डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड में मॉनसून की रफ्तार अब धीमी पड़ सकती है। गुरुवार को प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र में एक से दो दौर भारी बारिश के हो सकते हैं, जबकि मैदानी क्षेत्रों में कहीं-कहीं गरज चमक के साथ मध्यम बारिश होने की संभावना है। शुक्रवार को भी इसी तरह की स्थिति रहने का पूर्वानुमान है। मौसम विज्ञान केंद्र बारिश और आकाशीय बिजली चमकने का येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विज्ञानियों ने संवेदनशील इलाकों में कहीं-कहीं हल्के से मध्यम भूस्खलन और चट्टान गिरने के कारण सड़कों के अवरुद्ध होने की चेतावनी भी जारी की है
भूस्खलन की आशंका वाले संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की हिदायत भी दी गई है। बुधवार को देहरादून का अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। जबकि न्यूनतम तापमान 25.2 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विज्ञान केंद्र के निर्देशक के अनुसार पर्वतीय जनपदों में कहीं-कहीं एक से दो दौर तेज बारिश के हो सकते हैं। यहां के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है, जबकि देहरादून सहित मैदानी क्षेत्र में गर्जन के साथ मध्यम बारिश होने का अनुमान है। उत्तराखंड में मॉनसून की रफ्तार अब धीमी पड़ सकती है। गुरुवार को प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र में एक से दो दौर भारी बारिश के हो सकते हैं, जबकि मैदानी क्षेत्रों में कहीं-कहीं गरज चमक के साथ मध्यम बारिश होने की संभावना है। शुक्रवार को भी इसी तरह की स्थिति रहने का पूर्वानुमान है। मौसम विज्ञान केंद्र बारिश और आकाशीय बिजली चमकने का येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विज्ञानियों ने संवेदनशील इलाकों में कहीं-कहीं हल्के से मध्यम भूस्खलन और चट्टान गिरने के कारण सड़कों के अवरुद्ध होने की चेतावनी भी जारी की है।भूस्खलन की आशंका वाले संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की हिदायत भी दी गई है। बुधवार को देहरादून का अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। जबकि न्यूनतम तापमान 25.2 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विज्ञान केंद्र के निर्देशक के अनुसारपर्वतीय जनपदों में कहीं-कहीं एक से दो दौर तेज बारिश के हो सकते हैं। यहां के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है, जबकि देहरादून सहित मैदानी क्षेत्र में गर्जन के साथ मध्यम बारिश होने का अनुमान है। कैलाश मार्ग पर मालपा से कुछ दूर भारी भूस्खलन हुआ है। शुक्रवार को हुए भूस्खलन से तवाघाट-लिपुलेख मोटर मार्ग बंद हो गया है। रास्ता बंद होने की वजह से दोनों ओर वाहन फंस गए हैं। लोग पैदल आवाजाही कर रहे हैं।मांत की तीनों घाटियों को जोड़ने वाली धारचूला-तवाघाट सड़क दो जगहों पर मलबा और बोल्डर आने से बाधित रही। तवाघाट-गुंजी सड़क मलघाट और गर्बाधार में बंद होने से बंद रही। सड़क बंद होने से दारमा, व्यास, चौदास घाटी का संपर्क तहसील मुख्यालय से 11 घंटे तक कटा रहा। सीमांत की तीनों घाटियों को जोड़ने वाली धारचूला-तवाघाट सड़क दो जगहों पर मलबा और बोल्डर आने से बाधित रही। तवाघाट-गुंजी सड़क मलघाट और गर्बाधार में बंद होने से बंद रही। सड़क बंद होने से दारमा, व्यास, चौदास घाटी का संपर्क तहसील मुख्यालय से 11 घंटे तक कटा रहा। शाम चार बजे सड़क सुचारु होने पर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। सीमांत क्षेत्र की 13 ग्रामीण सड़कें मलबा आने से बंद हैं। इसके चलते ग्रामीणों को आवाजाही में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार ड्योरा-बारमो, तोली-शिलिंगया, सोबला-उमचिया, बंगापानी-जाराजिबली, होकरा-नामिक, बांसबगड़-धामी गांव, एलागाड़-जुम्मा, नाचनी-भैंसकोट सड़कें बंद हैं। इनके अलावा घट्टाबगड़-तांकुल, डीडीहाट-आदिचौरा-सिन्नी, छेड़ा-आगर, छोटी पांगला-जयकोट कुरीला, बगीचा-सिन्याखोला, सल्ला-रोतगड़ा सड़कों पर यातायात बाधित रहा। इनमें से कई सड़कें लंबे समय से बंद होने से ग्रामीण खासे परेशान हैं। बंद सड़कों के बीच मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती बन रहा है। नाचनी-भैंसकोट सड़क बंद होने से भैंसकोट के ग्रामीणों को एक बीमार बुजुर्ग को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ा। सीमांत क्षेत्र की 13 ग्रामीण सड़कें मलबा आने से बंद हैं। इसके चलते ग्रामीणों को आवाजाही में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार ड्योरा-बारमो, तोली-शिलिंगया, सोबला-उमचिया, बंगापानी-जाराजिबली, होकरा-नामिक, बांसबगड़-धामी गांव, एलागाड़-जुम्मा, नाचनी-भैंसकोट सड़कें बंद हैं। इनके अलावा घट्टाबगड़-तांकुल, डीडीहाट-आदिचौरा-सिन्नी, छेड़ा-आगर, छोटी पांगला-जयकोट कुरीला, बगीचा-सिन्याखोला, सल्ला-रोतगड़ा सड़कों पर यातायात बाधित रहा। इनमें से कई सड़कें लंबे समय से बंद होने से ग्रामीण खासे परेशान हैं। बंद सड़कों के बीच मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती बन रहा है। नाचनी-भैंसकोट सड़क बंद होने से भैंसकोट के ग्रामीणों को एक बीमार बुजुर्ग को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ा। सीमांत जिले के अधिकांश क्षेत्रों में जहां रुक-रुक कर हल्की बारिश हो रही है वहीं बंगापानी में मानसून खूब बरस रहा है। इससे मंदाकिनी नदी भी उफान पर है। क्षेत्र में पहले हुई तेज बारिश से किसानों की मक्के की फसल चौपट हो गई थी। अब लगातार हो रही बारिश से सब्जियों को भी नुकसान पहुंच रहा है।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











