• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

हिमालय बचाना है तो सबसे पहले गांवों को बचाना होगाः सच्चिदानंद भारती

05/11/20
in उत्तराखंड, संस्कृति
Reading Time: 1min read
89
SHARES
111
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
पाणी राखो आंदोलन के प्रणेता और जाने माने पर्यावरणविद् सच्चिदानंद भारती का कहना है कि हिमालय को बचाने के लिए सबसे पहले हिमालय के गांवों को बचाना होगा। हिमालय को सहेजने के लिए उत्तराखंड ही नहीं समूचे देश के लोगों को आगे आने की जरूरत है। खाली होते हिमालय के गांवों में लोगों को बुनियादी सुविधाएं मुहैैैया करवाकर ही हिमालय को बचाया जा सकता है। उन्होंने हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र में पृथक मंत्रालय बनने की बात कही। भारती का कहना है कि हिमालय की संवेदनशीलता को समझे बिना हिमालय को सहेजने की कल्पना नहीं की जा सकती है।
एक ओर हिमालय के गांव खाली हो रहे हैं, वहीं ऑलवेदर समेत सड़कों का जाल बिछ रहा है। यह सिलसिला नहीं थमा तो पहाड़ की बाकी नदियां भी सूख जाएंगी या फिर बरसाती नदियों में तब्दील हो जाएंगी। ऐसे हालात में न गंगा बचेगी न गोमुख बचेगा। उनका कहना कि सरकारें हिमालयवासियों के प्रकृति के साथ जीने के सदियों से चले आ रहे विज्ञान को समझें और उनके अनुरूप नीतियां बनाएं। हमें सड़कों के निर्माण से लेकर पर्यटन आदि सभी विकास योजनाओं में समझनी होगी। समय का तकाजा है कि अब संपूर्ण हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र में पृथक मंत्रालय बनना चाहिए। विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक उपक्रमों की मदद से अनुसंधान एवं विकास की परियोजनाएं चलनी चाहिए। जिससे गांव कस्बे के कालेज भी अनुसंधान और विकास के काम में युवाओं को जोड़ सकें। हिमालयवासी भी पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है कि हिमालयवासियों और राज्य में काम करने वाली सरकारी और गैरसरकारी एजेंसियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक संवेदनशील होकर धरातल पर काम करना होगा।
सबसे पहले राज्य और केंद्र सरकार को हिमालयवासियों को भी पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा मानना चाहिए। जिसमें केंद्र और राज्य की विभिन्न योजनाओं के तहत रोपित पौधों की दस फीसदी संख्या भी जीवित नहीं है। इसका बड़ा कारण यह है कि हम पौधारोपण के बाद उनके संरक्षण पर ध्यान नहीं देते। उनके संरक्षण के लिए भी हमारे पास कोई योजना नहीं है। रोपित पौधे आग लगनेए सूखा पड़ने, पशु चरान, चुगान, सड़क निर्माण के चलते नष्ट हो रहे हैं। हिमालय के संसाधनों में स्थानीय लोगों को रोजगार देने की पर्याप्त क्षमता है, किंतु संसाधनों का सुनियोजित प्रबंधन नहीं हो पा रहा है। उन्होंने पशुपालन, जड़ी.बूटी उत्पादन और बागवानी को वैज्ञानिक एवं तकनीकी रूप से विकसित करने पर जोर दिया। 136 गांवों में फैला हुआ है। देवभूमि उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल और चमौली जिले के इन गांवों में हमने करीब 50 लाख पौधे रोपे। अब ये पहाड़ों पर आसमान चूमते हरे.भरे दरख्तों की शक्ल में सामने हैं, जिन्हें देखने देश.दुनिया के हजारों लोग आते हैं। मशहूर चिपको आंदोलन की प्रेरणा से उपजा यह एक ऐसा फल है, जिसे धरती ने अपनी सेवा के बदले प्रसादस्वरूप हम गांव वालाें को लौटाया। पानी के सैंकड़ों कुदरती स्रोत होने के बाद देवभूमि में लोग पानी की दिक्कत आ रही है। कुदरती स्रोतों को एक बार फिर से जगाने का काम किया है पहाड़ की नदियां ही गंगा की मां हैं।
आजादी से उत्तराखंड की 360 छोटी नदी, सरिताएं, देशभर में 12 लाख ताल समाप्त हो गए हैं। 2050 तक देश और विश्व में गंभीर जल संकट पैदा हो सकता है। पहाड़ में चाल.खाल जल संरक्षण का पारंपरिक विकल्प है। राज्य के आम निवासियों का इस प्राकृतिक विरासत को बचाए रखने में बहुत बड़ा योगदान है। मिट्टी और पानी को परदेस जाने से रोकने के लिए। कुछ सदियों का काम हैं। पहाड़ का पानी और जवानी बन कर ना रहे हकीकत मे इसमे अब अमल है।

Share36SendTweet22
Previous Post

बाहर से आकर पेठा बेचने वालों का मिष्ठान विक्रेता संघ ने किया विरोध

Next Post

गुरुवार को चमोली जिले में 16 कोरोना पाजिटिव

Related Posts

उत्तराखंड

डोईवाला क्षेत्र में सीवर नेटवर्क स्थापित करने की मांग

July 9, 2026
26
उत्तराखंड

सेवा पखवाड़े के तहत थराली विकासखंड के अंतर्गत लोल्टी न्याय पंचायत का विकास भवन ग्वालदम में बहुउद्देशीय शिविर का आयोजन

July 9, 2026
3
उत्तराखंड

डॉ.हरीश चन्द्र अंडोला सराहनीय कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया

July 9, 2026
21
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय रेल मंत्री से रेल परियोजनाओं एवं कनेक्टिविटी विस्तार पर की चर्चा

July 9, 2026
5
उत्तराखंड

देवाल में आयोजित 3 दिवसीय विशेष स्वास्थ्य शिविर के तीसरे दिन 204 लोगों की जांच कर निःशुल्क दवाओं का वितरण किया

July 9, 2026
4
उत्तराखंड

9 सूत्रीय मांगों को लेकर, तहसील मुख्यालय थराली में आशा कार्यकत्रियों ने लूस निकाला

July 9, 2026
7

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67712 shares
    Share 27085 Tweet 16928
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45785 shares
    Share 18314 Tweet 11446
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38066 shares
    Share 15226 Tweet 9517
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37452 shares
    Share 14981 Tweet 9363
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37370 shares
    Share 14948 Tweet 9343

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

डोईवाला क्षेत्र में सीवर नेटवर्क स्थापित करने की मांग

July 9, 2026

सेवा पखवाड़े के तहत थराली विकासखंड के अंतर्गत लोल्टी न्याय पंचायत का विकास भवन ग्वालदम में बहुउद्देशीय शिविर का आयोजन

July 9, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.