• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

उत्तराखंड में अब खत्म हो जाएगा 162 साल पुराना पटवारी सिस्टम

08/10/25
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
50
SHARES
63
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला

आजादी के सात दशक बीतने के बाद भी इस एक मात्र राज्य में पहाड़
के 12 हजार से अधिक गांव में अभी तक अंग्रेजों के जमाने का कानून
चल रहा है जिसे अब खत्म किय
उत्तराखंड में अब धीरे-धीरे पटवारी व्यवस्था को खत्म किया जा रहा है.
जिसके तहत तमाम राजस्व क्षेत्र को रेगुलर पुलिस के हवाले किया जा
रहा है ताकि, गांवों में भी कानून व्यवस्था मजबूत हो सके. साल 2023
में 1500 से ज्यादा गांवों को राजस्व पुलिस से हटाकर रेगुलर पुलिस
को दिए जाने का फैसला लिया गया था, लेकिन मामला कोर्ट पहुंच
गया.हालांकि, इससे पहले राज्य सरकार ने इस फैसले पर कैबिनेट में
मुहर लगा दी थी, लेकिन कुछ कानूनी पहलू के चलते इसे लागू करना
संभव नहीं हो पा रहा था. अब करीब 2 हजार गांवों को राजस्व पुलिस
से हटाकर रेगुलर पुलिस के हवाले करने के फैसले पर सरकार ने मुहर
लगा दी है. जिसके बाद इससे क्या फायदा और क्या नुकसान होगा?
इसकी चर्चाएं हो रही हैं.  सरकार ने उत्तराखंड के 1,983 राजस्व गांवों
को नियमित पुलिस क्षेत्राधिकार में शामिल करने का बड़ा निर्णय लिया
है. सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि यह ऐतिहासिक
निर्णय है. इससे जनता का पुलिस पर भरोसा बढ़ेगा.इसके अलावा
सरकार का कहना है कि इससे ग्रामीण और सीमांत इलाकों में एक
सुरक्षित सामाजिक वातावरण बनेगा. साथ ही राज्य में पुलिस व्यवस्था
ज्यादा जवाबदेह और प्रभावी होगी. जिससे अपराधियों में डर और
जनता में विश्वास दोनों बढ़ेंगे. दरअसल, यह फैसला और काम इतना

आसान नहीं था. साल 2018 में नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को
आदेश दिया था कि प्रदेश से राजस्व पुलिस प्रणाली समाप्त कर रेगुलर
पुलिस को जिम्मेदारी सौंपी जाए. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि
अपराध नियंत्रण और न्याय की दृष्टि से राजस्व पुलिस व्यवस्था
अप्रभावी साबित हो रही है. हालांकि, उस समय सरकार ने संसाधनों
और ढांचे की कमी का हवाला देते हुए इस पर तत्काल अमल नहीं किया
था, लेकिन अंकिता भंडारी हत्याकांड (सितंबर 2022) जैसे मामलों के
बाद राजस्व पुलिस व्यवस्था पर लगातार सवाल उठने लगे. जनता और
विपक्ष के बढ़ते दबाव के बाद अब जाकर सरकार ने इसे लागू करने का
मन बनाया है. राजस्व पुलिस प्रणाली की जड़ें ब्रिटिश शासन से जुड़ी
हुई हैं. अंग्रेजों ने पहाड़ी इलाकों में सीमित संसाधनों के चलते राजस्व
कर्मचारियों (पटवारी) को ही पुलिस की जिम्मेदारी सौंप दी थी. यह
व्यवस्था बाद में उत्तराखंड बनने के बाद भी कई इलाकों में जारी रही.
राजस्व पुलिस प्रणाली की जड़ें ब्रिटिश शासन से जुड़ी हुई हैं. अंग्रेजों ने
पहाड़ी इलाकों में सीमित संसाधनों के चलते राजस्व कर्मचारियों
(पटवारी) को ही पुलिस की जिम्मेदारी सौंप दी थी. यह व्यवस्था बाद
में उत्तराखंड बनने के बाद भी कई इलाकों में जारी रही. राजस्व पुलिस
के अधिकार क्षेत्र वाले गांवों में पटवारी ही जांच अधिकारी, रिपोर्ट
लेखक और अभियोजन की प्रारंभिक कड़ी होता था, लेकिन न तो उसके
पास पर्याप्त प्रशिक्षण था, न पुलिसिंग के लिए संसाधन. इसका नतीजा
ये हुआ कि समय के साथ जब अपराधों की प्रकृति बदली तो यह
व्यवस्था पिछड़ी और बेहद लचीली होती चली गई. वहीं, उत्तराखंड के
जानकार  भी इस फैसले को राज्य हित में बता रहे हैं. उनका कहना है
कि 'राजस्व पुलिस के पास न फॉरेंसिक सहायता होती थी, न वायरलैस
सिस्टम, न ही आधुनिक जांच तकनीक. ऐसे में किसी केस की विवेचना

लंबी खिंच जाती थी और अपराधी को सबूत मिटाने का समय मिल
जाता था. ऐसे में यह काम बहुत पहले हो जाना चाहिए था.' इसमें कोई
दो राय नहीं है कि राजस्व पुलिस की सीमाओं के कारण अपराधियों को
अक्सर जांच से बच निकलने का मौका मिल जाता था. राजस्व पुलिस
सिर्फ छोटे मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर सकती थी. जबकि, संगीन
मामलों हत्या, बलात्कार, डकैती की जांच आदि रेगुलर पुलिस को
सौंपनी पड़ती थी. इस प्रक्रिया में कई बार महत्वपूर्ण सबूत या गवाह
प्रभावित हो जाते थे. जिससे केस कमजोर हो जाता था. इसके अलावा
राजस्व पुलिस के पास सीमित स्टाफ वेतन और कोई तकनीक या
कानूनी प्रशिक्षण नहीं होता था. कई बार पटवारी के पास एक साथ
राजस्व और पुलिस दोनों जिम्मेदारियां होती थी. जिससे न तो कानून
व्यवस्था मजबूत हो पाती थी, न ही प्रशासनिक काम. इस प्रक्रिया में
कई बार महत्वपूर्ण सबूत या गवाह प्रभावित हो जाते थे. जिससे केस
कमजोर हो जाता था. इसके अलावा राजस्व पुलिस के पास सीमित
स्टाफ वेतन और कोई तकनीक या कानूनी प्रशिक्षण नहीं होता था. कई
बार पटवारी के पास एक साथ राजस्व और पुलिस दोनों जिम्मेदारियां
होती थी. जिससे न तो कानून व्यवस्था मजबूत हो पाती थी, न ही
प्रशासनिक काम. उत्तराखंड पुलिसिंग मॉडल पूरे देश के लिए उदाहरण
बन सकता है. राजस्व पुलिस व्यवस्था की समाप्ति सिर्फ प्रशासनिक
सुधार नहीं, बल्कि सुरक्षा और न्याय व्यवस्था में शानदार परिवर्तन
लाएगा.फिलहाल, यह निर्णय प्रदेश की विकसित होती सामाजिक
संरचना और बढ़ते अपराध के स्वरूप को देखते हुए लिया गया है. अब
देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस सुधार को जमीन पर किस गति
से उतार पाती है, लेकिन जानकार इसे सरकार का सही कदम मान रहे हैं
ग्रामीण इलाकों में लोग उम्मीद कर रहे हैं कि अब पुलिसिंग तेज और

निष्पक्ष होगी, लेकिन सवाल ये भी है कि क्या सरकार इन नए इलाकों
में थानों की संख्या, कर्मचारियों की तैनाती और तकनीकी संसाधनों की
उपलब्धता तत्काल सुनिश्चित कर पाएगी या नहीं? अदालत का दूसरी
बार आदेश आने के बाद तत्काल सम्पूर्ण पटवारी पुलिस व्यवस्था को तत्काल
समाप्त करना संभव नहीं हैं इसलिये सरकार चरणबद्ध तरीके से हस्तांतरण
प्रक्रिया शुरू कर रही है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार 1225 पटवारी
सर्किलों के लिये इतने थानों और हजारों पुलिस कर्मियों का इंतजाम कैसे
करती है और कैसे पहाड़ी समाज वर्दीधारी पुलिस कर्मियों को गावों में सहन
करती है। वैसे भी राजस्व का काम ही बहुत कम है। खेती की 70 प्रतिशत से
अधिक जोतें आधा हेक्टेअर से कम हैं इसलिये ऐसी छोटी जोतों से सरकार
को कोई राजस्व लाभ नहीं होता। अगर पुलिसिंग का दायित्व छिन जाता है
तो समझो कि पहाड़ के पटवारी कानूनगो बिना काम के रह जायेंगे। इसके
साथ ही अल्मोड़ा का पटवारी ट्रेनिंग कालेज और राजस्व पुलिस के
आधुनिकीकरण पर लगाई गयी सरकारी रकम भी बेकार चली जायेगी।.
*लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में*
*कार्यरत हैं*

Share20SendTweet13
Previous Post

बच्चों के लिए प्रतिबंधित कफ सिरप पर सख्त हुई धामी सरकार

Next Post

सीमांत धार्मिक एवं पर्यटन नगरी ज्योतिर्मठ के पर्यटन व्यवसाय को पुनः पटरी पर लाना किसी चुनौती से कम नहीं

Related Posts

उत्तराखंड

केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शांतिकुंज पहुंचकर गायत्री परिवार की अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैलदीदी से भेंट की

June 27, 2026
6
उत्तराखंड

बच्चे, स्कूल एवं रचनात्मकता’ विषय पर दून पुस्तकालय में विचार गोष्ठी

June 27, 2026
7
उत्तराखंड

अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के सामने सबसे बड़ी चुनौती विश्वास बहाली की है

June 27, 2026
5
उत्तराखंड

विकास की भेंट चढ़ते उत्तराखंड के परंपरागत नौले

June 27, 2026
4
उत्तराखंड

भारत में बढ़ रही ई-कचरे की समस्या पर्यावरण को पहुंच रहा नुकसान

June 27, 2026
5
उत्तराखंड

डोईवाला: मदद करने का झांसा देकर एटीएम कार्ड बदला, खाते से 1.45 लाख रुपये उड़ाए

June 27, 2026
41

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67706 shares
    Share 27082 Tweet 16927
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45784 shares
    Share 18314 Tweet 11446
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38061 shares
    Share 15224 Tweet 9515
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37449 shares
    Share 14980 Tweet 9362
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37368 shares
    Share 14947 Tweet 9342

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शांतिकुंज पहुंचकर गायत्री परिवार की अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैलदीदी से भेंट की

June 27, 2026

बच्चे, स्कूल एवं रचनात्मकता’ विषय पर दून पुस्तकालय में विचार गोष्ठी

June 27, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.