• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

बच्चे, स्कूल एवं रचनात्मकता’ विषय पर दून पुस्तकालय में विचार गोष्ठी

_बढ़ाने होंगे रचनात्मकता के असवर: प्रबोध उनियाल

27/06/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
9
SHARES
11
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

 

27 जून,देहरादून। दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र ने अंकुर मंच के सहयोग से आज सांय केन्द्र के सभागार में ‘बच्चे, स्कूल एवं रचनात्मकता’ विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया. और बच्चों के रचनात्मक गतिविधियों पर केंद्रित अंकुर पत्रिका का लोकार्पण किया गया. गोष्ठी में संपादक, प्रकाशक और बाल साहित्य के अध्येता प्रबोध उनियाल ने कहा कि रचना शील समाज कभी संतुष्ट नहीं होता। वह तो सदैव बेहतरी के लिए विचारशील और सक्रिय बना रहता है। ऐसा समाज यथार्थ का अध्ययन करते हुए भविष्य को और प्रगतिशील बनाने का निरंतर प्रयास करता रहता है। बच्चे, शिक्षक, स्कूल और रचनात्मकता ही किसी स्वस्थ समाज के चार सषक्त स्तम्भ हैं। आज आवश्‍यकता इस बात की है कि स्कूल में रचनात्मकता के अवसर बढ़ाए जाएं।
‘बच्चों का नज़रिया’ के पूर्व संपादक एवं काव्यांश प्रकाशन के प्रकाशक प्रबोध उनियाल दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र तथा अंकुर एक सृजनात्मक पहल के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित ‘बच्चे, स्कूल एवं रचनात्मकता’ विषयक विचार गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। श्री उनियाल ने कहा यह समय मिलकर सोचने और समझने का है। नई पीढ़ी की आँखों में बेहतर कल के लिए नए और कई महत्वाकांक्षी सपने हैं। उनके सपनों को साकार करने के लिए हमें बड़े अवरोधक नहीं सहायक की तरह उनका साथ देना होगा। आज मैदान घर के आँगन में सिमट गए हैं। पढ़ाई, ट्यूशन, कोचिंग के बीच बालमन गुमसुम और उदास हो गया है। बच्चों की पीठ भारी-भरकम बस्ते से लदी है। प्रतिस्पर्धा के साथ अनिष्चितता बच्चों को व्यथित कर रहा है। पाठ्यक्रम का बोझ उन्हें परेशान करता है। ये भयावह स्थिति है। ऐसे में अभिभावकों, शिक्षकों, लेखकों को इस दौर के बच्चों में सद्विचार, कल्पना और नवसृजन के लिए रचनात्मकता के अवसर देने होंगे। ताकि वे बेहतर नागरिक की दिषा में आगे बढ़ें।

अंकुर के अध्यक्ष एवं शिक्षक मोहन चौहान ने कहा कि हम षिक्षकों का मानना है कि रचनात्मकता ही है जो हमें अन्य जीवों से अलग करती है। रचनात्मकता साहित्य,कला, संगीत तक सीमित नहीं है। यह कौशल है। छात्रों को लीक से हटकर सोचने और उनकी समस्याओं,उलझनों को सुलझाने का हुनर भी है। रचनात्मकता से ही जटिलता सरलता में बदली जा सकती है। हमारा मानना है कि अभिभावकों, छात्रों और शिक्षकों की त्रिवेणी स्वच्छ और निर्मल समाज स्थापित कर सकती है। प्रत्येक छात्र रचनात्मकता के सहारे स्वतंत्र सोच का निर्माण करते हुए मौलिक कार्यों की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने बताया कि अंकुर इसी दिशा में एक प्रयास करता रहा है। विविध गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की मौलिक अभिव्यक्ति को उभारने का विनम्र प्रयास भर है। असिस्टेंट प्रोफेसर एवं कवयित्री रेखा चमोली ने कहा कि बुनियादी कक्षाओं में नौनिहालों को लिखने की यात्रा कराने से पहले बोलने,सुनने और पढ़ने के अधिकाधिक अवसर देना बेहद ज़रूरी है। ऐसा जिन विद्यालयों में होता रहा है वहाँ के विद्यार्थी समाज की मुख्यधारा में स्वस्थ और सकारात्मक योगदान देते हैं। आज के दौर में तो मानवता और संवेदनशीलता की अत्यधिक आवष्यकता है। रचनाशील समाज संकुचित हो रहा है और विध्वंसात्मक सोच हावी हो रही है। ऐसे में आपसी सौहार्द, हम की भावना को बढ़ाने के लिए रचनात्मक कार्यो और गतिविधियों की बहुत आवष्यकता है।

संचालन कर रहे शिक्षक प्रदीप बहुगुणा ‘दर्पण’ ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति के लिए पढ़ा-लिखा समाज अहम् भूमिका निभाता है। लेकिन यह भी सच है कि एक सुंदर, विकसित सभी के लिए सुलभ सुविधाओं से युक्त समाज को बनाने में रचनाषीलता सबसे ज़रूरी तत्व है। पत्रिका की छात्र संपादक रही प्रियांशी ने कहा कि अंकुर पत्रिका रचना सामग्री का पुलिंदा मात्र नहीं है। प्रियांशी ने बताया कि यह शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों की साथ-साथ की गई यात्रा है। लेखन कौषल को बनाने और संवारने में शिक्षकों की पुरजोर कोशिस का कोई मोल नहीं है।

साहित्यकार एवं शिक्षक मनोहर चमोली ‘मनु’ ने कहा कि अंकुर पत्रिका के चौथे अंक में राजकीय इंटर कॉलेज खरसाड़ा के 173 विद्यार्थियों ने बतौर रचनाकार रचनाएं लिखीं। उन्होंने कहा कि अंकुर से जुड़े षिक्षक विद्यालयों में बाल लेखन कार्यशालाएं आयोजित करते हैं। उन्हें विभिन्न विधाओं से परिचित कराते हैं। हस्तलिखित पत्रिका के साथ यदि संभव होता है तो विद्यालयी स्तर पर पत्रिका के प्रकाशन में सहयोग करते हैं। यह विद्यार्थियों की कल्पना, संवेदना और अभिव्यक्ति का अभिलेखीकरण तो होता ही है साथ ही में नई पीढ़ी पढने-लिखने की ओर उन्मुख होती है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपनी अभिव्यक्ति को प्रकाशित होता हुआ देखकर प्रोत्साहित होते हैं।
शिक्षक एवं चाय पे चर्चा के स्तंभकार सतीश जोशी ने कहा कि रचनात्मक लेखन छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के मध्य एक खास कड़ी का काम करता है। समुदाय में पढ़ने-लिखने का महत्व हर काल में रहा है। यह अब और भी ज़रूरी हो गया है।

वक्ताओं ने माना कि सूचना तकनीक के इस युग में रचनात्मक लेखन आवश्‍यक है। किताब से पढ़ना और हाथ से लिखना इस आदत में लगातार कमी आती जा रही है। इसे बनाए रखने के लिए भी पत्रिकाओं का प्रकाशन होना ही चाहिए।

इस अवसर पर कार्यक्रम के आरंभ में दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के कार्यक्रम अधिकारी चंद्रशेखर तिवारी ने केंद्र के उद्देश्यों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज बच्चों में मौलिक लेखन की आदत विकसित करना चुनौतीपूर्ण तो है पर इसे करना होगा।

चर्चा से पूर्व अंकुर पत्रिका का लोकार्पण भी किया गया। लोकार्पण अवसर पर अंकुर टीम के साथ-साथ दून के साहित्यकार मुकेश नौटियाल, राजेन्द्र पुरोहित,राकेश पोखरियाल, जन कवि अतुल शर्मा, रंजना शर्मा, रेखा शर्मा, डॉ॰ ललिता प्रसाद, धमेन्द्र आर्य, सीमा चौहान, विजय लक्ष्मी सेमल्टी, सुरेंद्र दत्त सेमल्टी, अशर्फी ठाकुर, इंद्रेश नौटियाल, विजय भट्ट, गीता, प्रवीन भट्ट, सुनीता मोहन, कीर्ति भण्डारी, सुन्दर सिंह बिष्ट भी उपस्थित रहे. कार्यक्रम में विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षक और रचनाकारों ने भाग लिया और अपने विचार व्यक्त किए।

 

Share4SendTweet2
Previous Post

अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के सामने सबसे बड़ी चुनौती विश्वास बहाली की है

Next Post

केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शांतिकुंज पहुंचकर गायत्री परिवार की अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैलदीदी से भेंट की

Related Posts

उत्तराखंड

शहीद स्मारक में राज्य आंदोलनकारी मंच की राज्य आंदोलनकारियों के मसले पर बैठक

July 19, 2026
4
उत्तराखंड

लोकिप्रय फल शरीर को मजबूत बनाती है नाशपाती

July 19, 2026
7
उत्तराखंड

शिक्षा में पारदर्शिता और गुणवत्ता का प्रश्न

July 19, 2026
6
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय विद्युत मंत्री से ऊर्जा परियोजनाओं एवं पिटकुल की एडीबी सहायतित पारेषण परियोजना पर की चर्चा

July 19, 2026
4
उत्तराखंड

सावन के पहले सोमवार को पूजा अर्चना के लिए पिंडर घाटी के शिवालय भक्तों के लिए सजे

July 19, 2026
8
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शाइन अवी लर्निंग “समावेशी शिक्षा मिशन-2030” का शुभारंभ किया

July 19, 2026
7

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67712 shares
    Share 27085 Tweet 16928
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45786 shares
    Share 18314 Tweet 11447
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38068 shares
    Share 15227 Tweet 9517
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37453 shares
    Share 14981 Tweet 9363
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37370 shares
    Share 14948 Tweet 9343

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

शहीद स्मारक में राज्य आंदोलनकारी मंच की राज्य आंदोलनकारियों के मसले पर बैठक

July 19, 2026

लोकिप्रय फल शरीर को मजबूत बनाती है नाशपाती

July 19, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.