• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

सिमट रहा है पारंपरिक हस्तशिल्प

26/11/20
in उत्तराखंड, चमोली, पिथौरागढ़, बागेश्वर
Reading Time: 1min read
400
SHARES
500
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड का प्राचीन हस्तशिल्प कालीन उद्योग तकनीकी युग में धीरे.धीरे सिमट रहा है। जबकि किसी जमाने में पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली जैसे दूरदराज के पर्वतीय जिले कभी इसी उद्योग से फल फूल रहे थे। लेकिन अब युवा पीढ़ी की इस पारंपरिक हस्तशिल्प से दूरी बना कर पलायन मजबूरी बन गई है। आजीविका के तौर पर युवा पीढ़ी इस पुस्तैनी कारोबार को अपनाना नहीं चाहती है। रोजगार के अन्य विकल्प तलाशने के लिए पलायन कर रहे हैं। पलायन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भी पिथौरागढ़ से युवाओं ने रोजगार के लिए पलायन किया है। यदि सरकार इस परंपरागत उद्योग को आधुनिक स्वरूप दे तो युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा साधन बन सकता है। कभी पूरे देश में अलग पहचान रखने वाले धारचूला.मुनस्यारी के दन कालीन का कारोबार अब सिमटने लगा है। चीन और कोरिया सहित मशीनों में निर्मित आकर्षक डिजाइन के कपड़ों के बाजार में आने से परंपरागत हस्तशिल्प को नुकसान उठाना पड़ा है। बाजार में मांग घटने से युवा पीढ़ी हस्तशिल्प से किनारा करने लगी है।
धारचूला और मुनस्यारी में कभी पांच हजार से अधिक परिवार ऊनी हस्तशिल्प पर निर्भर थे। तिब्बत से ऊन आयात करने के साथ ही स्थानीय स्तर पर भी भेड़ों से ऊन निकाला जाता था। यहां के ऊन से निर्मित दन, कालीन, स्वेटर, मफलर, मोजे, दस्ताने, पंखी, चुटका और थुलमा की बाजार में बड़ी मांग थी। हस्तशिल्प पुश्तैनी व्यवसाय था। शादी विवाह में दन, कालीन को गिफ्ट करने का रिवाज था। दन बनाने से फुरसत नहीं मिलती थी। सोफा सेट में बिछाने के लिए भी ऊन के दनों की अब डिमांड नहीं आती है। ऊनी हस्तशिल्प की आज भी अलग पहचान है। मशीनों में निर्मित विदेशी सस्ते सामान के बाजार में आने से हस्तशिल्प को भारी नुकसान पहुंचा है। मांग नहीं होने से हजारों परिवारों ने दूसरा व्यवसाय शुरू कर दिया है।
हस्तशिल्पियों को दन, कालीन और बाजार की मांग के अनुरूप सामान तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन परंपरागत उद्योगों को भी मार्डन कर नया स्वरूप देने की जरूरत है। इसमें उत्पाद की डिजाइन व तकनीकी पर ध्यान देना होगा। हस्तशिल्पी क्या उत्पाद बना रहे हैं और बाजार की डिमांड क्या है। इस गेप को दूर करने के लिए सरकार को प्रयास करना चाहिए।प्राचीन समय से ही कालीन उद्योग स्वरोजगार का साधन था, लेकिन अब इनका प्रचलन कम हो गया है। बागेश्वर के कई लोग कालीन, मोजे, टोपी, स्वेटर, दन, मफलर, थुलमा, कोट, जैकेट हथकरघा से बनाते थे। हस्तशिल्पियों को एक कालीन तैयार करने में महीना भी लग जाता है। जिससे कालीन की कीमत भी ज्यादा होती है। लेकिन अब हस्तशिल्पी महंगी कालीन खरीदने से बच रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह भी है कि बाजार में तीन, चार सौ रुपये तक की प्लास्टिक की दरियां, चटाई मिल रही है। इसकी वजह से कालीन व्यवसाय सिमटा रहा है।
हस्तशिल्पी इस पुस्तैनी कारोबार को छोड़ कर दूसरा व्यवसाय अपनाने के लिए पलायन करने को मजबूर हैं। उत्तराखंड का प्राचीन हस्तशिल्प कालीन उद्योग तकनीकी युग में धीरे.धीरे सिमट रहा है। जबकि किसी जमाने में पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली जैसे दूरदराज के पर्वतीय जिले कभी इसी उद्योग से फल फूल रहे थे। लेकिन अब युवा पीढ़ी की इस पारंपरिक हस्तशिल्प से दूरी बना कर पलायन मजबूर बन गई है। आजीविका के तौर पर युवा पीढ़ी इस पुस्तैनी कारोबार को अपनाना नहीं चाहती है। रोजगार के अन्य विकल्प तलाशने के लिए पलायन कर रहे हैं।
पलायन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भी पिथौरागढ़ से युवाओं ने रोजगार के लिए पलायन किया है। यदि सरकार इस परंपरागत उद्योग को आधुनिक स्वरूप दे तो युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा साधन बन सकता है। यह वस्तुएं सीमांत इलाकों के कुछेक गांवों तक सिमट गई हैं। भले ही पुरानी वस्तुएं अपनी अलग छाप छोड़ने के साथ ही असुविधा के दौर में मानव जीवन के लिए खासे मददगार रहे होंए किंतु आधुनिकता इन पर भारी पड़ी। जिस कारण यह विलुप्ति की ओर बढ़ती जा रही हैं। हस्तशिल्प पुश्तैनी व्यवसाय था हस्तशिल्प पुश्तैनी व्यवसाय था हस्तशिल्प पुश्तैनी व्यवसाय था तकनीकी युग में मशीनों ने हस्तशिल्प कारीगरों के हाथों से तैयार उत्पादों की मांग कम कर दी है। अब अधिकतर परिवारों ने परंपरागत कारोबार को छोड़कर नौकरी या अन्य व्यवसाय शुरू कर दिया है। दशकों पहले तक ऊन से बने कालीन व कपड़ों की अच्छी मांग थी। लेकिन अब बाजार में हाथ से बुने इन उत्पादों की मांग कम हो गई है। नई पीढ़ी इस कारोबार में नहीं आना चाहती है। सरकार को परंपरागत हस्तशिल्प को बचाने के लिये ठोस प्रयास करने चाहिये। इस प्राचीन व्यवसाय को बढ़ावा मिलने से दूरदराज गांव से पलायन रूक सकता है। कोरोना के कारण इसके प्रदेश में इसको लेकर न होने के कारण इसका दीदार नहीं हो पा रहा हैण् सरकारीव स्थानीय सहयोग की बड़ी आवश्यकता है, तो निश्चित तौर पर पहाड़ की पुरानी हस्तशिल्प रौनक वापस लौट सकती है।

Share160SendTweet100
Previous Post

देवाल के लिए नई पेयजल योजना बनाने की तैयारी

Next Post

खुद की कम्पनी स्थापित कर जौनसार के अंकित ने बनाई नई पहचान

Related Posts

उत्तराखंड

स्वदेशी उत्पादों स्थानीय मिलेट्स व एलईडी की चमक

November 6, 2026
6
उत्तराखंड

बाबा केदार की धरती पर भी नहीं रुका प्लास्टिक का कहर!

November 6, 2026
7
उत्तराखंड

स्वदेशी उत्पादों, स्थानीय मिलेट्स व एलईडी की चमक

November 6, 2026
2
उत्तराखंड

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने उत्तराखण्ड पुलिस को प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुलिस निशान से किया अलंकृत

November 6, 2026
7
उत्तराखंड

धनतेरस: आभूषण, बर्तन, झाडू और मिठाई की जमकर बिक्री

November 6, 2026
9
उत्तराखंड

डोईवाला: आंतरिक ज्ञान और सद्गुणों का प्रकाश फैलाने का संदेश दिया

November 6, 2026
5

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67760 shares
    Share 27104 Tweet 16940
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45795 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38083 shares
    Share 15233 Tweet 9521
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37463 shares
    Share 14985 Tweet 9366
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37389 shares
    Share 14956 Tweet 9347

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

स्वदेशी उत्पादों स्थानीय मिलेट्स व एलईडी की चमक

November 6, 2026

बाबा केदार की धरती पर भी नहीं रुका प्लास्टिक का कहर!

November 6, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.