हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
थराली/देवाल।
विकासखंड देवाल के ग्राम पंचायत देवसारी के अंतर्गत सोडिंग लगा त्रिकोट के रोयाणा तोक के ग्रामीणों के लिए बरसात का मौसम पिछले 13 वर्षों से लगातार कहर बरपा रहा
है।इस वर्ष हो रही बरसात के कारण ग्रामीणों को भारी खतरा उत्पन्न हो गया हैं। ग्रामीणों ने सुरक्षात्मक कार्य अथवा विस्थापन की शासन प्रशासन से मांग की हैं।
रोयाणा तोक के पूर्व पोस्टमास्टर कुंदन सिंह कठैत,खिलाप सिंह कठैत, महिला मंगल दल अध्यक्षा तुलसी देवी,बीना देवी आदि ने बताया कि पिछले 13 वर्षों से अधिक समय से रोयाणा तोक के नीचे बहने वाली पिंडर नदी से लगातार कटाव हों रहा है।जिस का दायरा प्रति वर्ष बढ़ता ही जा रहा है। अब बरसात के महीनों में भारी बारिश के बीच ग्रामीण डर के साये में रतजगा हों कर अपनी रातें गुजारने को मजबूर बनें हुए हैं क्योंकि इस तोक की आबादी और आवासीय मकानों को जहां पिंडर नदी के तट से हो रहे भूस्खलन से खतरा बढ़ता जा रहा है वहीं गांव के पीछे पहाड़ी से बरसती पानी घरों के नीचे से निकल रहा है जिससे आवासीय मकाने लगातार धंस रही है, कई घरों में भू धंसाव के कारण गहरी दरारें तक आ चुकी है वहीं नदी तट की ओर से हो रहे भूस्खलन से गांव के पैदल रास्ते,कृषि भूमि का कटाव का दायरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। रोयाणा तोक में स्थापित लाखों रूपयों की लागत से निर्मित बीएसएनएल का मोबाइल टावर के अलावा दो दर्जन से अधिक आवासीय मकानों को खतरा बना हुआ है,इस वर्ष की अबतक की बरसात में भूस्खलन का दायरा बढ़ कर आवासीय मकानों से करीब 10 मीटर की दूरी तक पहुंच गया हैं, जिससे ग्रामीणों में भय काफी अधिक बढ़ गया है और आवासीय मकानें पूरी तरह से खतरें की जद में आ गए हैं। आवासीय मकानों के आगे की काफी अधिक कृषि भूमि भूस्खलन की भेट चढ़ चुकी हैं। ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाते हुए सम्भावित खतरे का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है, ग्रामीणों ने पहाड़ी वाले हिस्से से बहने वाले पानी की उचित निकासी और नदी तट से हो रहे भूस्खलन को रोकने के लिए सुरक्षात्मक कार्य किये जाने की मांग की हैं ,ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि गांव को भूस्खलन से खतरा बना हुआ है और गांव के पैदल रास्ते और काश्तकारों की कृषि भूमि को नुकसान होने के साथ ही कई आवासीय मकान अब भूस्खलन से हो रहे नुकसान की जद में हैं जिसकी सूचना उनके द्वारा उपजिलाधिकारी थराली को दी गयी थी और स्थानीय प्रशासन से भूस्खलन क्षेत्र और आवासीय मकानों को बने खतरे का निरीक्षण करने की गुहार लगाई गई थी लेकिन स्थानीय प्रशासन की ओर से महज एक राजस्व उपनिरीक्षक को भेजकर स्थानीय प्रशासन ने इतिश्री कर दी और अभी तक भी सुरक्षात्मक कार्यो के लिए कोई स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं दिए गए हैं, ग्रामीण बताया कि वर्ष 2013 से ही इस तोक में भू धंसाव की घटनाएं सामने आई हैं जिससे मकानों के पीछे मलबा और पैदल रास्तो का नुकसान हर बरसात में होता है, पिछले वर्षों भूगर्भ सर्वेक्षण टीम ने भी गांव का सर्वे कर अपनी रिपोर्ट प्रशासन को दी थी जिसमे इसे भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र बताते हुए विस्थापन की शिफारिश की गई थी, लेकिन आज तक भी न तो इस रिपोर्ट पर कोई कार्यवाही हो सकी है और न ही भूस्खलन को रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा कार्य ही हो पाएं हैं, ग्रामीणों ने आवासीय मकानों की सुरक्षा के लिए जल्द से जल्द सुरक्षात्मक कार्य किये जाने अथवा आपदा पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर विस्थापन किए जाने की मांग की है











