• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

राज्य में सगंध पादपों के खेती को किया जा रहा है प्रोत्साहित

16/04/20
in उत्तराखंड, हेल्थ
Reading Time: 1min read
468
SHARES
585
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
भारतवर्ष में औषधीय एवं सुगंध पौधों का इतिहास काफी पुराना रहा है, क्योंकि चिकित्सा एवं सुगंध हेतु इन पौधों का उपयोग होता रहा है। इनके व्यापक एवं व्यावसायिक कृषिकरण की तरफ जन सामान्य में जितनी रुचि वर्तमान में जाग्रत हुई है, उतनी संभवतः पहले कभी नहीं हुई थी। वर्तमान में जहाँ कृषक परंपरागत फसलों को छोड़कर औषधीय एवं सुगंध पौधों की खेती की ओर आकर्षित होने लगे हैं, वहीं उच्च शिक्षा प्राप्त ऐसे युवक भी जो अभी तक खेती.किसानी के कार्य को केवल कम पढ़े.लिखे लोगों का व्यवसाय मानते थे, औषधीय एवं सुगंध पौधों की खेती अपनाकर गौरवान्वित महसूस करने लगे हैं। औषधीय एवं सुगंध पौधों की खेती कर किसान आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो सकते हैं, क्योंकि भारत में औषधीय एवं सुगंध पौधों की खेती करने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं। औषधीय पौधों का उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में किया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 80 प्रतिशत जनसंख्या परंपरागत औषधियों से जुड़ी हुई है।
वर्तमान समय में औषधीय एवं सुगंध पौधों की खेती करने की संभावनाएँ अधिक हैं क्योंकि भारत की जलवायु में इन पौधों का उत्पादन आसानी से लिया जा सकता है। किसानों को औषधीय एवं सुगंध पौधों की खेती के बारे में संपूर्ण जानकारी का अभाव होता है, जिसके चलते किसान परंपरागत खेती करने को मजबूर हैं। परंपरागत खेती की अपेक्षा औषधीय एवं सुगंध पौधों की खेती अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ है, क्योंकि इन फसलों को परंपरागत फसलों की अपेक्षा कम खाद.पानी और कम देखरेख की आवश्यकता पड़ती है। औषधीय एवं सुगंध फसलों में कीटों व बीमारियों का प्रकोप अन्य फसलों की अपेक्षा कम होता है। औषधीय एवं सुगंध पौधों की खेती उपजाऊ मृदाओं के अलावा बंजर भूमि में भी की जा सकती है। चूँकि इनकी खेती के लिए अधिक संसाधनों की आवश्यकता नहीं पड़ती है, इसलिए खेती में लगने वाली लागत कम हो जाती है और मुनाफा ज़्यादा होता है। सुगंध पौधों से प्राप्त होने वाले इसेंशियल ऑइल की देशी बाज़ार के साथ.साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी माँग बढ़ रही है। वहीं भारतीय औषधीय पौधों की भी विश्व बाज़ार में बहुत माँग है।
सुगंध पौधों से प्राप्त होने वाले इसेंशियल ऑइल का उपयोग आधुनिक सुगंध एवं सौंदर्य प्रसाधन उद्योग में व्यापक रूप में हो रहा है। सुगंध पौधों का तेल मुख्यतः इत्र, साबुन, धुलाई का साबुन, घरेलू शोधित्र, तकनीकी उत्पादों तथा कीटनाशक के रूप में होता है। साथ ही सुगंध तेल का उपयोग चबाने वाले तंबाकू, मादक द्रवों, पेय पदार्थों, सिगरेट तथा अन्य विभिन्न खाद्य उत्पादों के बनाने में भी किया जाता है। सुगंध पौधे, जैसे कि पुदीना के तेल का उपयोग च्यूइंगम, दंतमंजन, कन्फेक्शनरी और भोजन पदार्थों में होता है। खस जैसी सुगंध फसल से सुगन्धित द्रव तथा सुगन्ध स्थिरक व फिक्सेटीव के रूप में प्रयोग होता है। सेन्ना, अश्वगंधा, तुलसी, कालमेघ, पिप्पली, आंवला, सफेद मूसली, घृतकुमारी, आर्टीमीसिया, स्टीविया, जावा घास या सिट्रोनेला, लेमन ग्रास, रोशा घास या पामारोजा, खस या वेटीवर, नींबू.सुगंधित गम, जेरेनियम, मेन्थॉल मिंट, पुदीना, जंगली गेंदा, रोजमेरी, पचौली और पत्थरचूर आदि आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण औषधीय एवं सुगंध फसलें हैं जिनकी व्यावसायिक खेती भारत के आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र, आसाम, पश्चिम बंगाल, गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश आदि विभिन्न राज्यों में मुख्य रूप से की जा रही है।
उत्तराखण्ड आदि काल से ही महत्वपूर्ण उपयोगी परिस्थितियों के भण्डार के रूप में विख्यात है। इस क्षेत्र में पाये जाने वाले पहाड़ों की श्रृंखलायें, जलवायु विविधता एवं सूक्ष्म वातावरणीय परिस्थितियों के कारण प्राचीन काल से ही अति महत्वपूर्ण वनौषधियों की सुसम्पन्न सवंधिनी के रूप में जानी जाती हैं।कुदरत ने उत्तराखंड को कुछ ऐसे अनमोल तोहफे दिए हैं, जिनमें अद्भुत गुणों की भरमार है। सरकार किसानों को बंजर भूमि व्यावसायिक खेती कर अच्छा मुनाफा कमाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। दरअसल उत्तराखंड सरकार इस बात पर जोर दे रही कि यदि बंजर भूमि पर किसानों को व्यावसायिक खेती के लिए औषधीय खेती कराई जाए तो उन्हें आमदनी मिलेगी। जिससे उनका स्तर बढ़ सकेगा। जाहिर है कि वर्तमान में औषधीय खेती के लिए कंपनियां भी किसानों को बाजार उपलब्ध करा रही है। इस दौरान राज्य के करीब चालीस हजार किसानों ने औषधीय खेती के जरिए राज्य में एक सौ बीस करोड़ का बाजार स्थापित कर दिया है। जिसको देखते हुए राज्य सरकार ने हर्बल खेती के लिये संभावनाओं को देखते हुए अधिक फोकस किया है।
इस बीच सरकार एमएसएमई के अंतर्गत एरोमा इंडस्ट्री को बढ़ावा देना शुरु किया है। जिसके फलस्वरूप औषधीय खेती करने वाले किसानों को अपने उत्पाद को बेचने के लिए अच्छा बाजार मिल सकेगा। उत्तराखंड के देहरादून, नैनीताल और हरिद्वार जिलों के विभिन्न स्थानों पर क्लस्टर के तहत खेती पर जोर दिया जा रहा है। इस बीच सर्पगंधा, शतावर, इलायची, डेमस्क गुलाब, कैमोमिल, जापानी मिंट के साथ.साथ तेजपात आदि की खेती करायी जा रही है। राज्य के कृषि एवं उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल की माने तो राज्य में किसानों को हर्बल खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। क्योंकि इसमें छुट्टा जानवरों से फसल को नुकसान होने की आशंका कम है। फिलहाल सरकार जड़ी बूटी, औषधीय और सगंध खेती के लिए बाजार को और अधिक वयवस्थित करने की योजना पर कार्य कर रही है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित राष्ट्रीय आयुष मिशन एनएएम योजना के अधीन भारत सरकार ने किसानों को सब्सिडी दी है ताकि जड़ी.बूटियों और औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहित किया जा सके। इस योजना के तहत किसान औषधीय खेती करके अपनी आमदनी बढ़ा सकें, इसके लिए एनएएम योजना के खाद्य प्रसंस्करण विभाग यहां औषधीय खेती को बढ़ावा देने के लिए काम किया जा रहा है। इसमें औषधीय खेती के लिए किसानों को अनुदान दिया जा रहा है।
योजना के दिशा.निर्देशों के मुताबिक उत्तर पूर्वी और पहाड़ी राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू और कश्मीर को वित्तीय सहायता 90ः10 के अनुपात में प्रदान की जाएगी वहीं अन्य राज्यों में यह 60ः40 के अनुपात में दी जायेगी पूरा विश्व इस समय संकट के बहुत बड़े गंभीर दौर से गुजर रहा है। आम तौर पर कभी जब कोई प्राकृतिक संकट आता है तो वो कुछ देशों या राज्यों तक ही सीमित रहता है। लेकिन इस बार ये संकट ऐसा है, जिसने विश्व भर में पूरी मानवजाति को संकट में डाल दिया है। औषधीय एवं सुगंध फसलें औषधीय गुणों में एक है जिसका सेवन करने से हमारा इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है। इम्यूनिटी सिस्टम बढ़ाने के साथ.साथ यह हमारे शरीर को कई रोगों से भी छुटकारा दिलाने में मदद करता है।

Share187SendTweet117
Previous Post

फोन करें घर पर दवा हाजिर

Next Post

चमोली जिले में 23 लोगों को होम क्वारंटीन भेजा गया

Related Posts

उत्तराखंड

श्रीमद् भागवत सप्ताह कथा ज्ञान यज्ञ कलश यात्रा के साथ हुई शुरू

June 8, 2026
30
उत्तराखंड

श्री बालाजी मंदिर में 23वें वार्षिकोत्सव वेदऋचाओं के साथ हुआ आरम्भ

June 8, 2026
27
उत्तराखंड

विकसित भारत-2047 के संकल्प को पूरा करने में सबका सहयोग जरूरी – मुख्यमंत्री

June 8, 2026
4
उत्तराखंड

देहरादून की 30 होनहार बेटियों को मिला नई उड़ान का अवसर

June 7, 2026
11
उत्तराखंड

वीकेंड पर पर्यटकों की पहली पसंद बना लच्छीवाला नेचर पार्क, एक दिन में पहुंचे 07 हजार से अधिक सैलानी

June 7, 2026
80
उत्तराखंड

प्रसव पीड़ित महिला को मीलों चलकर एरेठा से डोली में देवाल पहुंचे ग्रामीण

June 7, 2026
8

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67695 shares
    Share 27078 Tweet 16924
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45780 shares
    Share 18312 Tweet 11445
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38058 shares
    Share 15223 Tweet 9515
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37446 shares
    Share 14978 Tweet 9362
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37332 shares
    Share 14933 Tweet 9333

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

श्रीमद् भागवत सप्ताह कथा ज्ञान यज्ञ कलश यात्रा के साथ हुई शुरू

June 8, 2026

श्री बालाजी मंदिर में 23वें वार्षिकोत्सव वेदऋचाओं के साथ हुआ आरम्भ

June 8, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.