डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
इस बार दीपावली पर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं ने स्वदेशी उत्पादों के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है. कहीं महिलाएं स्वदेशी LED लड़ियां तैयार कर रही हैं, तो कहीं पहाड़ी मिलेट्स से बने बेकरी उत्पादों के गिफ्ट हैंपर बाजार में अपनी पहचान बना रहे हैं. दोनों क्लस्टर की महिलाओं ने त्योहार के सीजन में लाखों रुपए का कारोबार किया है.विकासनगर के सोरना डोभरी स्थित स्वाभिमान महिला क्लस्टर की महिलाओं ने दीपावली और भैया दूज के लिए मिलेट्स आधारित आकर्षक गिफ्ट हैंपर तैयार किए हैं. इनमें रागी बिस्किट, फ्रूट एंड नट्स चॉकलेट, गुड़ मिल्क बिस्किट, मंडुआ केक और मंडुआ चॉकलेट सहित कई स्थानीय उत्पाद शामिल हैं. स्वाभिमान बेकरी यूनिट से जुड़ी कल्पना बिष्ट के मुताबिक, इस वर्ष अब तक 2 हजार से अधिक गिफ्ट हैंपर की बिक्री से 18 लाख रुपए से अधिक की आय अर्जित की जा चुकी है. करीब दो साल पहले रीप परियोजना के सहयोग से शुरू हुई इस यूनिट के माध्यम से गांव की 8 अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं को स्थानीय उत्पादों के माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं. दोनों क्लस्टर की महिलाएं लखपति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं. दीपावली के मौके पर ग्रामीण महिलाओं की यह पहल न केवल स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दे रही है, बल्कि महिला उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है. दीपावली के मौके पर दून में स्वदेशी उत्पादों की चमक और स्थानीय मिलेट्स से बने व्यंजनों का स्वाद त्योहार की खुशियों को और खास बना रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की ग्रामीण महिलाएं अपनी मेहनत, हुनर व उद्यमशीलता के दम पर आत्मनिर्भरता की कहानी लिख रही हैं। कहीं महिलाएं स्वदेशी हिलांस एलईडी लड़ियां तैयार कर घरों को रोशन कर रही हैं, तो कहीं मिलेट्स से बने अट्रैक्टिव गिफ्ट हैंपर के जरिए अपनी पहचान बना रही हैं। दीपावली के इस सीजन में दोनों क्लस्टर की महिलाओं ने लाखों रुपये का कारोबार कर महिला सशक्तीकरण व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी है। पीएम केवोकल फॉर लोकल&य के आह्वान को जमीं पर उतारते हुए विकासखंड विकासनगर के ग्राम सोरना डोभरी स्थित स्वाभिमान महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन की महिलाएं मिलेट्स आधारित उत्पादों के आकर्षक गिफ्ट हैंपर तैयार कर रही हैं। दीपावली व भैया दूज के लिए तैयार इन हैंपर में हैंडमेड कुकीज, रागी हनी बिस्किट, फ्रूट एंड नट्स चॉकलेट, गुड़ मिल्क बिस्किट, रागी चॉकलेट, मंडुआ केक और मंडुआ चॉकलेट जैसे स्थानीय उत्पाद शामिल हैं। इनकी मांग विकासनगर के साथ ही दून, उत्तरकाशी व टिहरी तक बढ़ रही है। ग्राहकों की पसंद और मांग के अनुरूप अलग-अलग आकार व कीमतों के आकर्षक गिफ्ट हैंपर तैयार किए जा रहे हैं स्वाभिमान बेकरी यूनिट व क्लस्टर की मेंबर के मुताबिक करीब दो वर्ष पूर्व उन्होंने ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (रीप) से जुड़कर बेकरी यूनिट स्थापित की थी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए उन्हें कई सरकारी आयोजनों में स्टॉल लगाने के मौके भी मिले। अब तक 2 हजार से ज्यादा गिफ्ट हैंपर तैयार कर उनकी बिक्री से 18 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित की जा चुकी है। इस यूनिट से गांव की 8 बाकी महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार ने बताया कि दोनों क्लस्टर की महिलाएं त्योहार के अवसर पर पूरे उत्साह और समर्पण के साथ आजीविका संवर्धन के कार्यों में जुटी हैं। इस दीपावली उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की ग्रामीण महिलाओं ने हुनर, मेहनत और उद्यमशीलता की ऐसी रोशनी बिखेरी है, जो घरों को रोशन करने के साथ उनके जीवन में खुशहाली भी ला रही है। कहीं पहाड़ के मोटे अनाज (मिलेट्स) से तैयार स्वादिष्ट उत्पादों के गिफ्ट हैंपर बाजार में धूम मचा रहे हैं तो कहीं महिलाओं के हाथों से तैयार स्वदेशी एलईडी लड़ियां चीनी उत्पादों का विकल्प बन रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी दो महिला क्लस्टर की इस पहल ने दीपावली के कारोबार को महिला आत्मनिर्भरता की बड़ी मिसाल बना दिया है। स्वदेशी उत्पादों को भी बाजार में जगह मिल रही है। यही नहीं चीनी झालरों को भी ये चुनौती दे रही हैं। मिलेट्स उत्पादों और स्वदेशी एलईडी लड़ियों की बढ़ती मांग ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोल रही है। यह पहल साबित कर रही है कि सही अवसर और प्रशिक्षण मिले तो गांव की महिलाएं भी बड़े बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकती हैं।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.














