हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
गोपेश्वर/थराली। बधाण की राजराजेश्वरी नंदा देवी की यात्रा अपने छ्ठे़ पड़ाव सूना गांव पहुंच
गई हैं। जबकि दशोली परगना की देव डोली पगना गांव एवं बण्ड की देवा डोली किरोली गांव पहुंच गई हैं। यात्रा मार्ग पर देवी भक्तों ने भव्य रूप से यात्राओं का स्वागत करते हुए पूजा-अर्चना कर मनौतियां मांगी। यात्रा रूट अव्यवस्थित होने तमाम नालों,गद्देरों के उफान पर होने के बावजूद यात्रा में चल रहे यात्रियों के हौसले बुलंद देखने को मिल रहें हैं।
गुरुवार को बधाण की राजराजेश्वरी नंदा देवी की डोली अमावस्या के पर्व पर अपने छठ़े पड़ाव सूना गांव पहुंच गई हैं। इससे पहले अपने 5 वें पड़ाव थराली ब्लाक के सोल डुंग्री पहुंची डोली का सोल क्षेत्र के नंदा भक्तों ने कल रात एवं आज सुबह से पूजा अर्चना शुरू की जोकि करीब 11 बजें तक जारी रही, इसके बाद यात्रा केरा,मेन गांव के लिए रवाना हुई यहां पर भी देवी भक्तों ने पूजा अर्चना की दोपहर के भोजन के बाद यात्रा करीब 12 किलोमीटर की यात्रा करते हुए देर सांय सूना गांव पहुंच गई हैं। यहां पर गुरुवार एवं शुक्रवार की रात कालरात्रि यंत्र की विशेष पूजा विधि-विधान के साथ की जाएगी।सूना गांव के सामने पिंडर नदी के उस पार दक्षिण कालिंका कुलसारी का ऐतिहासिक मंदिर स्थापित हैं।जिसका श्रेत्र में विशेष महत्व है। शुक्रवार को बधाण की डोली थराली गांव, थराली बाजार, केदारबगड़,राणीबगड़,होते हुए अपने 7 वें पड़ाव चेपड़ो गांव में पहुंचेगी। जहां पर नंदादेवी की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
*परगना दशोली* कैलाश यात्रा के तहत गुरुवार को करीब 25 किलोमीटर की यात्रा तय करते हुए चतुर्दशी के पर्व पर मटेई ग्वाड़ से विदा हो कर दाणू मंदिर होते हुए पगना गांव पहुंच गई हैं। यहां पर देवी की पूजा के लिए रात्रि जागरण एवं विशेष पूजा का आयोजन किया जाएगा। शुक्रवार को यात्रा पगना से विदा हो कर 20 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करते हुए भौधार, चरबंग होते हुए नंदानगर के ल्वाणी गांव पहुंचेगी।
*परगना बण्ड* बण्ड़ की नंदा देवी की डोली भी गुरुवार को चतुर्दशी के पर्व पर 7 किलोमीटर की यात्रा तय कर कम्यार गांव से किरोली गांव पहुंच गई हैं। यात्रा को लेकर दशोली क्षेत्र में भारी उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा हैं। शुक्रवार को देवी यात्रा करीब 18 किलोमीटर की दूरी तय कर किरोली गांव से कोट मंदिर,भुमियाल मंदिर होते हुए गोणा गांव पहुंचेगी जहां पर नंदादेवी के साथ ही भुमियाल देवता की पूजा अर्चना की जाएगी।











