
देहरादून। मजदूरों का पैदल ही घरों को जाने का क्रम अभी तक नहीं थमा है। पंजीकरण के जरिये वाहन उपलब्ध कराने की सरकारी योजना नहीं दे पा रही है सभी को राहत। देहरादून में मालिक का वाहन चलाने वाले को जब मालिक ने दरकिनार कर दिया और जमा पूंजी समाप्त होने के कगार पर पहुंचते ही पत्नी के साथ मनोज पैदल ही घर को चल पड़े।
मेरठ के रहने वाले मनोज देहरादून में मालिक का वाहन चलाता है। लाकडाउन के बाद सबकुछ बंद होने के बाद पहले तो मालिक ने रहने खाने की व्यवस्था की, लेकिन पिछले दो महीने से उसे वेतन भी नहीं मिला। वेतन न मिलने तथा कोई काम नहीं होने की वजह से अब स्थिति यह आ गई है कि घर का चूल्हा भी नहीं जल पाएगा। मनोज कहते हैं कि वाहन से घर जाने के लिए पंजीकरण भी किया दो बार इस संबंध में फोन भी आया, लेकिन वाहन से घर जाने की फिलहाल कोई संभावना न देखकर दोनों पति-पत्नी पैदल ही घर को निकल पड़े।
दूधली रोड से पैदल ही घर जा रहे दंपत्ति के पास सामान भी इस तरह का है कि वे थोड़ी दूर चलने के बाद बैठकर सुस्ताने लगते हैं। इस हाल में इतनी गरमी में कैसे तीन सौ किमी दूर पहुंच पाएंगे? उनकी दशा देख मेरी पत्नी लीला देवी का दिल पसीज गया। उन्हें कुछ फल और रास्ते में नाश्ता करने के लिए धनराशि भी उन्हें दी। मजबूर मजदूरों के मुंह से देने वाले के लिए दुआ निकल पड़ी।











