डोईवाला, (प्रियांशु सक्सेना)। देहरादून एयरपोर्ट से ऋषिकेश मार्ग के फोरलेन चौड़ीकरण के लिए वन क्षेत्र में 3,000 से अधिक पेड़ों का कटान शुरू होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। पर्यावरण संरक्षण के लिए कुछ समय पूर्व विभिन्न सामाजिक, पर्यावरणीय एवं राजनीतिक संगठनों ने संयुक्त रूप से आंदोलन चलाकर पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधते हुए उन्हें बचाने का संकल्प लिया था, लेकिन सरकार ने जनता की भावनाओं और पर्यावरणीय चिंताओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
गुरुवार को परवादून कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल ने मौके पर पहुंचकर पेड़ों के कटान का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसके जंगलों और प्राकृतिक धरोहर से है, लेकिन भाजपा सरकार विकास के नाम पर अंधाधुंध पेड़ों का कटान कर पर्यावरण का संतुलन बिगाड़ने पर आमादा है।
उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास की बड़ी-बड़ी बातें करती है, वहीं दूसरी ओर हजारों वर्षों में विकसित हुए वन क्षेत्र को कुछ ही दिनों में उजाड़ा जा रहा है। यह केवल पेड़ों का कटान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित भविष्य पर सीधा प्रहार है।
मोहित उनियाल ने सरकार से सवाल किया कि क्या सड़क चौड़ीकरण का ऐसा कोई विकल्प नहीं था, जिससे अधिकतम पेड़ों को बचाया जा सकता। यदि हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं, तो उनकी भरपाई केवल कागजों में नहीं, बल्कि धरातल पर कब और कैसे होगी उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की हरियाली और प्राकृतिक विरासत को किसी भी कीमत पर उजड़ने नहीं दिया जाएगा।
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‘प्रकृति को हमारी ज़रूरत नहीं, बल्कि हमें प्रकृति की ज़रूरत है’
कोविड-19 महामारी ने यह कड़वा सच दिखाया कि जब सांसें संकट में पड़ती हैं। तब विकास नहीं, बल्कि स्वच्छ हवा और स्वस्थ पर्यावरण सबसे बड़ी आवश्यकता बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि विकास परियोजनाओं के लिए परिपक्व पेड़ों का कटान अपरिहार्य है, तो उनकी भरपाई के लिए वर्षों पहले से वृक्षारोपण और उसके संरक्षण की ठोस योजना बनाई जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मामले में संवेदनशीलता नहीं दिखाई और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता नहीं दी, तो कांग्रेस जनमानस, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर व्यापक जनआंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होगी।











