डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के उत्तरकाशी शहर से लगभग 124 किलोमीटर दूर स्थित है माँ यमुना का पवित्र यमुनोत्री मंदिर। यमुनोत्री मंदिर लगभग 10,804 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यमुनोत्री उत्तराखंड के चार धामों में से एक पवित्र धाम है जहाँ से चारधाम यात्रा की शुरुवात होती है। यमुनोत्री मंदिर के पास ही प्राकृतिक रूप से गर्म पानी का एक कुंड है जिसे सूर्यकुंड कहा जाता है। इसी सूर्यकुंड के समीप ही एक शिला भी है जिसे “दिव्य ज्योति शिला या दिव्य प्रकाश शिला” कहा जाता है। माँ यमुना की पूजा करने से पहले इस शिला की पूजा की जाती है। माना जाता है कि जब माँ यमुना धरती पर अवतरित हुई थी तो उनके चरण सबसे पहले इसी शिला पर पड़े थे। इसीलिए श्रद्धालु सूर्यकुंड में आलू व चावल के प्रसाद को पका कर सबसे पहले इसी दिव्य ज्योति शिला का पूजन करते हैं फिर उसके बाद माँ यमुना की पूजा की जाती है उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के उत्तरकाशी शहर से लगभग 124 किलोमीटर दूर स्थित है माँ यमुना का पवित्र यमुनोत्री मंदिर। यमुनोत्री मंदिर लगभग 10,804 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यमुनोत्री उत्तराखंड के चार धामों में से एक पवित्र धाम है जहाँ से चारधाम यात्रा की शुरुवात होती है। यमुनोत्री मंदिर के पास ही प्राकृतिक रूप से गर्म पानी का एक कुंड है जिसे सूर्यकुंड कहा जाता है। इसी सूर्यकुंड के समीप ही एक शिला भी है जिसे “दिव्य ज्योति शिला या दिव्य प्रकाश शिला” कहा जाता है। माँ यमुना की पूजा करने से पहले इस शिला की पूजा की जाती है। माना जाता है कि जब माँ यमुना धरती पर अवतरित हुई थी तो उनके चरण सबसे पहले इसी शिला पर पड़े थे। इसीलिए श्रद्धालु सूर्यकुंड में आलू व चावल के प्रसाद को पका कर सबसे पहले इसी दिव्य ज्योति शिला का पूजन करते हैं फिर उसके बाद माँ यमुना की पूजा की जाती है यमुनोत्री धाम यात्रा मार्ग स्थित स्यानाचट्टी कस्बे में एक बड़ा हादसा टल गया. यमुनोत्री हाईवे पर सक्रिय भूस्खलन जोन से अचानक हल्के मलबे के साथ एक विशालकाय बोल्डर नीचे आ गिरा. बोल्डर पहले हाईवे के ऊपरी हिस्से से गुजरते हुए सड़क खोलने में लगी मशीन और वहां कार्यरत मजदूरों के बेहद करीब से निकला. संयोगवश सभी समय रहते सुरक्षित स्थान पर हट गए, जिससे बड़ा हादसा होने से बच गया. इसके बाद बोल्डर हाईवे किनारे बने सार्वजनिक शौचालय को बुरी तरह क्षतिग्रस्त करता हुआ नीचे आवासीय बस्ती की ओर जा गिरा. राहत की बात यह रही कि बोल्डर किसी मकान से टकराने के बजाय उससे कुछ दूरी पर जाकर रुका, जिससे जनहानि नहीं हुई.स्थानीय लोगों के अनुसार घटना के समय मंदिर परिसर और सड़क के आसपास लोगों की आवाजाही नहीं थी. यदि उस समय श्रद्धालु, स्थानीय लोग अथवा वाहन वहां मौजूद होते तो बड़ा हादसा हो सकता था. घटना के बाद क्षेत्र में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया. सूचना मिलने पर संबंधित विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. स्यानाचट्टी कस्बा इस मानसून में चारों ओर से प्राकृतिक आपदाओं के खतरे के बीच घिरा हुआ है. गत वर्ष मानसून के दौरान कुपड़ा खड्ड में आई आपदा के निशान अभी पूरी तरह मिटे भी नहीं हैं. वहीं यमुना नदी में बने झीलनुमा क्षेत्र का खतरा भी अब तक बरकरार है, जिससे पूरे कस्बे के अस्तित्व पर संकट बना हुआ है. इसके साथ ही कस्बे के ऊपर स्थित पहाड़ी में सक्रिय हुए बड़े भूस्खलन जोन ने लोगों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है. बारिश के चलते पहाड़ी लगातार दरक रही है और समय-समय पर बोल्डर तथा भारी मात्रा में मलबा हाईवे पर आ रहा है. यही कारण है कि यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग बार-बार बाधित हो रहा है. शुक्रवार से यह मार्ग इसी भूस्खलन क्षेत्र में बंद पड़ा हुआ है और सीमा सड़क संगठन तथा संबंधित एजेंसियां मार्ग को सुचारू करने में जुटी हैं. हालांकि लगातार पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण सड़क खोलने के कार्य में भी भारी जोखिम बना हुआ है. स्यानाचट्टी में हालात दिन-प्रतिदिन चिंताजनक होते जा रहे हैं. एक ओर ऊपर से गिरते बोल्डरों का खतरा है तो दूसरी ओर यमुना नदी और कुपड़ा खड्ड का लगातार बढ़ता दबाव लोगों की चिंता का कारण बना हुआ है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता. शनिवार की घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि स्यानाचट्टी में खतरा अभी टला नहीं है. लगातार हो रही बारिश के बीच प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ मार्ग को सुरक्षित एवं सुचारू बनाए रखना है. स्थानीय लोग भी लगातार मौसम खराब रहने तक अनावश्यक आवाजाही से बचने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील कर रहे हैं मलबा और बोल्डर आने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। हाईवे को दोबारा खोलने के लिए सड़क चौड़ीकरण कार्य में लगी निर्माण एजेंसी की मशीनें मलबा हटाने में जुटी हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि यमुना नदी का बहाव फिलहाल अपने मुख्य मार्ग से ही हो रहा है और नदी ने नई धारा नहीं बनाई है। इससे स्यानाचट्टी में किसी बड़े नुकसान की आशंका फिलहाल टलती नजर आ रही है यमुनोत्री धाम के अहम पड़ाव स्याना चट्टी में दो माह से आपदा के हालात बने हुए हैं। लगातार वर्षा से हालात और बिगड़ते जा रहे हैंलेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











