डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल अल्मोड़ा मार्ग पर भवाली से करीब 9 किलोमीटर की दूरी पर शिप्रा नदी के किनारे स्थित आध्यात्मिक स्थल है. बाबा नीब करौरी महाराज का इस स्थान से गहरा जुड़ाव रहा है. देश विदेश की कई चर्चित हस्तियों के कैंची धाम पहुंचने के बाद पिछले कुछ वर्षों में इसकी चर्चा लगातार बढ़ी है. अब फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने इस चर्चा में एक नया अध्याय जोड़ दिया हैउत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित बाबा नीम करौली (नीब करौरी) और कैंची धाम की ख्याति विश्व प्रसिद्ध है. एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स, फेसबुक/मेटा के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग समेत कई देसी और विदेशी हस्तियां कैंची धाम के दर्शन कर चुके हैं. कैंची धाम, हनुमानगढ़ी, भूमियाधार और काकड़ीघाट ये चारों धाम बाबा नीम करौली महाराज की साधना भूमि माने जाते हैं. हर धाम का अपना महत्त्व है. श्रद्धालु मानते हैं कि इन चारों स्थलों की यात्रा करने से जीवन में सकारात्मकता, सफलता और शांति आती है. कहा जाता है कि जिस पर बाबा की कृपा बरसे, उसका जीवन प्रकाश से भर जाता है. हर साल लाखों लोग कैंची धामी में बाबा नीब करौरी के दर्शन के लिए आते हैं. मान्यता है कि बाबा नीब करौरी को उनके भक्त हनुमान जी का अवतार मानते हैं और उन्हें चमत्कारिक सिद्धियों व असीम करुणा वाले संत के रूप में पूजते हैं. लेकिन इन दिनों फिल्म ‘हनुमान अंश’ के कारण बाबा नीब करौरी और कैंची धाम की चर्चा देशभर में हो रही है. इसने लोगों की जिज्ञासा को और भी बढ़ा दिया है.हाल ही में रिलीज हुई कैंची धाम वाले बाबा नीब करौरी (बाबा नीम करौली) के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने देश दुनिया में सुर्खियां बटोरी है. विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी 2 करोड़ की लागत वाली फिल्म वर्ल्ड वाइड 408 करोड़ रुपए का कारोबार कर चुकी है. फिल्म देखने के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु और पर्यटक कैंची धाम पहुंच रहे हैं. कई लोगों के लिए यह सिर्फ किसी धार्मिक स्थल की यात्रा नहीं, बल्कि उस स्थान को करीब से महसूस करने की कोशिश है, जिस कहानी को उन्होंने फिल्म के जरिए जाना है. यही वजह है कि फिल्म के बाद कैंची धाम में आने वाले लोगों की आवाजाही को लेकर स्थानीय स्तर पर भी बदलाव महसूस किया जा रहा है. इन दिनों पहले के मुताबिक अब भीड़ बेहद अधिक होने लगी है. फिल्म के रिलीज होने के बाद कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हुआ है. जहां पहले 4 से 5 हजार श्रद्धालु हर दिन बाबा के दर्शन के लिए धाम पहुंचते थे, वहीं अब रोजाना लगभग 6 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जो कि पहाड़ की क्षमता के लिहाज के काफी अधिक है. खास बात है कि ये आंकड़ा वीकेंड पर 15 से 20 हजार के करीब पहुंच जाता है. कैंची धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा केवल मंदिर तक सीमित नहीं रही है. बड़ी संख्या में लोग दर्शन के बाद नैनीताल, भीमताल और आसपास के पर्यटन स्थलों की ओर भी जा रहे हैं. इसका सीधा असर स्थानीय पर्यटन और कारोबार की गतिविधियों पर दिखाई देता है. नैनीताल में होटल एसोसिएशन से जुड़े कमल बताते हैं कि,नैनी झील, मॉल रोड और आसपास के पर्यटन स्थलों पर भी पर्यटकों की आवाजाही बढ़ रही है. बाबा नीब करौरी महाराज से जुड़े प्रसंगों और फिल्म के बाद लोगों में कैंची धाम को लेकर रुचि बढ़ी है. कई पर्यटक पहले कैंची धाम पहुंचते हैं और इसके बाद नैनीताल आकर नैनी झील में नौकायन करते हैं. यानी धार्मिक आस्था से शुरू हो रही यह यात्रा पर्यटन की पूरी श्रृंखला को जोड़ रही है.बाबा नींब करौरी आश्रम कैंची धाम में हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने से सुबह से ही यातायात व्यवस्था भी ध्वस्त हो गई। हाईवे पर आवाजाही करने वाले यात्रियों व पर्यटकों को तमाम परेशानियों से जूझना पड़ा।नैनीताल व अल्मोड़ा जनपद की सीमा पर मालवाहक वाहनों के साथ ही यात्री व पर्यटक वाहन तथा बाईक सवारों को भी रोक लिया गया।अव्यवस्था से परेशान लोगों ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। आपा खोई एक महिला ने पुलिस को खूब खरी भी सुनाई। यातायात व्यवस्था के धराशाही होने से लोग घंटों तक भूखे प्यासे वाहनों में कैद रहे। हाईवे पर आवाजाही करने वाले लोग जिम्मेदारों को कोसते रहे। सुबह से ही जाम की स्थिति वाहनों के पहिए थमे रहे। कई किलोमीटर तक वाहनों की कतार लगी रहे। वाहनों के अंदर भूखे प्यासे बैठे यात्रियों को काफी परेशानियों से जूझना पड़ा।कई लोगों ने आधे रास्ते से ही वापस लौटने में भलाई समझी। अव्यवस्था से परेशान लोगों ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। पहाड़ से हल्द्वानी की ओर रवाना हुईं महिला ने खैरना क्षेत्र में रोक लिए जाने से पुलिस को आड़े हाथ लिया। आरोप लगाया की बुजुर्ग व बच्चे वाहनों में बैठे हुए हैं पर जिम्मेदारों को कुछ लेना देना नहीं है। लोगों के समझाने के बाद बामुश्किल महिला शांत हुई। जाम से परेशान लोगों ने यातायात व्यवस्था के धराशाही होने को पुलिस प्रशासन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहरा गहरी नाराजगी जताई।इधर कई वाहनों के सैनिटोरियम से रातीघाट होते हुए आवाजाही करने से दुर्घटना का खतरा बढ़ गया। यात्री व पर्यटक जान जोखिम में डाल आवाजाही को मजबूर रहे। पंजीकृत होटलों के रेट पर्यटन विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज होते हैं और निर्धारित दरों से अधिक वसूली की स्थिति में कार्रवाई होनी चाहिए. कुछ लोग घरों में कमरे लगाकर मनमाने दाम वसूलते हैं, जिससे पर्यटकों को परेशानी होने के साथ नैनीताल की छवि भी प्रभावित होती है. लॉन्ग वीकेंड के बीच नैनीताल में बढ़ी पर्यटकों की संख्या ने जहां पर्यटन कारोबार को रफ्तार दी है. ट्रैफिक, पार्किंग, होटल उपलब्धता और कमरे के किराए से जुड़ी शिकायतों ने व्यवस्थाओं पर सवाल भी खड़े किए हैं. लगातार बढ़ती आवाजाही को देखते हुए यातायात, पार्किंग, श्रद्धालुओं की आवाजाही और भीड़ प्रबंधन पर पहले से अधिक ध्यान देना पड़ रहा है. कैंची धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने का असर आसपास की सड़कों पर भी पड़ता है. खासकर पर्यटन सीजन और छुट्टियों के दौरान नैनीताल-कैंची धाम मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है. ऐसे में आने वाले समय में केवल श्रद्धालुओं की सुविधा ही नहीं, बल्कि सड़क, पार्किंग, यातायात प्रबंधन और सुरक्षित आवागमन को लेकर भी स्थायी व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है. कैंची धाम की बढ़ती आस्था और लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2026 में सितंबर माह यानी 9 महीने में करीब 50 लाख श्रद्धालुओं ने कैंची धाम के दर्शन कर लिए हैं. इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही ने कैंची धाम को सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के बड़े धार्मिक-पर्यटन स्थलों में शामिल कर दिया है. यही वजह है कि अब सरकार के सामने चुनौती केवल श्रद्धालुओं को धाम तक पहुंचाने की ही नहीं, बल्कि बढ़ती भीड़ के अनुरूप पूरे क्षेत्र के परिवहन और पर्यटन ढांचे को तैयार करने की भी है. आवाजाही को रत्ती भर जगह न होने से कई बार व्यवस्था ध्वस्त हो गई। सुबह के समय पहली बार हजारों भक्तों के पहुंचने से कई बार अफरातफरी जैसी व्यवस्था भी पैदा हो गई। गनीमत रही की मंदिर प्रबंधन व व्यवस्थाओं में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने बामुश्किल व्यवस्था संभाली। 28 हजार से भी अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा के दर पर माथा ठेका। पुलिस तथा प्रशासन की ओर से कोई भी ठोस व्यवस्था न बनाए जाने पर श्रद्धालुओं ने गहरी नाराजगी जताई। विभिन्न संगठन से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि जब प्रत्येक वीकेंड पर हालत बिगड़ रहे हैं तो पूर्व से ही व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद किए जाने के लिए ठोस रणनीति तैयार की जानी चाहिए। कैंची धाम में बाबा नीब करौली महाराज के दर्शन के लिए उमड़ रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से पहाड़ की यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। इससे नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर और रानीखेत जाने वाले स्थानीय निवासियों व पर्यटकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस गंभीर स्थिति पर मां नैना देवी नैनीताल व्यापार मंडल के संस्थापक अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा। उन्होंने कहा कि यह स्थानीय पुलिस या प्रशासन की गलती नहीं, बल्कि सरकार के स्तर पर ठोस नीति की कमी है। बताया कि लगातार भीड़ के बढ़ने पर सुबह चार बजे से रात 10 बजे तक पहाड़ का ट्रैफिक रोकना व्यावहारिक समाधान नहीं है। उन्होंने मांग की कि सड़क मार्ग पर दबाव कम करने के लिए वंदे भारत ट्रेनों का विस्तार हो और पंतनगर एयरपोर्ट को विकसित किया जाए। साथ ही, चारधाम की तर्ज पर सीमित पंजीकरण व्यवस्था लागू की जाए कैंची धाम के प्रति बढ़ती आस्था के बाद सरकार की ओर से सुविधाओं पर फोकस किया गया है। कैंची धाम को मानसखंड मंदिर माला मिशन में शामिल कर सुविधाओं के विस्तार का खाका खींचा गया है। इसके अलावा धाम के विकास को लेकर तमाम विकासात्मक व सुंदरीकरण कार्य प्रस्तावित है। पूरे तहसील क्षेत्र को कैंची धाम नाम दिये जाने के बाद क्षेत्र को एक खास पहचान मिली है। कैंची धाम में तमाम मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। ग्राम सभा क्षेत्र में वर्तमान में करीब 40 होटल व होम स्टे संचालित हैं। जिसमें अधिकतम एक हजार पर्यटकों के ही ठहरने की व्यवस्था है। साथ ही बस व टैक्सी वाहनों से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए सार्वजनिक शौचालय व स्नानागार तक का अभाव बना हुआ है। जिससे नदी व आसपास के जंगल में गंदगी बढ़ रही है। बाबा नीम करौली महाराज के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था लगातार नए आयाम छू रही है। फिल्म, सोशल मीडिया और देश-विदेश में बाबा के अनुयायियों के कारण कैंची धाम की पहचान और व्यापक हुई है। लेकिन श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ उनकी सुरक्षा, सुविधा और सुगम दर्शन सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है। कैंची धाम में उमड़ा जनसैलाब इस बात का संकेत है कि यह धार्मिक स्थल अब देश के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन केंद्रों में अपनी अलग पहचान बना चुका है। आने वाले समय में श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए यातायात और पार्किंग व्यवस्था को और बेहतर बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











