डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
हरिद्वार और देहरादून के बीच राजाजी नेशनल टाइगर रिजर्व क्षेत्र के हाथी और अन्य वन्यजीवों को ट्रेन हादसों से बचाने के लिए इंट्रूशन डिटेक्शन सिस्टम (आईडीएस) का सफल परीक्षण हुआ। मोतीचूर रेलवे स्टेशन के समीप ट्रैक के किनारे ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) बिछाकर उस पर हाथी को चढ़वाया गया। केबल पर हाथी का पैर पड़ते ही संबंधित रेलवे स्टेशन में चेतावनी अलार्म बजने लगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तंत्र पूरी तरह से लगने के बाद अलार्म की चेतावनी हाथी के नजदीक आ रही ट्रेन के लोको पायलट को भी मिलेगी। रेलवे बोर्ड से स्वीकृति मिलने के बाद जल्द ही यह सिस्टम देहरादून से हरिद्वार के बीच रेल ट्रैक के दोनों किनारों पर लगाया जाएगा और हाथियों को रेल हादसों से बचाने के लिए लक्ष्मण रेखा का कार्य करेगा।राजाजी टाइगर रिजर्व के बीच से गुजर रहे दून-हरिद्वार रेल मार्ग पर अक्सर वन्यजीवों और हाथियों के रेल से टकराकर मौत होने की घटनाएं सामने आती हैं। वन विभाग और रेलवे ने हाथियों को टक्कर से बचाने के लिए रेल ट्रैक पर ट्रेनों की गति कम कर अन्य सुरक्षात्मक कदम उठाए, लेकिन इनसे पूरी तरह से घटनाओं पर अंकुश नहीं लगा। पार्क गठन के बाद 38 वर्षो में 33 हाथियों ने अपनी जान गंवाई। इस घटना से यह प्रतीत होता है कि रेलवे और पार्क प्रशासन के बीच जो सामंजस्य बनाकर कार्य करने की बात कही जा रही थी, वह धरातल पर नहीं उतर पाई। रेलवे और पार्क प्रशासन के अधिकारियों के मध्य कई बैठकेें हुईं, जिनमें रेलवे ट्रैक पर होने वाली वन्यजीव दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने को लेकर चर्चा हुई। वह दावे मूर्त रूप नहीं ले पाए।इसमें चाहे बजट की कमी रही हो या फिर अधिकारियों की इच्छा शक्ति की। पार्क क्षेत्र से गुजरने वाली ट्रेनों की स्पीड को लेकर भी सवाल उठाए गए। ट्रैक पर ट्रेन की गति तय है, लेकिन जैसे ही मामला पुराना होता चला गया ट्रेनों की स्पीड बढ़ती चली गई।बता दें कि हरिद्वार-देहरादून रेल मार्ग पर वंदे भारत एक्सप्रेस के अलावा कई एक्सप्रेस ट्रेनें हैं जिनकी गति मानक से अधिक हैं। ऐसे में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए किए गए दावों पर सवाल उठना स्वभाविक है। आंकड़े बता रहे हैं कि दोनों विभागों के बीच तालमेल का अभाव है। वन्यजीवों की सुरक्षा के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हरिद्वार-देहरादून रेलवे ट्रैक पर होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए रेलवे और पार्क प्रशासन की ओर से अभी तक जितने भी प्रयास किए गए हैं, वह कागजों तक सिमट कर रह गए हैं। अब इन हादसों को और भी कम करने के लिए रेलवे ने ट्रैक पर आईडीएस लगाने का फैसला लिया, जिसका परीक्षण करा लिया गया है। इसे लगाने के लिए रेलवे प्रस्ताव तैयार कर रेल बोर्ड में भेजेगा। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद जल्द ही कार्य शुरू होगा। राजाजी टाइगर रिजर्व के बीच से गुजर रहा रेलवे ट्रैक कई मतर्बा हाथियों के लिए जानलेवा साबित हुआ है। वन विभाग और रेलवे में सामंजस्य न होने से हाथी अपनी जान गवां रहे हैं। हरिद्वार-देहरादून के बीच स्थित इस ट्रैक पर बीते 38 वर्ष में 33 हाथी काल का ग्रास बन चुके हैं। एक बार फिर सुरक्षा दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस जगह ज्यादातर घटनाएं हुई वह हाथियों का परंपरागत वन्यजीव गलियारा है।जिस जगह घटना हुई वहां अक्सर हाथियों का मूवमेंट रहता है। जाहिर सी बात है कि यहां से गुजर रहे रेलवे ट्रैक पर राजाजी पार्क प्रशासन को अतिरिक्त चौकसी बढ़ानी चाहिए, ताकि वन्य जीव सुरक्षित रेल ट्रैक पार कर सकें, लेकिन धरातल पर ऐसा कुछ नहीं है।। *लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं*











