• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

बांज यानी उत्तराखंड का हरा सोना

26/05/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
5
SHARES
6
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड में इस समय जंगलों में भीषण आग लगी हुई है. राज्य के कई जिलों में वन क्षेत्र जल रहे हैं. आम तौर पर उत्तराखंड में 1000 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर पाए जाने वाले चीड़ के जंगलों में आग लगती है. लेकिन इस बार स्थिति ज्यादा गंभीर हो गई है, क्योंकि आग अब बांझ के जंगलों तक पहुंच गई है. बांझ के जंगल लगभग 4000 से 8000 फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं और इस बार आग करीब 6000 फीट तक फैल चुकी है.उत्तराखंड के जंगल पर्यावरण के लिए बेहद संवेदनशील माने जाते हैं, क्योंकि यहां लगने वाली आग का असर हिमालय के ग्लेशियरों तक महसूस किया जा सकता है. बढ़ते तापमान, चाहे वह जमीन का हो या वायुमंडल का, आग को तेजी से ऊंचाई वाले इलाकों तक ले जा रहा है. लंबे समय तक बारिश और बर्फबारी नहीं होने से बांझ के जंगलों की प्राकृतिक नमी खत्म हो गई है, जिससे वे भी आग की चपेट में आ गए हैं.उत्तराखंड में इस समय जंगलों में भीषण आग लगी हुई है. राज्य के कई जिलों में वन क्षेत्र जल रहे हैं. आम तौर पर उत्तराखंड में 1000 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर पाए जाने वाले चीड़ के जंगलों में आग लगती है. लेकिन इस बार स्थिति ज्यादा गंभीर हो गई है, क्योंकि आग अब बांझ के जंगलों तक पहुंच गई है. बांझ के जंगल लगभग 4000 से 8000 फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं और इस बार आग करीब 6000 फीट तक फैल चुकी है.उत्तराखंड के जंगल पर्यावरण के लिए बेहद संवेदनशील माने जाते हैं, क्योंकि यहां लगने वाली आग का असर हिमालय के ग्लेशियरों तक महसूस किया जा सकता है. बढ़ते तापमान, चाहे वह जमीन का हो या वायुमंडल का, आग को तेजी से ऊंचाई वाले इलाकों तक ले जा रहा है. लंबे समय तक बारिश और बर्फबारी नहीं होने से बांझ के जंगलों की प्राकृतिक नमी खत्म हो गई है, जिससे वे भी आग की चपेट में आ गए हैं. बांझ के जंगल पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. ये मिट्टी के कटाव को रोकते हैं, जमीन में नमी बनाए रखते हैं और भूमिगत जल तथा प्राकृतिक जल स्रोतों को रिचार्ज करने में अहम भूमिका निभाते हैं. बारिश और बर्फ का पानी इन पेड़ों की जड़ों के माध्यम से संरक्षित रहता है, जिससे पहाड़ों के जल स्रोत जीवित रहते हैं. लेकिन इस समय बांझ के जंगल गंभीर खतरे में हैं. अगर आग पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो प्राकृतिक जल स्रोतों को बनाए रखने वाला यह महत्वपूर्ण वन तंत्र प्रभावित हो सकता है. बांझ के जंगल पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. ये मिट्टी के कटाव को रोकते हैं, जमीन में नमी बनाए रखते हैं और भूमिगत जल तथा प्राकृतिक जल स्रोतों को रिचार्ज करने में अहम भूमिका निभाते हैं. बारिश और बर्फ का पानी इन पेड़ों की जड़ों के माध्यम से संरक्षित रहता है, जिससे पहाड़ों के जल स्रोत जीवित रहते हैं. लेकिन इस समय बांझ के जंगल गंभीर खतरे में हैं. अगर आग पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो प्राकृतिक जल स्रोतों को बनाए रखने वाला यह महत्वपूर्ण वन तंत्र प्रभावित हो सकता है. उत्तराखंड वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक और वनाग्नि-आपदा प्रबंधन के नोडल अधिकारी के अनुसार गढ़वाल मंडल में 278 और कुमाऊं मंडल में करीब 69 आग की घटनाएं हुई हैं, जबकि वन्यजीव संरक्षित क्षेत्रों में 34 घटनाएं दर्ज की गई हैं. उन्होंने बताया कि कम बारिश और बर्फबारी के कारण आग तेजी से ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक फैल रही है. उन्होंने यह भी कहा कि बांझ के जंगलों में आमतौर पर नमी रहती है, लेकिन इस बार सूखे के कारण आग वहां तक पहुंच गई है और इसकी वजहों का अध्ययन किया जाएगा. राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में हाल के दिनों में उच्च शिखरीय बांज बहुल वन क्षेत्रों में आग की घटनाएं हो चुकी हैं। चिंता यह साल रही है कि यदि बांज के जंगलों में आग ने विकराल रूप धारण किया तो जैवविविधता के लिए बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। पहाड़ का हरा सोना कहलाए जाने वाला बांज अब विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुका है। उत्तराखंड में बांज के जंगलों के ऊपर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। यह तो हम सबको पता ही होगा कि बांज के जंगल पहाड़ की पारिस्थितिकी के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं और इन जंगलों को चीड़ तेजी से निकल रहा है। ऐसे में यह खतरे का अलार्म है। बता दें कि हाल ही में सेंटर फॉर इकोलॉजी डेवलपमेंट एंड रिसर्च देहरादून, नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंस और इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन ने उत्तराखंड के जंगलों में शोध किया और शोध में यह पाया गया कि उत्तराखंड में बांज के घने जंगलों में 22 फीसदी और कम घने जंगलों में 29% की गिरावट आई है और चीड़ के जंगल 74 फीसदी तक बढ़ गए हैं। बांज वर्षा के पानी को अवशोषित कर भूमिगत करता है और इसी की वजह से उत्तराखंड में नदियों का जलस्तर बढ़ता है। उत्तराखंड के लिए बेहद अहम माने जाने वाले बांज के पेड़ों की कमी की वजह से धरती की कोख भी बांझ होती जा रही है। उत्तराखंड के जंगलों में लगातार जल रही जंगल की आग को दो दिन की बारिश ने भले शांत कर दिया हो लेकिन यह याद रखने की जरूरत है कि अभी सिर्फ शुरुआत भर है बांज के जंगल का अपना पारिस्थितिक तंत्र होता है, जिसमें अनेक प्रकार की झाड़ियां, बांस और दूसरी शाकीय प्रजाति की सैकड़ों वनस्पतियां पनाह पाती हैं। पारिस्थितिक तंत्र के लिए आवश्यक दूसरी प्रजातियों के फलने- फूलने में बांज महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बांज ऑक्सीजन का खजाना है। लेकिन बाना नाम का एक परजीवी बांज की इस महत्वपूर्ण प्रजाति की जान का दुश्मन बन गया है। बाना, बांज के पेड़ों की भोजन नलिका में अपनी जड़ें डालकर बांज के सभी पोषक तत्वों को खुद हजम कर जाता है।समय के साथ इस परजीवी का विस्तार होते रहता है और आश्रयदाता बांज के पेड़ अल्पायु में सूखने लगते हैं। इस परजीवी में छोटे-छोटे मीठे बीज लगते हैं। इन बीजों को चिड़िया, लंगूर और बंदर खाते हैं। इन्हीं के द्वारा बाना का निरंतर विस्तार होता रहता है। बाना का प्रकोप घने जंगलों के मुकाबले मानवीय हस्तक्षेप वाले क्षेत्रों में अधिक है। आबादी वाले इलाकों में जहाँ बांज की शाखाएं काटी जाती हैं, उन्हीं क्षेत्रों में बाना अधिक पनपता है। बांज के पेड़ की जिस शाख में बाना लग जाए,उसे काटकर जला देना ही इसका एकमात्र उपाय है। ताकि पेड़ के दूसरे हिस्सों को इसके कहर से बचाया जा सके।बांज के पेड़ों में बाना के रूप में मंडरा रहा यह खतरा प्राकृतिक कम, मावन जनित अधिक है। उत्तराखंड के जंगलों में दूसरी उपयोगी प्रजातियों के मुकाबले बांज के जंगल अधिक हैं। बहुउपयोगी होने के कारण पहाड़ में सबसे ज्यादा दोहन बांज का ही होता है। अति दोहन के चलते बांज के जंगलों का पारिस्थितिक तंत्र बदल रहा है। जानकारों का मानना है कि बाना उन क्षेत्रों में अधिक फैल रहा है, जहाँ बांज के साथ स्वाभाविक रूप से उगने वाली सैकड़ों प्रजाति की वनस्पतियों में से अधिकांश लुप्त हो गई हैं। इन प्रजातियों के लुप्त होने से बांज की स्वाभाविक प्रतिरोधक क्षमता घट गई है।नैनीताल इस बात का उदाहरण है। नैनीताल नगर में दूसरी प्रजातियों के बनिस्बत बांज के वृक्ष अधिक हैं। यहाँ मौजूद बांज के अधिकांश वृक्ष बाना के जानलेवा जाल की गिरफ्त में नजर आते हैं। कुछ वर्ष पूर्व वन विभाग ने नैनीताल नगर में बाना से प्रभावित बांज के पेड़ों की शाखाओं को काटकर जलाने का अभियान भी चलाया। पर सब बेकार।बाना ने दूसरे तंदुरुस्त पेड़ों को अपनी गिरफ्त में ले लिया।इधर कुछ दशकों से पहाड़ के जंगलों के ऊपर मानव दबाव बढ़ा है। इससे पर्यावरण से जुड़ी समस्याएं भी पैदा होने लगी हैं। जनसंख्या वृद्धि एवं अनियंत्रित और अनियोजित विकास ने यहाँ के लचीले एवं भंगुर पर्यावरण के जटिल तंत्र को क्षति पहुँचाई है।परिणामस्वरूप यहाँ भू- स्खलन, भूमि विनाश, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण और पीने के पानी का संकट जैसी समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं। उत्तराखंड में शक्ति और सत्ता के बदलते समीकरणों ने पारिस्थितिक और पर्यावरणीय मुद्दों को हासिए में धकेल दिया है। सरकारें यहाँ के जंगलों के प्रति संवेदनशील और सचेत नहीं दिखतीं। ऐसी स्थिति में बाना के फैलते जाल से बांज को बचा पाना एक बड़ी चुनौती है।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

Share2SendTweet1
Previous Post

वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी रही *विधाता ढौंडियाल (98) जी* के निधन

Related Posts

उत्तराखंड

वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी रही *विधाता ढौंडियाल (98) जी* के निधन

May 26, 2026
3
उत्तराखंड

स्मार्ट मीटरों के विरोध व गन्ना भुगतान को लेकर किसानों का प्रदर्शन

May 26, 2026
4
उत्तराखंड

हेड कांस्टेबल की कार्बाइन से गोली लगने से मौत

May 26, 2026
4
उत्तराखंड

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक ‘अपनापन–नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव’ का लोकार्पण

May 26, 2026
5
उत्तराखंड

चारधाम यात्रा उमड़ा आस्था का सैलाब

May 25, 2026
10
उत्तराखंड

गंगा दशहरा पर रंग-बिरंगे द्वार पत्रों से सजती है देहरी

May 25, 2026
6

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67686 shares
    Share 27074 Tweet 16922
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45778 shares
    Share 18311 Tweet 11445
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38055 shares
    Share 15222 Tweet 9514
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37446 shares
    Share 14978 Tweet 9362
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37331 shares
    Share 14932 Tweet 9333

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

बांज यानी उत्तराखंड का हरा सोना

May 26, 2026

वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी रही *विधाता ढौंडियाल (98) जी* के निधन

May 26, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.