• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

महाकुम्भ से संगम समागम व समन्वय का संदेश

08/02/25
in उत्तराखंड, देहरादून, संस्कृति
Reading Time: 1min read
49
SHARES
61
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
महाकुंभ में रोजाना बेतहाशा भीड़ पहुंच रही है. 144 साल बाद बने इस संयोग का फल हर कोई पाना चाहता है. दरअसल ये महाकुंभ खास है. क्योंकि 144 साल बाद ऐसा संयोग बना है. 4 अमृत स्नान हो चुके हैं और दो शेष हैं. रोजाना करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. संगम में पवित्र डुबकी लगाने वाली की संख्या 38 करोड़ से ज्यादा हो गई है दुनिया के कई देशों के भंते, लामा व बौद्ध भिक्षुओं व सनातन के धर्माचार्यों की उपस्थिति में सनातन बौद्ध एकता का संदेश दिया गया। बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघम् शरणम गच्छामि के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से बुधवार को बौद्ध भिक्षुओं ने शोभायात्रा निकाली। यात्रा का समापना जूना अखाड़े के आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि के प्रभु प्रेमी शिविर में हुआ। वहां पर बौद्ध भिक्षुओं का स्वागत किया। इस अवसर पर महाकुम्भ में तीन प्रमुख प्रस्ताव पास किया गयाा। बांग्लादेश व पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बंद हो पहला प्रस्ताव पास हुआ। दूसरा प्रस्ताव तिब्बत की स्वायत्तता को लेकर पास हुआ। वहीं तीसरा प्रस्ताव सनातन व बौद्ध की एकता को लेकर पास किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए निर्वासित तिब्बत की रक्षामंत्री गैरी डोलमाहम ने कहा कि सब लोगों के लिए ऐतिहासिक आयोजन है। यह पावन धरती पर बहुत कुछ पहली बार हो रहा है। इतिहास रचा जा रहा है। मैं एक नए इतिहास में भाग ले रही हूं। सनातन व बौद्ध धर्म के बीच जो होना चाहिए जिस तरह का प्रेम भावना नजदीकी होना चाहिए उसकी तरफ बहुत बड़ा कदम इस पावन धरती पर लिया गया है। उन्होंने कहा कि हम बुद्धिस्ट के अंदर भी महायान हैं, हीनयान हैंं, वज्रयान हैं उसके भीतर भी अलग-अलग मठ से आते हैं। इस पावन धरती पर संघ के मार्गदर्शन में हम सबको साथ लाया। एक तरफ भिक्षु एक तरफ लामा देखकर आनंद की अनुभूति हुई। महाम्याकुंभ में हम बौद्ध व सनातनी एक साथ आए हैं और कदम मिलाकर चल रहे हैं। म्यांमार से आये भदंत नाग वंशा ने कहा कि मैं पहली बार महाकुम्भ में आया हूं। हम बौद्ध व सनातन में बहुत ही समानता है। हम लोग विश्व शांति के लिए काम करते हैं। हम भारत और यहां के लोगों को खुश देखना चाहते हैं। भारत सरकार बौद्ध धर्म का काम करने में सहयोग करती है। हम लोग मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री का आभार जताते हैं। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के भदंत शीलरतन ने कहा कि हम सब एक थे, एक हैं, व एक रहेंगे। हम सब को सुखी करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। जो सनातन मार्ग पर चलता है, जो कुशल कर्मों को करता है, वह कभी दुखी नहीं रहता। भारत कभी विचलित नहीं होता। भारत ​फिर से अखण्ड होगा और जगद्गुरू भारत बनेगा। हम जिस धरती पर हैं वहां भगवान राम का जन्म हुआ है आज यहां आकर हमें गर्व महसूस हो रहा है। प्रयागराज महाकुम्भ से संगम, समागम व समन्वय का संदेश पूरी दुनिया में जाना चाहिए। कुम्भ का तीन शब्दों से संबंध है। जो भी यहां आता है, वह संगम जाकर स्नान की इच्छा रखता है। यहां गंगा, यमुना व सरस्वती मिल जाती है तो भेद दिखाई ​नहीं देता। यहां संगम के पूर्व अलग-अलग धारायें हैं। संगम का संदेश है कि यहां से आगे एक धारा चलेगी।दूसरा है समागम। देश में विविध प्रकार के मत-मतांतर के सभी श्रेष्ठ संत यहां आकर आपस में मिलकर संवाद व चर्चा करते हैं। संत एक साथ आएंगे तो सामान्य लोग भी एक सा​थ मिलकर चलेंगे। तीसरा है समन्वय। विश्व में चलना है तो सबको साथ लेकर चलना। कुम्भ शिविर में आयोजित बौद्ध समागम में कहा कि बुद्ध और ऋषियों के संदेश में एकरुपता है। इसलिए वेद और बुद्ध की धाराएँ परस्पर एकीकृत होकर महाकुम्भ को सार्थकता प्रदान करते हुए वैचारिक संगम स्थापित करेंगी। बुद्ध भारत की अवतारी सत्ता हैं, वो पूजा के संकल्पों में प्रतिपल याद किए जाते हैं। मैत्री, एकात्मता और प्रीति के लिए बौद्ध धारा का समावेश होना चाहिए।लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं लेखक वर्तमान में दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।

Share20SendTweet12
Previous Post

भाजपा के नवनिर्वाचित महापौर शैलेन्द्र सिंह रावत सहित चालीस पार्षदों ने ली पद एवं गोपनीयता की शपथ

Next Post

संवैधानिक मूल्यों को बचाये रखने में नागरिक समाज का हस्तक्षेप महत्वपूर्ण – डॉ. विपुल मुदगल

Related Posts

उत्तराखंड

देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार में ‘ध्वज वंदन समारोह आयोजित

January 18, 2026
7
उत्तराखंड

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में ‘ध्वज वंदन समारोह

January 18, 2026
5
उत्तराखंड

कोटद्वार प्रेस क्लब नई कार्यकारिणी में अजय खंतवाल अध्यक्ष व सचिव पद पर दिनेश पाल सिंह गुसाईं को सर्वसम्मति से चुना गया

January 18, 2026
17
उत्तराखंड

वीरान हैं विश्व प्रसिद्ध हिमक्रीड़ा स्थल औली

January 18, 2026
8
उत्तराखंड

बोर्ड परीक्षा की तैयारी में जुटे छात्र-छात्राएं

January 18, 2026
5
उत्तराखंड

एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

January 18, 2026
8

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67583 shares
    Share 27033 Tweet 16896
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45769 shares
    Share 18308 Tweet 11442
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38040 shares
    Share 15216 Tweet 9510
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37430 shares
    Share 14972 Tweet 9358
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37312 shares
    Share 14925 Tweet 9328

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार में ‘ध्वज वंदन समारोह आयोजित

January 18, 2026

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में ‘ध्वज वंदन समारोह

January 18, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.