• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

पहाड़ में प्राकृतिक जलस्त्रोतों के लिए नासूर बन रहे हैंडपंप

15/12/20
in उत्तराखंड, संस्कृति, हेल्थ
Reading Time: 1min read
302
SHARES
377
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
नौले हमारे गावों के अभिन्न अंग रहे हैं। नौलों का निर्माण भूमिगत पानी के रास्ते पर गड्डा बनाकर चारों ओर से सुन्दर चिनाई करके किया जाता था। ज्यादातर नौलों का निर्माण कत्यूर व चंद राजाओं के समय में किया गया। इन नौलों का आकार वर्गाकार होता है और इनमें छत होती है तथा कई नौलों में दरवाजे भी बने होते हैं। जिन्हें बेहद कलात्मकता के साथ बनाया जाता था। इनमें देवी.देवताओं के सुंदर चित्र बने रहते हैं। यह नौले आज भी शिल्प का एक बेजोड़ नमूना हैं। चंपावत के बालेश्वर मंदिर का नौला इसका प्रमुख उदाहरण है। इसके अलावा अल्मोड़ा के रानीधारा तथा द्वाराहाट का जोशी नौला तथा गंगोलीहाट में जान्हवी नौला व डीडीहाट का छनपाटी नौला प्रमुख है। गढ़वाल में टिहरी नरेशों द्वारा नौलों का निर्माण किया गया था। यह नौले भी कलाकारी का अदभुत नमूना हैं। ज्यादातर नौले उन स्थानों पर मिलते हैं जहां पानी की कमी होती है। इन स्थानों में पानी को एकत्रित कर लिया जाता था और फिर उन्हें अभाव के समय में इस्तेमाल किया जाता था।
पहाड़ में हैंडपंप लगाने से पेयजल स्त्रोत लगातार खत्म हो रहे हैं। पेयजल की कमी वाले क्षेत्रों में तेजी से हैंडपंप लगाए जा रहे हैंं। पिछले कुछ वर्षो में जलसंस्थान ने हैंडपंप लगा दिए हैं। जबकि 50 अभी और प्रस्तावित हैं। सरकार व इनके महकमे पानी की समस्या का स्थाई समाधान न करने के बजाए पेयजल संकट बढ़ा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण पहाड़ में तेजी से खोदे जा रहे हैंडपंप हैं। जिन जगहों पर भी यह हैंडपंप लगाए गए, उन क्षेत्रों के आस.पास के प्राकृतिक स्त्रोत सूखते गए। हैंडपंप में लाखों खर्च करने के बाद भी पेयजल समस्या जस की तस है। विभागीय कर्मी भले ही हैंडपंप सूखने के आंकड़े कम बताए लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। एक हैंडपंप पर चार लाख का खर्च आता है। बागेश्वर जिले में हैंडपंप लगाने का काम साल 2005 से किया जा रहा है। आवश्यकता के अनुसार हर साल हैंडपंप लगाए जा रहे हैं। जिसके बाद आस.पास के लोग पेयजल प्राप्त करते हैं। पहाड़ी परिवेश में उपयुक्त न होने के कारण जल संकट को बढ़ा रहा है।
इसका सबसे बड़ा कारण है पहाड़ में वाटर लेबल का न होना। वाटर लेबल नहीं होने से पहाड़ी के भीतर पानी की बारीक नालियां होती हैं। जिससे पानी एकत्र होकर बाहर निकलता है। जब हैंडपंप से यह पानी निकाला जाता है तो आस.पास के नौले व धारे प्रभावित होते हैं। जिससे उनका पानी काफी कम हो जाता है या फिर वह सूख जाते हैं। इस तरह हैंडपंप पहाड़ के पानी को हर तरह से प्रभावित कर रहे हैं। पुरातन जल संस्कृति के विज्ञान को नए दौर में भी समझने की जरूरत है। नौले.धारे वास्तव में हमारी संस्कृति के प्रतीक है। इन्हें जल.संस्कृति का वाहक बनाकर जनचेतना के लिये उपयोग में लाना होगा। सामूहिक कार्यों का शुभारम्भ या तो नौले.धारों से होता था या देवस्थानों से। इस परम्परा को फिर से स्थापित करना होगा। हमारी नदियां हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। यहाँ तक कि हमने उन्हें माँ और जीवनदायिनी जैसा भी माना है। इसका कारण यही है कि हमारी सभ्यता नदी किनारे ही जन्मी और पोषित की गई है। परन्तु जनसंख्या की अतिवृद्धि और विकास के दबाव ने हमारी नदियों और भू.जल की दुर्दशा कर दी है।
अब हमें गलत योजनाओं और उपेक्षा से जन्मी नदी, प्रकृति एवं मानव.जीवन के बीच की विषमता को खत्म करना ही होगा। विश्व की प्रसिद्ध पर्वत श्रृंखलाओं में से एक हिमालय अपने आप में पारिस्थितिकी की विविधता को समेटे हुए है। इसकी सुंदरता इसकी जटिलता में निहित है। यह विश्व के जैव विविधता वाले 36 प्रमुख क्षेत्रों में से एक है। इंटरनेशलन सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र में लगभग 24 करोड़ लोग रहते है। पहाड़ का जीवन कठोर होता है। इनके निवासियों को आजीविका के लिए कम ही विकल्प मिलते हैं। उत्तराखण्ड बनने के साल भर पहले तक यहां के गांवों के घरों के आगे नल पोस्ट लग चुके थे। ये नल के पोस्ट वर्ल्ड बैंक की सहायता से शुरु स्वजल योजना के तहत 1996 से लगने शुरु हुये थे। मैंने 2010 तक कभी ऐसा नहीं देखा था कि इन नलों में हमेशा पानी आता हो, हां गावों में अब पानी को लेकर झगड़े ज्यादा बड़ चुके थे। इन सबके अलावा आज के दिन अगर उत्तराखण्ड के पहाड़ी हिस्सों में बने गावों में एक समरुपता खोजी जाये तो हर गांव में बनी सीमेंट की टूटी.फूटी टंकियां होंगी। आज भी जब कभी गांव के नल में पानी नहीं आता है तो लोग नौले के तरफ ही भागते हैं। एक आंकड़े के अनुसार उत्तराखंड राज्य बनते समय 90 फीसदी आबादी पेय जल के लिये नौले पर निर्भर थी। इस समय राज्य में लगभग दो लाख नौले हुआ करते थे। आज इन सभी की हालत दयनीय है। जल जीवन मिशन 2024 तक 100ः घरों में प्रति दिन 55 लीटर तक पानी की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कार्यात्मक रूप से कनेक्शन परिकल्पना की बात करता है।

Share121SendTweet76
Previous Post

उत्तराखंड: दर्दनाक कार हादसे में नव-विवाहिता सहित तीन लोगों की मौत

Next Post

अरुणाचल प्रदेश के बोमडिला में कुमाऊं रेजीमेंट का हवलदार शहीद

Related Posts

उत्तराखंड

पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारत माता के सच्चे सपूत

September 25, 2026
7
उत्तराखंड

अत्यन्त शुभ दिन है अनंत चतुर्दशी

September 25, 2026
6
उत्तराखंड

पीएमजीएसवाई ने पहाड़ जैसी जिंदगी को दी नई रफ्तार

September 25, 2026
10
उत्तराखंड

लोक जात संपन्न होने के बाद नंदा सिद्धपीठ देवराड़ा-थराली में 6 माह के प्रवास पर विधिविधान के साथ विराजमान हो गई

September 25, 2026
82
उत्तराखंड

डोईवाला: बहुउद्देशीय शिविर में लोगों को दी जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी

September 25, 2026
21
उत्तराखंड

डोईवाला: आंगन का मिलन कार्यक्रम में बच्चों और अभिभावकों से किया संवाद

September 25, 2026
15

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67748 shares
    Share 27099 Tweet 16937
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45794 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38078 shares
    Share 15231 Tweet 9520
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37458 shares
    Share 14983 Tweet 9365
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37382 shares
    Share 14953 Tweet 9346

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारत माता के सच्चे सपूत

September 25, 2026

अत्यन्त शुभ दिन है अनंत चतुर्दशी

September 25, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.