• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

अरसा उत्तराखंड की एक लोकप्रिय स्वीट डिश

14/09/20
in उत्तराखंड, संस्कृति
Reading Time: 1min read
290
SHARES
362
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराओं ही नहीं, यहां के खान.पान में भी विविधता का समावेश है। उत्तराखंड का गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र सुंदर वादियों के साथ अपने पकवानों के लिए भी जाना जाता है । यहां पर इंडो आर्यन और इंडो ईरानी सभ्यता का मेल देखने को मिलता है, जो यहां के संस्कृति और खानपान की आदतों में भी देखने को मिल जाती है। अरसा नाम सुनकर आप भ्रमित न हों। हम किसी समय की बात नहीं कर रहे हैं, यह तो उत्तराखंड की बेहद खास मिठाई है। स्वाद ऐसा कि एक बार खा लें तो इसकी मिठास भूल नहीं पाएंगे। स्वाद और सेहत से भरपूर इस पकवान की खासियत यह है कि इसे गरमा गरम खाएं या एक महीने बाद, स्वाद में कोई फर्क नहीं मिलेगा।
अरसा आपके मुंह में कुछ ऐसी मिठास घोल देगा। अस्सालु बन गया अस्सा अरसा को पहले अरसालु कहते थे, वो कैसे दरअसल इसके पीछे भी दिलचस्प कहानी है। जगदगुरु शंकराचार्य ने बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों का निर्माण करवाया था। इसके अलावा गढ़वाल में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनका निर्माण शंकराचार्य ने ही करवाया था। इन मंदिरों में पूजा करने के लिए दक्षिण भारत के ब्राह्मणों को रखा जाता है। कुछ जानकार कहते हैं कि नौवीं सदी में दक्षिण भारत से ये ब्राह्मण जब गढ़वाल आएं तो अपने साथ एक मिठाई अरसालु लेकर आए थे। क्योंकि लंबे समय तक रखने के बाद भी खराब नहीं होती थी, इसलिए वो पोटली भर.भरकर अरसालु लाया करते थे। धीरे.धीरे इन ब्राह्मणों ने स्थानीय लोगों को भी इसे बनाने की कला सिखाई और इस तरह गढ़वाल पहुंचकर अरसालू बन गया अरसा।
इसे बनाने के लिए गढ़वाल में गुड़ इस्तेमाल होता है, जबकि कर्नाटक में खजूर गुड़ का प्रयोग किया जाता है। धीरे.धीरे ये गढ़वाल की लोकप्रिय मिठाई बन गईस्वाद और सेहत से भरपूर इसे बनाना है बहुत ही आसान। जिसमें चावल को साफकर उसे अच्छी तरह धोने के बाद तीन दिनों के लिए पानी में भिगोकर छोड़ दिया जाता है। भिगोने के बाद इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि 24 घंटे बाद उसका पानी बदलना है। तीन दिन बाद चावल को पानी से निकालकर सूती कपड़े के ऊपर सुखा लेंगे। पानी सूख जाने के बाद उसे मिक्सर में दरदरा पीसते हैं। चावल के उस दरदरे आटे में गुड़, दही और घी को मिलाकर अच्छी तरह गूंथ लिया जाता है। अरसा उत्तराखंड का प्रसिद्ध पकवान है। यह शादी व्याह और अन्य खुशी के मौके पर बनाया जाता है। कहा जाता है कि यह पकवान केरल से आया, जब आदि शंकराचार्य यहां आए थे। कुछ लोग मानते हैं कि यह पकवान उडीसा से आया। जिसे मुख्य रूप से पारिवारिक सभाओं, शादियों और त्योहारों जैसे विशेष अवसरों पर तैयार है। इसे शादियों में बनाना शुभ माना जाता है।
शादी के या किसी शुभ अवसर पर दूर.दूर तक नाते.रिश्तेदारी में अरसे का ष्बीड़ाष् यानी यादगारी का गिफ्ट पैक जरूर भेजा जाता है।
9वीं सदी से अरसालु लगातार चलता आ रहा है, यानी इतिहासकारों की मानें तो बीते 1100 साल से गढ़वाल में अरसा एक मुख्य मिष्ठान और परंपरा का सबूत था काफी युवा ऐसे जो अरसे की जगह फास्ट फूड को तरजीह देंगे। अरसा केवल हमारी संस्कृति ही नहीं बल्कि शरीर के लिए बेहद की पौष्टिक आहार है। शरीर में शक्ति और ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल होता था। ये मेरे पहाड़ की असली मिठाई है। न कोई मिलावट न दिखावा, विशुद्ध पहाडी समौण। बरसों से मेरे पहाड़ के गांव में रहने वाले लोग अपनी बेटियों को ससुराल जाते समय मिठाई के रूप मे अरसे को समौण देते हैं। ये अरसे न केवल एक मिठाई होती है अपितु ये अपनत्व, स्नेह, प्यार का प्रतीक भी होती है देने वाले व्यक्ति की। चावल, भेली और तेल से तैयार अरसे लंबे समय तक खराब भी नहीं होते हैं। खानें में इनका स्वाद आज भी बेजोड़ है। अरसे को बांटना पहाड़ के लोक में शुभ शगुन माना जाता है।शादी ब्याह सहित अन्य खुशी के मौके पर भी ये परम्परागत मिठाई बरसों से मेरे पहाड़ में बनाई जाती है। पहले इस मिठाई को ले जाने के लिए रिंगाल का बना हथकंडी बनाया जाता था, जिसमें मालू-तिमला के पत्ते को भिमल-सेब की रस्सी से बांधकर रिश्तेदारों को भेजा जाता था।
बदलते दौर में जो अब महज यादों में ही सिमट कर रह गया है। भले ही आज लोग मंहगी से मंहगी बंद डिब्बे में पैक्ड मिठाई को एक दूसरे को दे रहे हो। लेकिन जो स्वाद, मिठास और अपनत्व मेरे पहाड़ के इन अरसों में है वो और कहां? उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र में प्रसिद्ध एक स्वीट डिश, अर्सा कालेओ का एक अभिन्न अंग है अब राज्य के मैदानी इलाकों में भी अरसा व रोट को बढ़ावा देने का प्रयास हो रहा है। रेस्टोरेंट में शेफ इन्हें तैयार कर रहे हैं। साथ ही डिमांड के अनुसार इन्हें एक्सपोर्ट भी किया जा रहा है। शादी.ब्याह के मौके पर तो इनकी अच्छी.खासी डिमांड रहती है। दून में स्थित रेस्टोरेंट के बताते हैं कि दो वर्ष से रेस्टोरेंट में रोट व अरसा तैयार किए जा रहे हैं। जो कि सौ रुपये से लेकर 300 रुपये तक के पैक में उपलब्ध है। इन्हें मेरठ, लखनऊ, चंडीगढ़, लुधियाना, दिल्ली, मुंबई आदि महानगरों में भी भेजा जाता है यह भी महीनों तक खराब नहीं होते। ताउम्र इनका जायका नहीं भूलने वाले है। पहाड़ के लोगों को जड़ों की ओर लौटना ही होगा। यहां की परंपराएं, मान्यताओं का संरक्षण नहीं होगा तो इसका समाज पर नकारात्मक असर पडऩा तय है।

Share116SendTweet73
Previous Post

चमोली जिले में सोमवार को मिले 28 कोरोना संक्रमित

Next Post

तेज गति से संक्रमण बढ़ते हुए 33 हजार के पार पहुंचा आंकड़ा

Related Posts

उत्तराखंड

यूजेवीएन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री अजय कुमार सिंह ने विधिवत कार्यभार ग्रहण किया

July 2, 2026
232
उत्तराखंड

भारत-नेपाल सीमा विवाद फिर चर्चा में

July 2, 2026
9
उत्तराखंड

पदक विजेता खिलाड़ियों को तय समय के अंदर सरकारी सेवा में समायोजित करें: मुख्यमंत्री

July 2, 2026
57
उत्तराखंड

डोईवाला :माधोवाला मार्ग पर बना गड्ढा दे रहा हादसों को न्योता

July 2, 2026
8
उत्तराखंड

पर्यावरण को उजाड़ने का काम कर रही है भाजपा सरकार : उनियाल

July 2, 2026
5
उत्तराखंड

देवाल के क्षेत्र प्रमुख तेजपाल रावत एवं भाजयुमो नेता जितेंद्र बिष्ट ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट कर देवाल क्षेत्र की समस्याएं बताई

July 2, 2026
5

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67708 shares
    Share 27083 Tweet 16927
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45784 shares
    Share 18314 Tweet 11446
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38064 shares
    Share 15226 Tweet 9516
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37450 shares
    Share 14980 Tweet 9363
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37370 shares
    Share 14948 Tweet 9343

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

यूजेवीएन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री अजय कुमार सिंह ने विधिवत कार्यभार ग्रहण किया

July 2, 2026

भारत-नेपाल सीमा विवाद फिर चर्चा में

July 2, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.