• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

उत्तरकाशी धराली त्रासदी: कर्नल कोठियाल ने उठाए आपदा प्रबंधन पर सवाल

03/12/25
in उत्तरकाशी, उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
26
SHARES
32
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला

कर्नल अजय कोठियाल 7 दिसंबर 1992 में गढ़वाल राइफल की 4वीं बटालियन में सेकेंड लेफ्टिनेंट के पद पर भारतीय सेना में शामिल हुए थे। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने अनेक बहादुरी भरे काम किये हैं उन्होंने जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन भी चलाये, जिसमें उन्हें पैर में गोली भी लगी थी। अदम्य साहस के लिए उन्हें कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया है। वह 26 अप्रैल 2013 से 26 अप्रैल 2018 तक नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) के प्रधानाचार्य भी रहे। उत्तराखंड में साल 2013 में आई विनाशकारी हिमालयन सुनामी के बाद शुरू हुए निर्माण कार्यों और खासकर केदारनाथ पुनर्निर्माण की कहानी कर्नल (रिटा.) अजय कोठियाल के जिक्र के बिना अधूरी है। केदारपुरी जिस दिव्य और भव्य स्वरूप में आज नजर आ रही है, उसका श्रेय कर्नल अजय कोठियाल और उनके निर्देशन में बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में काम करने वाली टीम को जाता है।29 अगस्त 2018 को कर्नल अजय कोठियाल ने स्वैच्छिक सेवानिवृति ली। कर्नल अजय कोठियाल ने अप्रैल 2021 में उत्तराखंड के सियासी रण में प्रवेश लिया और उन्होंने आम आदमी पार्टी ज्वाइन की। वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया था। उस समय कर्नल कोठियाल को युवाओं का लोकप्रिय नेता माना जाता था। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वह भाजपा में शामिल हो गये और कुछ समय बाद भाजपा ने उन्हें अपना प्रवक्ता बनाया और अब धामी सरकार ने उन्हें उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार समिति का अध्यक्ष बनाया है।
उन्होंने यूथ फाउंडेशन नामक संस्था की स्थापना की जिसके माध्यम से गरीब परिवार के बच्चों को सेना और अर्द्धसैनिक बलों में भेजने का प्रशिक्षण दिया जाता है और उनमें से कई बच्चे आज भारतीय सेना और अर्द्ध सैनिक बल का हिस्सा बने हुए है। कर्नल कोठियाल की प्रेरणा से चल रहा यूथ फाउंडेशन अब एक मिशन बन चुका है। वह युवक-युवतियों को सेना, अर्द्धसैनिक बलों और पुलिस बलों में जाने के लिए तैयार करते हैं। इतने बड़े अभियान को वह निःशुल्क चलाते हैं। हर चुनौती का सामना शांति और सलीके से करने का हुनर उन्हें दूसरों से अलग बनाता है। चाहे वह सैन्य मोर्चे पर दुश्मनों के कुटिल इरादों को नाकाम करना हो या फिर आपदा पीड़ित उत्तराखंड में राहत और पुनर्वास का काम। यही वजह है कि राज्य सरकार ने अब उन्हें एक नई जिम्मेदारी सौंपी है।इस वर्ष 5 अगस्त को उत्तरकाशी के धराली में आई विनाशकारी आपदा से निपटन के तौर तरीकों पर भाजपा के कर्नल अजय कोठियाल ने अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए हैं।वैश्विक आपदा प्रबंधन समिट में कर्नल अजय कोठियाल ने धराली त्रासदी को लेकर ऐसा बयान दिया जिसने पूरे आपदा प्रबंधन ढांचे को झकझोर कर रख दिया। उनका दर्द, उनका गुस्सा और उनका सवाल तीनों ही सीधे-सीधे सिस्टम की नाकामी पर निशाना साधते दिखे। कर्नल कोठियाल का बयान जमकर वायरल हो रहा है।कर्नल कोठियाल ने मंच से यह कहते हुए पूरा माहौल गंभीर कर दिया कि धराली में 147 लोग मलबे में दबे पड़े है और हम एक को भी नहीं निकाल पाए, हमारा आधुनिक आपदा प्रबंधन तंत्र एक भी व्यक्ति को नहीं निकाल पाया। जबकि सरकारी आंकड़ों में 50 ज्यादा लोग ही लापता बताए गए हैं जबकि दो की मौत की पुष्टि हुई है। कर्नल कोठियाल ने सेना और आईटीबीपी की तारीफ़ करते हुए कहा कि सेना ने अपने 7 जवानों को निकाल लिया पर बाकी 147 लोगों को हमने ऐसे ही छोड़ दिया। क्या यही हमारी तैयारी है? क्या यही हमारा तंत्र है?”कर्नल ने तीखा सवाल दागा कि कि आपदा प्रबंधन विभाग धराली में कैंप क्यों नहीं कर रहा? वैज्ञानिक संस्थान मौके पर क्यों नहीं हैं? इतनी बड़ी घटना के बाद भी तकनीकी समर्थन नदारद क्यों?” उन्होंने आरोप लगाया कि यूसैक, वाडिया इंस्टीट्यूट के रिसर्चर, छात्रों, वैज्ञानिकों की टीमों को ग्राउंड जीरो पर होना चाहिए था लेकिन वो मैदान में दिखीं ही नहीं।अपने बयान को और कड़ा करते हुए कर्नल कोठियाल ने कहा कि एनडीआरएफ जैसे विशेष प्रशिक्षित बल से लेबर का काम करवाया गया! उन्हें वहीं की मिट्टी हटाने में लगा दिया, जबकि जिन वैज्ञानिक और तकनीकी टीमों की असल ज़रूरत थी, वे मौके पर पहुँची ही नहीं। कोठियाल की यह टिप्पणी सीधे तौर पर आपदा प्रबंधन एजेंसियों की तैयारी और नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़ा करती है। कर्नल ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हम अपने ही लोगों को नहीं बचा पा रहे, तो चीन से कैसे टक्कर लेंगे? चीन हिमालय की तरफ बढ़ रहा है और हम पीछे जा रहे हैं।कर्नल कोठियाल को केदारनाथ आपदा के बाद पुनर्निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, तब कर्नल की टीम ने शानदार काम किया था। अब धराली आपदा के बाद भरे मंच से आपदा प्रबंधन तंत्र की न सिर्फ पोल खोली है बल्कि सरकार पर भी सवालिया निसान लगाए हैं। कोई आपदा आती है और दुर्भाग्य से आपदाग्रस्त प्रदेश है। सबसे पहले प्राथमिकता होती है, घायलों और प्रभावितों की जान बचाना है। दुर्भाग्य से जिन्हें बचाया नहीं जा सका, उनके आंकड़े जुटाने में भी दिक्कत होती है। केदारनाथ आपदा के समय भी सभी ने देखा होगा कि आज तक उस त्रासदी में मृत लोगों का पूरा आंकड़ा स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है। कुछ इस तरह की कठिनाइयां थराली आपदा में थी। कर्नल अजय कोठियाल, जिन्होंने केदारनाथ आपदा के बाद पुनर्निर्माण कार्य में अपनी दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता और ईमानदार कार्यशैली से नई मिसाल कायम की थी, अब उसी जुनून और समर्पण के साथ हर्षिल-धराली को पुनः बसाने के मिशन मेंहैं। उत्तरकाशी के धराली में आई आपदा ने पूरा गांव तबाह हो गया है। जिससे ग्रामीणों के सामने अब फिर से गांव को बसाने और खुद के लिए रोजगार के साथ ही नई जिदंगी शुरू करने की चुनौती है। उत्तराखंड सरकार ने आपदा प्रभावित हर्षिल-धराली के पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी कर्नल अजय कोठियाल को सौंपी है।  धराली आपदा को विज्ञानियों ने ब्लैम गेम बना दिया गया है। यही बात की जा रही है कि ऐसा होना चाहिए, वैसा होना चाहिए। धराली में जो गांव है, वह प्रथम गांव है। इस कारण उसे पूरी तवज्जो मिलनी चाहिए। मेरे वक्तव्य का सार यही था कि आपदा के करीब चार महीने बाद भी उत्तरकाशी जिले के धराली कस्बे की बदहाली हमारी ‘नकारात्मक सोच’ का उदाहरण है।नकारात्मक सोच से मेरा तात्पर्य उन आपदा प्रबंधन तंत्र के जिम्मेदार अधिकारियों, भू-गर्भ विज्ञानियों, विज्ञानियों, पर्यावरण विशेषज्ञों और संस्थानों से है जो पुनर्वास के उचित रास्ते निकालने के बजाय चुनौतियों से बचने के बहाने खोजते हैं।कर्नल कोठियाल के अनुसार, इसका सबसे ज्यादा खामियाजा उन्हीं पीड़ितों को भुगतना पड़ता है, जो पहले ही आपदा की मार से बुरी तरह टूटे हुए होते हैं। हमें इस नकारात्मक सोच से बाहर निकलने की जरूरत है।। *लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं*

Share10SendTweet7
Previous Post

रेलवे ट्रैक पर होने वाली वन्यजीव दुर्घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है

Next Post

विधानसभा अध्यक्ष के नेतृत्व में कोटद्वार शहर की समस्याओं पर हुआ रचनात्मक विमर्श : प्रशासन, जनप्रतिनिधियों व नागरिक संगठनों ने मिलकर खोजें समाधान

Related Posts

उत्तराखंड

ग्वालदाम-नंदकेशरी एवं थराली-वांण मार्ग मलबा आने से घंटों रहे बंद

July 29, 2026
1
उत्तराखंड

बुग्यालों में रात्रि प्रवास पर हाईकोर्ट के लगाए गए प्रतिबंध सुप्रीम कोर्ट ने हटाए

July 29, 2026
5
उत्तराखंड

सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विरुद्ध जनभागीदारी से चलाना होगा प्रभावी अभियान : मुख्यमंत्री

July 29, 2026
5
उत्तराखंड

प्रदेश की सबसे कम उम्र की जिला कलेक्टर (DM) के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं अपूर्वा पांडे

July 29, 2026
9
उत्तराखंड

राष्ट्रीय पशु दिवस के तहत दून पुस्तकालय में स्कूली बच्चों के लिए बाघ संरक्षण पर शैक्षिक कार्यक्रम

July 29, 2026
3
उत्तराखंड

आज के दौर में क्यों और बढ़ गया है गुरु पूर्णिमा का महत्व

July 28, 2026
6

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67714 shares
    Share 27086 Tweet 16929
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45786 shares
    Share 18314 Tweet 11447
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38070 shares
    Share 15228 Tweet 9518
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37453 shares
    Share 14981 Tweet 9363
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37370 shares
    Share 14948 Tweet 9343

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

ग्वालदाम-नंदकेशरी एवं थराली-वांण मार्ग मलबा आने से घंटों रहे बंद

July 29, 2026

बुग्यालों में रात्रि प्रवास पर हाईकोर्ट के लगाए गए प्रतिबंध सुप्रीम कोर्ट ने हटाए

July 29, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.