• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

औषधीय गुणों से भरपूर मकोय

02/04/20
in उत्तराखंड, हेल्थ
Reading Time: 1min read
545
SHARES
681
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
मकोय प्रजाति लगभग सम्पूर्ण भारत में पायी जाने वाली वनस्पति है, जो अधिकतर आद्र और छायादार जगहों पर उगती है, इसके पौधे की अधिकतम लम्बाई 2 से 2.5 फीट तक हो सकती है। आयुर्वेद के नजरिये से देंखे तो यह दिव्य औषधि है जिसे संस्कृत में काक्माची कहते है। इसके पत्ते मिर्च के पत्ते की तरह लट्टवकार 2 से 3 इंच लम्बे और 1 से 1.5 इंच चौड़े होते है। मकोय के फुल गुच्छो में लगते है जिनकी संख्या एक गुछे में 4 से 6 तक हो सकती है, इनका रंग सफ़ेद और आकार में बिलकुल छोटे होते है। इसके फल जिसे रसभरी भी कह सकते है सवा इंच के व्यास में छोटे और गोल होते है, पकने पर ये लाल, नील या पीले रंग के हो जाते है। ये फल पकने पर मीठे हो जाते है खेतों में अनावश्यक रूप से उगने वाली मकोय, गजरा, आलू का तना डरका जैसे खरपतवार कई दवाइयों को बनाने में काम आते हैं।
आयुर्वेदिक व अंग्रेजी दवा कम्पनियों में ऐसे खरपतवारों की अच्छी मांग रहती है। खाली सीजन में क्षेत्र के कई गाँवों के लोग इन खरपतवारों को खेतों से इकठ्ठा करके बेचने का कार्य करते हैं। जिससे बिना लागत के किसानों की आमदनी हो जाती है। एक कुंतल ताज़ी मकोय से लगभग 25 किलो सूखा माल निकलता है। इस तरह लगभग रोज 300 से 400 रुपए तक काम हो जाता है। यह सीजन केवल महीने भर का होता है। महीने भर में लगभग 12 से 15 हजार रुपए की अतिरिक्त कमाई हो जाती है, जिससे परिवार का खर्च निकल जाता है। मेडिकल की दुकान चलाने वाले बताते हैं, मकोय का प्रयोग इंजाइम बनाने वाली सीरप में अधिक किया जाता है। इसके अलावा मकोय का प्रयोग लीवर गठिया, बवासीर, सूजन, दिल के रोग आंखों की बीमारी, खांसी उल्टी और कफ जैसी बीमारियों की आयुर्वेदिक व अंग्रेजी दवाइयों को बनाने में होता है। इसके साथ ही इसका साग बना कर खाने से पेट से सम्बंधित सभी बीमारियों का खात्मा हो जाता है।
काली मकोय किस्म की रसभरी लगाई। इससे एक लाख रुपए प्रति बीघा की कमाई ले रहे हैं। काली मकोय रसभरी खाने के साथ आयुर्वेदिक दवा में काम आती है। इससे ह्रदय और लीवर की कई बीमारियों की दवा बनती है। इन बीमारियों में इसका सामान्य रूप से उपयोग करना भी हितकारी होता हैए इसलिए इसकी बाजार में मांग रहती है। इसका बाजार भाव करीब 150 से 200 रुपए तक रहता है। दिल्ली इसका बड़ा मार्केट है।
इस किस्म की रसभरी की पैदावार एक बीघा में करीब 800 किलो तक है। बाजार भाव करीब 150 से 200 रुपए किलो तक रहता है। आम, केला, चीकू, खट्टे नींबू, काली मिर्च, नारियल, हल्दी, अदरक, काजू के उत्पादन में भारत विश्व में प्रथम स्थान पर हैं। सिक्किम देश का पहला राज्य था। सिक्किम ने लम्बे समय तक मिट्टी की उर्वरकता बनाये रखने, पर्यावरण, पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण, स्वस्थ जीवन और हृदय सम्बन्धी खतरे को कम करने के मकसद से इस लक्ष्य को हासिल करने का संकल्प लिया था उत्तराखंड ने जैविक खेती में मिसाल पेश की है राज्य ने एक बार फिर से भारत का मान बढ़ाया है। अपने शरीर को कुछ खाद्य पदार्थ खिलाने से आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत रह सकती है खेती के कारण उसके आसपास गांवों के लोगों को इससे रोजगार भी मिल रहा है। किसान को भी इसकी खेती से दोगुनी आमदनी हो रही है। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में प्रदेश में उच्च गुणवत्तायुक्त के फसल उत्पादन कर देश.दुनिया में स्थान बनाने के साथ राज्य की आर्थिकी तथा पहाड़ी क्षेत्रों में पलायान को रोकने का अच्छा विकल्प बनाया जा सकता है।
अगर ढांचागत अवस्थापना के साथ बेरोजगारी उन्मूलन की नीति बनती है तो यह पलायन रोकने में कारगर होगी उत्तराखण्ड हिमालय राज्य होने के कारण बहुत सारे बहुमूल्य उत्पाद जिनकी अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में अत्यधिक मांग रहती है प्रदेश विज्ञान एवं पर्यावरण परिषद को भी पेटेंट करवाया की जरूरत है। उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं ही नहीं, यहां के खान.पान में भी विविधता का समावेश है। जिससे आज यह औषधि विलुप्त होने के कगार पर है, अतः इसका संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

Share218SendTweet136
Previous Post

बेहतर समन्वय से काम करें अधिकारीः जिलाधिकारी

Next Post

आज से सुबह 8 बजे से 1 बजे तक होगा बैंकों में लेनदेन

Related Posts

उत्तराखंड

विश्व पृथ्वी दिवस का आयोजन

April 22, 2026
3
उत्तराखंड

पिरूल का सही इस्तेमाल किया जाए तो जंगलों में धधकी आग पर तो हमेशा के लिए काबू पाया ही जा सकेगा

April 22, 2026
3
उत्तराखंड

डोईवाला डिग्री कॉलेज में उद्यमिता अभिविन्यास कार्यक्रम आयोजित

April 22, 2026
3
उत्तराखंड

डोईवाला: छात्रों ने 100 से अधिक फलदार एवं फूलों के पौधे रोपे

April 22, 2026
4
उत्तराखंड

छात्रों ने नाटिका के माध्यम से जताई प्रकृति संरक्षण की चिंता

April 22, 2026
3
उत्तराखंड

डाॅ. इंद्रेश कुमार को लेखक श्री सम्मान से नवाजा

April 22, 2026
4

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67671 shares
    Share 27068 Tweet 16918
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45776 shares
    Share 18310 Tweet 11444
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38051 shares
    Share 15220 Tweet 9513
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37438 shares
    Share 14975 Tweet 9360
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37329 shares
    Share 14932 Tweet 9332

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

विश्व पृथ्वी दिवस का आयोजन

April 22, 2026

पिरूल का सही इस्तेमाल किया जाए तो जंगलों में धधकी आग पर तो हमेशा के लिए काबू पाया ही जा सकेगा

April 22, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.