• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

पंडित बद्रीदत्त पांडे को अहिंसक आंदोलन ने दी कुमाऊं केसरी की उपाधि

15/02/21
in अल्मोड़ा, उत्तराखंड
Reading Time: 1min read
665
SHARES
831
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
पंडित बद्रीदत्त पांडे मूल रूप से अल्मोड़ा के रहने वाले थे। वह अग्रणी स्वतंत्रता सेनानी भी रहे। उनका जन्म 15 फरवरी 1882 को कनखल, हरिद्वार में हुआ। माता.पिता का निधन होने के बाद वह अपने घर आ गए और पढ़ाई की। उन्होंने 1903 में नैनीताल के एक स्कूल में शिक्षण कार्य किया। वह कुछ दिनों बाद देहरादून चले गए और सरकारी नौकरी करने लगे। लेकिन उन्होंने जल्द नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में आ गए। उन्होंने 1903 से 1910 तक देहरादून में लीडर नामक अखबार में काम किया। 1913 में उन्होंने अल्मोड़ा अखबार की स्थापना की। उन्होंने इस अखबार के जरिये स्वतंत्रता आंदोलन को गति देने का काम किया। इसी कारण कई बार अंग्रेज अफसर इस अखबार के प्रकाशन पर रोक लगा देते थे। अल्मोड़ा अखबार को ही उन्होंने शक्ति अखबार का रूप दिया। शक्ति साप्ताहिक अखबार आज भी लगातार प्रकाशित हो रहा है।

स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले एवं कुली बेगार प्रथा को बंद करवाने वाले अल्मोड़ा के बद्री दत्त पांडे की आदम कद मूर्ति नगर के रैमजे इंटर कालेज के सामने स्थित पार्क में लगाई जाएगी। जिला योजना से स्थापित होने वाली इस मूर्ति के लिए पालिका की बोर्ड मीटिंग में प्रस्ताव पास कर दिया गया है। पंडित बद्रीदत्त पांडे ने 1921 में कुली बेगार आंदोलन के लिए लोगों को तैयार किया था। इस आंदोलन का उद्देश्य कुली बेगार प्रथा बंद कराने के लिए अंग्रेजों पर दबाव बनाना था। आंदोलन की सफलता के बाद लोगों ने उन्हें कुमाऊं केसरी की उपाधि प्रदान की। इस आंदोलन से प्रभावित होकर महात्मा गांधी ने इस आंदोलन को रक्तहीन क्रांति का नाम भी दिया था। इससे पहले उन्होंने 1913 में अल्मोड़ा अखबार की स्थापना की। जिसके माध्यम से उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन को गति देने का काम किया। 1921 में कुली बेगार आंदोलन में बद्री दत्त पांडे की भूमिका को आज भी लोग याद करते है। उन्होंने इस आंदोलन के दौरान अंग्रेजों के दस्तावेजों को बागेश्वर में स्थित सरयू नदी में बहा दिया था। वह स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कई बार जेल भी गए। आजादी के बाद भी अल्मोड़ा में रहकर वह सामाजिक कार्यों में सक्रियता से हिस्सा लेते रहे। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को मिलने वाली पेंशन आदि का लाभ भी नहीं लिया। कुमाऊं केसरी बद्रीदत्त पांडे जी का पत्रकारिता, स्वतंत्रता संग्राम और सामजिक सरोकारों में योगदान अविस्मरणीय है। बद्रीदत्त जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन करता हूं।

उनके अद्वितीय योगदान को याद रखते हुए सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर उनको समर्पित किया गया है। उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश में पत्र.पत्रिकाओं के प्रकाशन के क्षेत्र में 1871 में अल्मोड़ा से प्रकाशित अल्मोड़ा अखबार का विशिष्ट स्थान है। प्रमुख अंग्रेजी पत्र पायनियर के समकालीन इस समाचार पत्र का सरकारी रजिस्ट्रेशन नंबर 10 था, यानी यह देश का 10वां पंजीकृत समाचार पत्र था। 1870 में स्थापित डिबेटिंग क्लब के प्रमुख बुद्धि बल्लभ पन्त ने इसका प्रकाशन प्रारंभ किया। इसके 48 वर्ष के जीवनकाल में इसका संपादन क्रमशः बुद्धिबल्लभ पंत, मुंशी इम्तियाज अली, जीवानन्द जोशी, 1909 तक मुंशी सदानन्द सनवाल, 1909 से 1913 तक विष्णुदत्त जोशी तथा 1913 के बाद बद्रीदत्त पाण्डे ने किया। इसे उत्तराखंड में पत्रकारिता की पहली ईंट भी कहा गया है।

प्रारम्भिक तीन दशकों में अल्मोड़ा अखबार सरकारपरस्त था फिर भी इसने औपनिवेशिक शासकों का ध्यान स्थानीय समस्याओं के प्रति आकृष्ट करने में सफलता पाई। कभी पाक्षिक तो कभी साप्ताहिक रूप से निकलने वाले इस पत्र ने आखिर 1910 के आसपास से बंग.भंग की घटना के बाद अपने तेवर बदलकर अंग्रेजों के अत्याचारों से त्रस्त पर्वतीय जनता की मूकवाणी को अभिव्यक्ति देने का कार्य किया और कुली बेगार, जंगल बंदोबस्त, बाल शिक्षा, मद्य निषेध, स्त्री अधिकार आदि पर प्रखर कलम चलाई। 1913 में कुमाऊँ केसरी बद्री दत्त पांडे के अल्मोड़ा अखबार के संपादक बनने के बाद इस पत्र का सिर्फ स्वरूप ही नहीं बदला वरन् इसकी प्रसार संख्या भी 50-60 से बढकर 1500 तक हो गई। इसमें बेगार, जंगलात, स्वराज, स्थानीय नौकरशाही की निरंकुशता पर भी इस पत्र में आक्रामक लेख प्रकाशित होने लगे। 14 जुलाई 1913 के अंक में प्रकाशित संपादकीय को देखने से स्पष्ट होता है कि यह पत्र कुमाऊं में विकसित होती राजनैतिक चेतना का कैसा प्रतिबिम्ब बन रहा था।

अंग्रेज डिप्टी कमिश्नर डायबिल सहम गया, उस सभा पर बन्दूक से गोली चलाने की उसकी हिम्मत हुई ही नहीं और वह वहाँ से उल्टे कदम लौट गया था। ऐसे थे हमारे कुमाऊँ केसरी बद्रीदत्त पाण्डेय निर्भीक निडर इसीलिए वे कुर्मांचल केसरी के नाम से आज भी हमारे इतिहास के पन्नों में प्रसिद्ध हैं। साल 1913 में कुमाऊं के तत्कालीन प्रमुख अखबार अल्मोड़ा अख़बार के संपादक बद्रीदत्त पाण्डे बनें। इससे पहले वह इलाहाबाद से निकलने वाले अंग्रेजी दैनिक अख़बार लीडर के सहायक मैनेजर और सब.एडिटर रहे और बाद में देहरादून से निकलने वाली कास्मो पोलिटिन के संपादक रहे। 1913 से 1918 तक अल्मोड़ा अख़बार जिस बेबाकी से छपा उसने न केवल अंग्रेजों को असहज कर दिया बल्कि इस पूरे क्षेत्र में राजनैतिक जागृति भी लाया। 1918 में अल्मोड़ा अख़बार में दो लेख छपे, जी हजूरी होली और लोमश की भालूशाही नाम से छपे दोनों व्यंग्य अल्मोड़ा अख़बार के सम्पादकीय थे। अल्मोड़ा अख़बार से 1000 रुपये की ज़मानत मांगी गयी और व्यवस्थापक सदानंद सनवाल का इस्तीफा माँगा गया। अब अंग्रेजों के सामने अल्मोड़ा अख़बार कहा झुकता सो अल्मोड़ा अख़बार बंद कर दिया गया।

आजादी के बाद भी जब भारत और चीन युद्ध हुआ तो बद्रीदत्त पाण्डे अपने जीवन में प्राप्त दो सोने के पदक भारत सरकार को दान में दे दिए। कुमाऊं क्षेत्र में आजादी की अलख जगाने वाले बद्रीदत्त पाण्डे का सबसे महत्वपूर्ण योगदान उनकी किताब कुमाऊं का इतिहास है। 1937 में बद्रीदत्त पाण्डे द्वारा लिखी गयी यह किताब आज भी कुमाऊं क्षेत्र के इतिहास के संदर्भ में सबसे प्रासंगिक पुस्तक मानी जाती है।

Share266SendTweet166
Previous Post

विष्णु के चरण स्पर्श करते ही शांत हो गया रौद्र धौली गंगा का प्रवाह

Next Post

तपोवन टनल से तीन शव और मिले, अभी टी-प्वाइंट तक नहीं पहुंच सकी राहत टीम

Related Posts

उत्तराखंड

भागीरथी क्षेत्र में अवैज्ञानिक विकास से आपदा का खतरा

April 4, 2026
6
उत्तराखंड

बीता सालः घटनाओं ने बदली उत्तराखंड की दिशा

April 4, 2026
4
उत्तराखंड

विजयनगर साम्राज्य की राजधानी की एक झलक देने का प्रयास करती है हम्पी -उत्कर्ष से अपकर्ष तक

April 4, 2026
5
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास मंत्री से भेंट कर राज्य से संबंधित विभिन्न विषयों पर की चर्चा

April 4, 2026
5
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया दून बुक फेस्टिवल-2026 का शुभारंभ

April 4, 2026
6
उत्तराखंड

स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने में फार्मासिस्टों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण : ऋतु खंडूरी भूषण

April 4, 2026
19

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67667 shares
    Share 27067 Tweet 16917
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45773 shares
    Share 18309 Tweet 11443
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38050 shares
    Share 15220 Tweet 9513
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37438 shares
    Share 14975 Tweet 9360
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37326 shares
    Share 14930 Tweet 9332

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

भागीरथी क्षेत्र में अवैज्ञानिक विकास से आपदा का खतरा

April 4, 2026

बीता सालः घटनाओं ने बदली उत्तराखंड की दिशा

April 4, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.