हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
थराली।
विशिष्ट व्यक्तित्व व्याख्यानमाला के क्रम में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान चमोली (गौचर) में प्रसिद्ध लोकगायक व संगीतकार किशन महिपाल के व्याख्यान का आयोजन किया गया। कौशलम् कक्षा 10 के तीन दिवसीय प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में उन्हें विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था।
व्याख्यान से पूर्व जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य आकाश सारस्वत ने लोकगायक किशन महिपाल को सम्मान पत्र, स्मृति चिह्न एवं अंगवस्त्र भेट कर सम्मानित किया गया।
अपने व्याख्यान में किशन महिपाल ने अपनी लगभग तीन दशकों की संगीत यात्रा के विभिन्न अनुभवों को शिक्षकों के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में उनका संगीत एल्बम आया था, लेकिन पहली बार वर्ष 2011 में उन्हें अपनी टीम के साथ मंच पर प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किया गया। कहा कि संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने के दौरान उन्हें आर्थिक तंगी सहित अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी संगीत यात्रा को रुकने नहीं दिया।
किशन महिपाल ने अपनी संघर्षपूर्ण यात्रा के साथ-साथ लोक संगीत के प्रति अपने लगाव और अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने शिक्षकों के विभिन्न सवालों के जवाब देते हुए संगीत, लोक संस्कृति और अपनी रचनात्मक यात्रा से जुड़े अनुभव बताए। शिक्षकों के आग्रह पर उन्होंने अपने लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति भी दी। इस दौरान ‘कोरी कोरी’, ‘महल धरिया छिन’, ‘राजा ना रानी’, ‘जख दयबतों का ठौ छन भेजी’ तथा ‘जय बद्री विशाल’ जैसे गीतों की प्रस्तुति से वातावर संगीत की रंगत से सराबोर हो गया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ संकाय सदस्य राजेंद्र प्रसाद मैखुरी, वीरेंद्र सिंह कठैत, सुबोध कुमार डिमरी, गोपाल प्रसाद कपरुवाण, मृणाल जोशी, बच्चन जितेला, नीतू सूद, अनीता चंदोला, निशांत वशिष्ठ, पुष्पा कनवासी, मनोज हटवाल, ललित मोहन पांडे, वीरेंद्र सिंह नेगी, रविंद्र रावत समेत 150 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन संकाय सदस्य डॉ. कमलेश कुमार मिश्र ने किया।











