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फिर सवालों के घेरे में डाक विभाग

08/11/24
in उत्तराखंड, देहरादून
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https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला

एक ओर जहां उत्तराखंड के युवा रोजगार की तलाश में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं
वहीं दूसरी ओर आज ऐसी खबर सामने आ रही है जिसे सुनकर आप यहीं सोचने को विवश
हो जाएंगे कि क्या ऐसे दिन देखने के लिए ही हमारे पूर्वजों ने पृथक उत्तराखण्ड की मांग
रखी थी। दरअसल पूरा मामला डाक विभाग में चल रही बीपीएम (ब्रांच पोस्ट मास्टर) एवं
एबीपीएम (असिस्टेंट ब्रांच पोस्ट मास्टर) के पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया का है, जिसमें
नियुक्त 98 फीसदी युवा हरियाणा और पंजाब के है। हैरानी की बात तो यह है कि राज्य के
पर्वतीय क्षेत्रों में डाकघरों का जिम्मा संभालने जा रहे इन ब्रांच पोस्ट मास्टर, असिस्टेंट ब्रांच
पोस्ट मास्टर के पदों पर उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाले महज 3 युवाओं को ही नियुक्ति
मिली है।उत्तराखंड में डाक विभाग में हाल ही में हुई भर्ती प्रक्रिया विगत कई दिनों से
सवालों के घेरे में है। जहां एक ओर इस भर्ती में हरियाणा पंजाब के अधिकांश युवा चयनित
हुए हैं और उत्तराखंड के युवा हाथ मलते रह गए हैं वहीं चयनित युवाओं द्वारा हिंदी के दो
शब्द भी ढंग से न बोल समझ पाने के कारण उनकी योग्यता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि डाक विभाग में भर्ती प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर पर संपन्न होती है जिसमें किसी भी राज्य
का व्यक्ति दूसरे राज्य में नियुक्ति पा सकता है, इसमें कोई संदेह नहीं परंतु जिस तरह से
चयनित अभ्यर्थी हिंदी तक समझ, बोल और लिख नहीं पा रहे हैं उससे न केवल उनकी
योग्यता पर गंभीर सवाल खड़े होना लाजिमी है बल्कि यह भी विचारणीय विषय है कि
पहाड़ी भाषा बहुल प्रदेश होने के कारण राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में उनकी तैनाती से क्या वे
आम जनमानस की मदद कर पाएंगे। क्योंकि अमूमन आम आदमी ही डाक खाने के चक्कर
लगाता है, पलायन के कारण उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बड़े बुजुर्ग ही
रहते हैं, जो अधिकांशतया पहाड़ी बोली भाषा का ही प्रयोग करते हैं, ऐसे में उनकी
समस्याएं समझना किसी गैर हिंदी भाषी व्यक्ति के लिए संभव नहीं है।  उत्तराखंड में कई
ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें डाकपाल के पद पर चयनित अभ्यर्थियों को हिंदी और
गणित का सामान्य ज्ञान तक नहीं है, जबकि 10वीं की मार्कशीट में उनके नंबर 90 प्रतिशत
हैं। ताज़ा मामला राज्य के पौड़ी गढ़वाल जिले से सामने आ रही है जहां ब्रांच पोस्ट मास्टर
बने एक युवा ने हिंदी में 95 नंबर हासिल किए, लेकिन जब हिंदी लिखने की बारी आई तो
उसके हाथ पांव फूल गए। ऐसे अभ्यर्थी दो शब्द भी शुद्ध नहीं लिख पा रहे। मामला सामने
आने के बाद जब प्रधान डाकघर अधीक्षक पौड़ी ने ब्रांच पोस्ट मास्टर पद पर चयनित इस
युवा की स्क्रीनिंग की। उसके सभी दस्तावेज तो वैध पाए गए, परंतु उसकी योग्यता सवालों
के घेरे में है। बताया गया है कि अभ्यर्थी ने आवेदन पत्र में अधीक्षक को अदीशय, महोदय को
मेव्य, डाकघर को ढाकघर और पौड़ी को पैटी लिखा था। यही नहीं जब उसे अंकों को हिंदी में
लिखने के लिए कहा तो चयनित डाकपाल ने 1500 को पद्रासै, 2750 को सताइसे, 3531

को तीन हजार पानसे कतीस और 250 को ढाइरौ लिख दिया। इस संबंध में डाक अधीक्षक
पौड़ी दीपक शर्मा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि हरियाणा के रहने वाले युवक का
जनपद पौड़ी के सिलोगी उप डाकघर में गढ़कोट शाखा डाकघर में शाखा डाकपाल के पद
पर चयन हुआ है। उन्होंने बताया कि प्ररकण को लेकर रिपोर्ट परिमंडल देहरादून भेज दी है।
चयनित शाखा डाकपाल की तैनाती को लेकर उच्च अधिकारियों के दिशा-निर्देश के बाद
कार्रवाई अमल में लाई जाएगी डाक विभाग में नियुक्तियों की जांच के दौरान कई चयनित
अभ्यर्थियों के डॉक्यूमेंट फर्जी तक निकले हैं। जिसके बाद से क‌ई अभ्यर्थी जांच के डर से
ज्वाइनिंग करने से भी कतरा रहे हैं। बताते चलें कि डाकघर पौड़ी में बीते अक्तूबर माह में
चयनित चार ग्रामीण डाक सेवक ज्वाइनिंग देने पहुंचे थे। जिनमें उत्तर प्रदेश के दो चयनित
ग्रामीण डाक सेवकों के शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी पाए गए थे। जबकि मध्य प्रदेश के चयनित
दो ग्रामीण डाक सेवक जांच का नाम सुनते ही भाग खड़े हुए थे। इससे पूर्व राज्य के चमोली
जिले से भी ऐसा ही मामला सामने आया था। ऐसे में इस पूरी भर्ती प्रक्रिया पर जहां सवाल
उठना लाजिमी है वहीं आम जनमानस से जुड़ा मुद्दा होने के कारण स्थानीय जनप्रतिनिधियों
एवं शासन प्रशासन को भी इसका संज्ञान लेकर भर्ती प्रक्रिया में बदलाव करवाने के लिए
ठोस कदम उठाया जाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि भर्ती प्रक्रिया के उपरांत चयनित अभ्यर्थी
आम जनमानस की समस्याएं भली-भांति समझ पाए।  डाक विभाग में ब्रांच पोस्ट मास्टर
एवं असिस्टेंट ब्रांच पोस्ट मास्टर के पदों पर नियुक्ति हाईस्कूल की मेरिट के आधार पर की
जाती है, इसके लिए अलग से लिखित परीक्षा या साक्षात्कार नहीं कराया जाता है। हैरानी
की बात तो यह है कि बीपीएम एबीपीएम के पदों पर नियुक्त यह युवा भले ही मेरिट के
आधार पर कामयाबी पाने में सफल हुए हों परंतु इनके नंबरों के हिसाब से इनका ज्ञान बहुत
कम है। बताया तो यह भी गया है कि हरियाणा एवं पंजाब के इन अभ्यर्थियों में से अधिकांश
ने हाईस्कूल एवं इंटरमिडिएट की परीक्षा में गणित विषय में 100 में से 99 अंक हासिल
किए हैं परंतु इनमें से क‌ई अभ्यर्थी ऐसे भी हैं जिन्हें प्रतिशत तक निकालना नहीं आ रहा है।
एक ओर जहां उच्च अंक हासिल किए ये सफल अभ्यर्थी प्रतिशत तक नहीं निकाल पा रहे हैं
वहीं दूसरी ओर उत्तराखण्ड बोर्ड से महज 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले युवा भी इस
काम को सहजता से पूर्ण कर सकते हैं। इतना ही नहीं हरियाणा एवं पंजाब के ये नियुक्त
अभ्यर्थी ना तो स्थानीय लोगों की बोली भाषा समझ पा रहे हैं बल्कि उन्हें हिंदी भाषा भी
ढंग से लिखनी बोलनी नहीं आ रही है। ऐसे बड़ा सवाल यह भी है कि ये युवा कैसे पर्वतीय
क्षेत्रों में स्थित डाक घरों को संचालित कर पाएंगे, तथा ग्रामीण क्षेत्रों के लोग इन्हें अपनी
बात किस तरह समझा पाएंगे। भारतीय पोस्ट ऑफिस के उत्तराखंड रीजनल पोस्ट ऑफिस
में ग्रामीण डाक सेवकों की भर्ती के लिए 1,238 पदों का अधियाचन डायरेक्टर पोस्ट
ऑफिस को भेजा गया था. जिस पर अभ्यर्थियों को चयन भी कर लिया गया है, लेकिन
चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज जांच में तमाम गड़बड़ी के मामले सामने आई है. पोस्ट
ऑफिस में फर्जी दस्तावेज के आधार पर चयनित युवाओं का ये कोई पहला मामला नहीं है,
बल्कि साल 2023 में भी इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं. साल 2023 में निकाली गई
भर्ती के दौरान चयनित युवाओं में से 36 युवाओं पर कार्रवाई की गई थी. साथ ही 5 लोगों
के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई थी.ऐसे में अब साल 2024 में भी फर्जी दस्तावेज के
आधार पर नौकरी पाने का मामला सामने आया है, जिसके चलते उत्तराखंड रीजनल पोस्ट
ऑफिस ने प्रदेश के सभी सातों डिवीजन से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है. दरअसल, साल
2023 के दौरान उत्तराखंड रीजनल ऑफिस की ओर से 1448 पदों पर भर्ती के लिए हेड
ऑफिस को पत्र भेजा गया था. ऐसे में साल 2023 के दौरान तीन चरणों शेड्यूल 1, स्पेशल
साइकिल और शेड्यूल 2 के तहत भर्ती की गई.तीनों शेड्यूल के तहत 36 अभ्यर्थियों के फर्जी
दस्तावेज का मामला सामने आया था. ऐसे में 18 लोगों को टर्मिनेट और 20 लोगों की
ज्वाइनिंग कैंसल की गई थी. साथ ही पांच के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था, जिन
18 लोगों को टर्मिनेट किया गया था, उनमें 13 अभ्यर्थी अल्मोड़ा डिवीजन और 3 अभ्यर्थी
नैनीताल डिविजन में ज्वाइन कर चुके थे.इसके साथ ही जिन 20 लोगों की ज्वाइनिंग रद्द की
गई, उनमें देहरादून डिवीजन में 7, नैनीताल डिवीजन में 7 और टिहरी डिवीजन में 6 लोग
ज्वाइनिंग होनी थी. पिछले कुछ सालों से अभ्यर्थियों के फर्जी दस्तावेज का मामले सामने
आने पर सीबीआई की टीम ने भारतीय पोस्ट ऑफिस में उत्तराखंड रीजनल कार्यालय
पहुंचकर अभ्यर्थियों की जानकारी ली थी.इस दौरान उत्तराखंड रीजनल पोस्ट ऑफिस
कार्यालय ने 2021 से 2023 तक बतौर ग्रामीण डाक सेवक ज्वाइन कर चुके 1455
अभ्यर्थियों की सूची सीबीआई को सौंपी थी. ऐसे में सीबीआई अपने स्तर से ज्वाइन कर चुके
इन सभी डाक सेवकों के दस्तावेजों की जांच कर रही है. हालांकि, साल 2024 में तीन
शेड्यूल के तहत कुल 1,238 पदों की भर्ती के पत्र हेड पोस्ट ऑफिस को भेजा गया था, जिन
पदों के लिए युवाओं का चयन किया जा चुका है.दस्तावेजों की हो रही जांच: ऐसे में इन
सभी युवाओं के चयन से पहले उनके दस्तावेजों की जांच की जा रही है. शुरुआती जांच में
चमोली और अल्मोड़ा डिवीजन से तीन-तीन अभ्यर्थियों को पकड़ा गया है, जो फर्जी तरीके
से भर्ती में चयनित हुए थे. लिहाजा, इन सभी 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई
गई है.वहीं, उत्तराखंड रीजनल पोस्ट ऑफिस की चीफ पोस्टमास्टर जनरल ने कहा कि इस
मामले को लेकर सभी डिविजन से रिपोर्ट मांगी गई है. हालांकि, जब फर्जी दस्तावेज का
मामला सामने आता है तो ज्वाइन कर चुके अभ्यर्थियों को टर्मिनेट और चयनित युवाओं के
ज्वाइनिंग को रद्द कर दिया जाता है. साथ ही एफआईआर भी दर्ज कराई जाती है.साथ ही
कहा कि पोस्ट ऑफिस में भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन है, ऐसे में जिन अभ्यर्थियों का मेरिट सबसे
अधिक होती है, उनका ऑटोमेटिक सिलेक्शन हो जाता है. इसके बाद चयनित अभ्यार्थियों
के डाक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन कराया जाता है.बता दें कि उत्तराखंड में पोस्ट ऑफिस के
कुल सात डिवीजन है, जिसमें अल्मोड़ा, चमोली, देहरादून, पिथौरागढ़, नैनीताल, पौड़ी और
टिहरी डिवीजन शामिल हैं. साथ ही इन सभी डिवीजन के तहत प्रदेश भर में कुल 2736
पोस्ट ऑफिस संचालित हो रहे हैं. हालांकि, साल 2016 से पहले डिवीजन स्तर से ही
ग्रामीण डाक सेवकों की भर्ती की जाती थी, लेकिन साल 2016 के बाद भारत सरकार ने इस
प्रक्रिया में बदलाव कर नेशनल स्तर पर भर्ती करने की प्रक्रिया शुरू कर दी. लिहाजा, साल
2016 के बाद पूरी तरह ऑनलाइन मध्यम से ही भर्ती की जा रही है, जिसमे 10वी पास
मार्कशीट के आधार पर मेरिट बेस युवाओं का चयन किया जा रहा है. उत्तराखंड में पहाड़ों के
युवाओं के सामने सबसे बड़ा संकट नौकरी का है. जिसके लिए युवा अपने घर छोड़कर बड़े
शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं.,राज्य स्थापना के बाद 24 सालों में दोनों ही सरकारों
को कटघरे में खड़ा किया है.लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं।लेखक वर्तमान में दून
विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।

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