अब परिवार और आसपास के लोग राहुल के प्रयास से खुश हैं। उनका असली सपना एक 5-सीटर सोलर कार बनाना है, जो पहाड़ी क्षेत्रों के लिए सस्ती, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल हो। राहुल नरियाल के इस प्रयोग की शुरुआत आसान नहीं रही। जब उन्होंने इस आइडिया पर काम शुरू किया तो कॉलेज के कुछ छात्रों और परिवार के लोगों ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया। शुरुआती दौर में परिवार की ओर से नाराजगी भी देखने को मिली। लेकिन जैसे-जैसे वाहन तैयार हुआ और सड़क पर सफलतापूर्वक चलने लगा, लोगों की सोच भी बदल गई। राहुल का कहना है कि मौजूदा वाहन उन्होंने मुख्य रूप से टेस्टिंग और प्रयोग के उद्देश्य से तैयार किया था और शुरुआती परीक्षण सफल रहा है। अब वह इससे आगे बढ़कर एक 5 सीटर सोलर कार बनाने की योजना पर काम करना चाहते हैं। हालांकि इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए मौजूदा प्रयोग की तुलना में काफी अधिक बजट की जरूरत होगी। राहुल को उम्मीद है कि अगर कॉलेज, किसी संस्था या अन्य स्तर से आर्थिक सहयोग मिलता है तो वह अपने इस सपने को अगले चरण तक ले जा सकेंगे अब परिवार और आसपास के लोग राहुल के इस प्रयास से खुश हैं। सड़क पर निकलने के दौरान राहगीरों की उत्सुकता भी उनके प्रयोग की लोकप्रियता को दिखाती है।पहाड़ के इस युवा इंजीनियर की इस उपलब्धि से पूरे चंपावत जिले में खुशी की लहर है। ऐसे हुनरमंद युवाओं को अगर सरकार और समाज से सही प्रोत्साहन मिले, तो उत्तराखंड से कई बड़े आविष्कार निकल सकते हैं।पहाड़ की इस प्रतिभा को दिल से सलाम! राहुल को उम्मीद है कि कॉलेज, किसी संस्था या अन्य स्तर से आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग मिलने पर वह अपने इस प्रोजेक्ट को अगले स्तर तक ले जा सकेंगे।2047 के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में कैसे देश के हर एक नागरिक के जीवन को जोड़ा जा सकता है।।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.














