डोईवाला, (प्रियांशु सक्सेना)। शहीद दुर्गा मल्ल पीजी कॉलेज, डोईवाला के छात्रसंघ चुनाव में उत्तराखंड स्टूडेंट फेडरेशन (यूएसएफ) ने पहली बार चुनाव मैदान में उतरते हुए अध्यक्ष पद पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यूकेडी के छात्र संगठन यूएसएफ के प्रत्याशी मोहित ममगाईं ने 48 मतों के अंतर से अध्यक्ष पद पर जीत हासिल कर एबीवीपी के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को चुनौती दी। चुनाव परिणाम के बाद यूएसएफ की इस जीत को लेकर छात्र राजनीति में चर्चा तेज है।
महज करीब एक माह की तैयारी में यूएसएफ द्वारा किए गए इस चुनावी उलटफेर के पीछे संगठन की रणनीति और जमीनी स्तर पर किए गए प्रयासों को अहम माना जा रहा है। यूएसएफ गढ़वाल मंडल चुनाव प्रभारी एवं चुनाव अभियान से जुड़े जतिन सिंह चौहान की भूमिका भी इस दौरान प्रमुख रही। संगठन से जुड़े लोगों के अनुसार, जतिन ने प्रचार अभियान की रणनीति तैयार करने से लेकर छात्रों के बीच संवाद, रैलियों, प्रचार और संगठन के कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर सक्रिय करने तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। संगठन से जुड़े लोगों ने डॉ. सौम्य चौधरी की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया है।
यूएसएफ के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम अध्यक्ष पद के प्रत्याशी मोहित ममगाईं को संगठन से जोड़ना रहा। इसके बाद टीम ने कॉलेज के छात्रों के बीच पहुंचकर संगठन की विचारधारा और उत्तराखंड से जुड़े मुद्दों को लेकर संवाद किया। नए छात्रों के बीच संपर्क बढ़ाने के साथ ही प्रचार अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। समर्थकों का कहना है कि इसी रणनीति ने चुनाव के दौरान संगठन को मजबूती दी।
लगातार कई वर्षों से एबीवीपी के प्रभाव वाले कॉलेज में यूएसएफ की जीत को संगठन की पहली बड़ी चुनावी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। संगठन से जुड़े लोगों के मुताबिक, जतिन सिंह चौहान को यूकेडी से जुड़े हुए करीब 10 महीने हुए हैं। वहीं, यूएसएफ गढ़वाल मंडल चुनाव प्रभारी के रूप में उनका कार्यकाल करीब 16 दिन का रहा। इतने कम समय में चुनावी रणनीति तैयार कर उसे धरातल पर लागू करना संगठन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जतिन की कोर टीम से जुड़े लोगों का कहना है कि उन्होंने चुनाव के दौरान विभिन्न छात्र समूहों के बीच संवाद स्थापित करने और छात्रों की प्राथमिकताओं को समझने पर विशेष ध्यान दिया। उनका दावा है कि छात्रों के साथ सीधे संवाद और जमीनी संपर्क ने यूएसएफ के पक्ष में माहौल बनाने में भूमिका निभाई।
जीत के बाद जतिन सिंह चौहान ने कहा कि यह जीत केवल डोईवाला या यूएसएफ की जीत नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे लोगों और बदलाव की विचारधारा रखने वाले छात्रों की जीत है। उन्होंने कहा कि यह परिणाम छात्र राजनीति में नए विकल्प और नई सोच के लिए जगह बनने का संकेत है।











