• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

किसे सत्ता की कुर्सी सौंपना चाहेंगे उत्तराखंड के लोग?

14/01/21
in उत्तराखंड, देहरादून, राजनीति
Reading Time: 1min read
222
SHARES
277
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

शंकर सिंह भाटिया
देहरादून। उत्तराखंड 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए सजने लगा है। राजनीतिक दल अंतिम तैयारी में जुट गए हैं। सत्ताधारी भाजपा अभी भी मोदी के नेतृत्व के भरोसे है। कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर तलवारें खिंची हुई हैं। राज्य में सत्ता की नई दावेदार आप पार्टी और सभी को दरकिनार कर सीधे भाजपा से टकराने की मूड में दिखती है। आप इस टकराव का राजनीतिक लाभ लेने कोशिश में जुटी हुई है। क्षेत्रीय पार्टियां पूरे चार साल तक अपनी ढपली से अपना राग अलाप रही थी, अब ऐन मौके पर एकजुटता की दुहाई दे रही हैं।
भाजपा और कांग्रेस अब तक दस-दस साल उत्तराखंड की सत्ता का उपभोग कर चुके हैं। जब तक 2022 के चुनाव होंगे भाजपा करीब सवा ग्यारह साल सत्ता सुख ले चुकी होगी। इन दोनों सत्तानसीन पार्टियों ने उत्तराखंड के कम से कम उन लोगों को सोचने पर मजबूर किया है जो किसी दल के पिट्ठू नहीं हैं, कि यदि इनमें से किसी एक को फिर से पांच साल के लिए उत्तराखंड फिर से सौंपा जाता है तो ये कुछ बेहतर करने की सोच के साथ आगे बढ़ सकते हैं? जिन्होंने दस-ग्यारह साल के शासन में अब तक ऐसा कुछ सकारात्मक नहीं किया, उनसे पांच और साल में सकारात्मक करने की अपेक्षा की जा सकती है?
दिल्ली में सत्तासीन आप पार्टी अपने को उत्तराखंड में एक बेहतर विकल्प के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रही है। हालांकि सत्ता तक पहुंचने की दौड़ में आप अभी बहुत पीछे है, लेकिन बिल्कुल भाजपा कांग्रेस की तरह दिल्ली हाई कमान से संचालित होने वाली आप उत्तराखंड में कुछ अगल कर पाएगी, यह सोचा जा सकता है? हमने बहुत नजदीक से देखा, बसपा करीब पंद्रह सालों तक उत्तराखंड मंे तीसरी राजनीतिक ताकत बनी रही। लेकिन इस पार्टी ने कभी भी बसपा के उत्तराखंड के अपने नेताओं पर भरोसा नहीं किया, उत्तर प्रदेश समेत दूसरे प्रदेशों के बसपा के नेता उत्तराखंड में इस पार्टी को हांकते रहे। इसका परिणाम यह निकला कि आज बसपा इस राज्य में शून्य पर है। हरिद्वार तथा उधमसिंह नगर में प्रभाव दिखाने वाली बसपा अब राजनीतिक परिदृश्य से ओझल हो चुकी है। उसे अब एक-आद सीटों का भी दावेदार नहीं माना जा रहा है। वही चरित्र आप ने भी शुरूआत से दिखाया है। इस स्थिति में वह उत्तराखंड में अपनी पार्टी को कितना जमा पाएंगे, आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है।
20 साल से अधिक के उत्तराखंड राज्य के सफर में यह बात साफ हो गई है कि दिल्ली धारित पार्टियों का रुख उत्तराखंड का पक्षधर नहीं हो सकता है। उनके लिए उत्तराखंड सिर्फ तीन मैदानी जिले हैं, वह बातें कुछ भी करें पहाड़ उनके लिए पराया ही है। उनकी सोच में पहाड़ के पराया होने के साफ प्रमाण भी दिखाई देते हैं। उत्तराखंड बनने से पहले पहाड़ के स्कूलों में आज के मुकाबले अधिक संख्या में मास्टर होते थे, अस्पतालों में डाक्टर तथा पैरा मेडिकल कर्मचारी भी अधिक संख्या में थे। स्कूलों तथा अस्पतालों की हालत बेहतर करने की सोच से उत्तराखंड आंदोलन शुरू हुआ था, लेकिन राज्य बनने के बाद ये और भी बदतर हुए हैं। पलायन की स्थिति सन् 2000 से पहले के मुकाबले इन बीस सालों में और भी भयावह हुई है। दो दशक तक सत्ता का उपभोग करने वाले इस जिम्मेदारी से बच सकते हैं? वे किस मुंह से कह सकते हैं कि उन्होंने संयुक्त उत्तर प्रदेश के मुकाबले उत्तराखंड को बेहतर बनाया है? जब एक-एक दशक सत्ता भोगने के बाद वे ऐसा नहीं कर पाए हैं तो वे अगले और पांच सालों में बेहतर कर पाएंगे? कतई नहीं, उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।
उत्तराखंड में बेहतर विकल्प क्या हो सकता है? देश के बहुत सारे राज्यों में क्षेत्रीय दल बेहतर काम कर रहे हैं। उन राज्यों में दिल्ली से नियंत्रित होने वाले दल उनके सामने नतमस्तक हैं। उत्तराखंड में क्षेत्रीय दल उक्रंाद का एक बेहतर इतिहास है। जिसने एक सफल राज्य आंदोलन का नेतृत्व किया। लेकिन राज्य बनने के बाद इस दल के नेतृत्व ने जो निकृष्टता दिखाई है, राज्य के लोगों का उक्रांद से भरोसा समाप्त हो गया है। राज्य के लोग आज भी उक्रंाद की तरफ आशा भरी निगाहों से देखते हैं। लेकिन उक्रांद नेतृत्व ने हमेशा लोगों की आशाओं पर तुषारापात किया है। इस पार्टी का दुर्भाग्य यह है कि जो विधायक बन गया वह पार्टी से बड़ा हो गया।
इस क्षेत्रीय पार्टी का नेतृत्व कैसे काम कर रहा है? इसका ताजा उदाहरण है, पार्टी से छह चुके हुए लोगों का एक संचालन मंडल बनाया गया है। दल के यह सभी संचालक हारे हुए लोग हैं, जिनके पास दल को इन परिस्थितियों में बजबूती से आगे ले जाने का कोई रोड मैप नहीं है। इनकी वजह से यह क्षेत्रीय दल ठहरे हुए पानी का एक सड़-गल गया तालाब लगता है। यदि कुछ अक्षम लोगों को संरक्षण देने की जगह पर दल को ताकत देने की कोशिश की गई होती तो दल आज युवा पीढ़ी के हाथों में होता। जिसका पानी ठहरे हुए तालाब की तरह सढ़-गल नहीं गया होता, बल्कि सदा नीरा नदी की धारा की तरफ प्रवाहित होता हुआ दिखाई देता। बहुत सारे लोग जो अपने-अपने दलों से नाराज होते हैं, वे उक्रांद को एक विकल्प के तौर पर इसीलिए नहीं देखते।
दिवाकर भट्ट को ही ले लीजिए जिन्होंने स्थिरता के लिए भाजपा सरकार को समर्थन दिया था, पांच साल कैबिनेट मंत्री रहते हुए कभी अपने दल को मजबूती देने का प्रयास नहीं किया। पांच साल बाद उक्रांद को अंगूठा दिखाकर वह भाजपा के ही हो गए। यदि भाजपा में टिकट मिल गया होता तो वह कभी उक्रांद की तरफ नहीं देखते। उनका लगातार उक्रांद अध्यक्ष के तौर पर तीसरा कार्यकाल चल रहा है। इस तरह के अवसरवादी नेतृत्व वाले दल पर भला कौन भरोसा कर सकता है? कुल मिलाकर छह चुके हुए नेताओं को संरक्षण देने के लिए एक क्षेत्रीय दल के भविष्य पर मिट्टी डाली जा रही है। इस तरह की अवसरवादिता दिखाकर भी उक्रांद के नेता आज यह कहने की स्थिति में नहीं हैं कि यदि उनके कुछ विधायक जीतते हैं, तो वे भाजपा कांग्रेस के साथ सरकार बनाने नहीं जाएंगे। तब इन पर कोई भरोसा क्यों करेगा? लोग सोचते हैं कि आपको विधायक बनाकर भाजपा-कांग्रेस की गोद में ही बिठाना है तो उन्हें ही जिताकर क्यों न भेजा जाए? उक्रांद को यदि एक राजनीतिक दल के रूप में आगे बढ़ना है तो नए लोगों को नेतृत्व सौंपना होगा। जनता के पास जाकर कसम खानी होगी कि भाजपा-कांग्रेस की सरकारों में उनके विधायक कभी साझीदार नहीं होंगे। क्या उक्रांद इन परिवर्तनों के लिए तैयार है?
राज्य में बने दूसरे क्षेत्रीय दल अभी इस लायक भी नहीं बने हैं कि उन्हें एक-दो सीटों का दावेदार माना जाय। पिछले चार सालों में अपने दम पर खम ठोकने वाले ये दल अब क्षेत्रीय दलों की एकता की बात करने लगे हैं, जो सिर्फ चुनाव तक ही होगी। उसके बाद ये सबकुछ भूल जाएंगे।
राज्य में एक विश्वसनीय क्षेत्रीय दलों के नेतृत्व को उभरने की दरकार है। उक्रांद जैसे दल संसाधनों का सवाल खड़े करते हैं। आप जैसे दल इसका उदाहरण हैं। आप ने यहीं से संसाधन खड़े कर अपने दल की गतिविधियों को मजबूत आधार दिया है, उत्तराखंड का कोई दूसरा क्षेत्रीय दल ऐसा क्यों नहीं कर सकता? इसके लिए राजनीतिक परिपक्वता और दूरदर्शी सोच की आवश्यकता होगी, जो उत्तराखंड के क्षेत्रीय दल दिखा नहीं पा रहे हैं।

Share89SendTweet56
Previous Post

उत्तराखंड को मिली 1,1,3000 डोज कोविड वैक्सीन

Next Post

वैज्ञानिकों ने किया रामगंगा में बनने वाली झील का निरीक्षण

Related Posts

उत्तराखंड

देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार में ‘ध्वज वंदन समारोह आयोजित

January 18, 2026
8
उत्तराखंड

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में ‘ध्वज वंदन समारोह

January 18, 2026
5
उत्तराखंड

कोटद्वार प्रेस क्लब नई कार्यकारिणी में अजय खंतवाल अध्यक्ष व सचिव पद पर दिनेश पाल सिंह गुसाईं को सर्वसम्मति से चुना गया

January 18, 2026
18
उत्तराखंड

वीरान हैं विश्व प्रसिद्ध हिमक्रीड़ा स्थल औली

January 18, 2026
8
उत्तराखंड

बोर्ड परीक्षा की तैयारी में जुटे छात्र-छात्राएं

January 18, 2026
7
उत्तराखंड

एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

January 18, 2026
8

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67583 shares
    Share 27033 Tweet 16896
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45769 shares
    Share 18308 Tweet 11442
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38040 shares
    Share 15216 Tweet 9510
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37430 shares
    Share 14972 Tweet 9358
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37312 shares
    Share 14925 Tweet 9328

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार में ‘ध्वज वंदन समारोह आयोजित

January 18, 2026

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में ‘ध्वज वंदन समारोह

January 18, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.