देहरादून। दो दिन की अचानक आई आपदा में उत्तराखंड को बेहाल कर दिया है। अभी तक 64 लोगों के मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग लापता हैं। जगह-जगह यात्री पर्यटक अटके हुए हैं। इस बीच दो बड़ी दुर्घटनाओं ने भी आग में घी का काम किया है। पिथौरागढ़ जिले के मुवानी और देहरादून जिले के त्यूनी में हुई वाहन दुर्घटनाओं मंे 5-5 कुल दस लोगों की मौत हुई है।
जब अक्टूबर 8 तक मानसून समाप्त होने की घोषणा की गई थी, तब किसी को यह आभास नहंी हुआ होगा कि अचानक दो दिन की अतिवृष्ट आएगी और तबाही देकर जाएगी। इस तबाही का अधिकांश प्रभाव कुमाउं क्षेत्र में रहा है। जहां पहाड़ियां टूटी हैं। मकान ध्वस्त हुए हैं और आपदा में कई घर जमीजोद हो गए। हल्द्वानी में गोला नदी पर बना पुल गिरा है तो चल्थी में निर्माणाधीन पुल को बहुत अधिक क्षति पहुंची है। यह आपदा दोहरी मार लेकर लेकर आई है। एक तरफ नदियों का जल स्तर अचानक बढ़ गया, दूसरी तरफ उंचाई वाले क्षेत्रों में हिमपात हुआ है। असमय और बेमौसम आई इस आपदा की मार ने लोगों को उठने तक का मौका नहीं दिया है।
हालात इस कदर खराब हो गए कि चुनाव से ठीक पहले देश के गृह मंत्री को उत्तराखंड आकर यह दिखाने का प्रयास करना पड़ा कि डबल इंजिन की सरकार उत्तराखंड को लेकर गंभीर है।
त्यूनी मार्ग पर कार दुर्घटना में पांच की मौत
त्यूनी के निकट एक अल्टो कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। यह दुर्घटना जहां पर हुई, वह हिमाचल प्रदेश की सीमा के निकट है। एक दिन पहले इसी तरह की वाहन दुर्घटना पिथौरागढ़ जिले के मुवानी क्षेत्र में हुई थी, जहां पर भी पांच लोगों की मौत हो गई थी।











